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Dehradun News: देहदान, अंगदान और नेत्रदान करने वालों के परिजनों का हुआ सम्मान
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II- दधीचि देहदान समिति के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर सम्मान समारोह का आयोजनI
I- कार्यक्रम में समिति की स्मारिका का विमोचन किया गया
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Iदधीचि देहदान समिति के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर देहदान, अंगदान और नेत्रदान करने वाले दिवंगत के परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रविवार को सर्वे चौक स्थिति आईआरडीटी ऑडिटोरियम में किया गया।
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Iकार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, मुख्य वक्ता दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष चिकित्सा शिक्षा निदेशक व दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, विशिष्ट अतिथि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तरन्नुम शकी रहीं।
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Iकार्यक्रम के दौरान समिति की स्मारिका का विमोचन किया गया। पिछले पांच महीने में समिति के माध्यम से जिन चार महादानियों के शरीर का दान हुआ है। इनके परिवारों को सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल छात्रों को शोध के लिए मृत देह की आवश्यकता होती है। इनके बिना शोध करना संभव नहीं होता है। सामाजिक सहयोग के बिना मृत देह मिलना संभव नहीं होता है।
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Iडॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि 1950 में दुनिया में पहली किडनी का प्रत्यारोपण हुआ था तब से लेकर आज तक अन्य अंगों का प्रत्यारोपण होने लगा है। समाज की यह धारणा बन चुकी है कि किसी भी वस्तु के बिगड़ने पर उसकी मरम्मत करने के स्थान पर उसको बदल दिया जाए।
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Iनेत्रदान के लिए लोगों में कई तरह के मिथ
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Iडॉ. तरन्नुम शकील ने कहा कि नेत्रदान को लेकर लोगों में कई तरह के मिथ हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि नेत्रदान करने के बाद अगले जन्म में आंखें नहीं मिलेंगी यह बिल्कुल गलत है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि यदि आंखों की रोशनी कमजोर है तो नेत्रदान नहीं कर सकते। यह भी बिल्कुल गलत मिथ है।
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Iदून अस्पताल में जल्द शुरू होगा सोटो सेंटर
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Iकार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज में सोटो के गठन का कार्य पूरा हो चुका है। चुनाव खत्म होने के बाद सोटो सेंटर का उद्घाटन किया जाएगा। ऐसे में उत्तराखंड में देहदान और अंगदान की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज में अंग प्रत्यारोपण का कार्य भी जल्द ही शुरू हो जाएगा। डॉ. सयाना ने दधीचि देहदान समिति से कहा कि यदि वह चाहते हैं तो दून अस्पताल में अपना एक सेंटर खोल सकते हैं। वहीं, समिति की ओर से यह आग्रह किया गया कि समिति चाहती है कि दून अस्पताल में एक दीवार मिल जाए जहां पर वह देहदानियों की तस्वीरें लगा सकें। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।
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Iनौ देहदान और 12 नेत्र दान हो चुके
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Iसमिति के महासचिव नीरज पांडेय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 274 व्यक्तियों ने देह, अंग एवं नेत्र दान का संकल्प लिया है। समिति अपने दो वर्ष के कार्यकाल में अब तक कुल नौ देहदान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून में, 12 जोड़े नेत्रों का दान निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान, नेपाली फार्म ऋषिकेश, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल देहरादून में संपन्न हुआ है।
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Iकार्यक्रम के अंत में समिति के कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार अरोड़ा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन समिति के महासचिव नीरज पांडेय ने किया। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष मुकेश गोयल, श्री निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान से आए आत्म स्वरूप बाबूजी, डॉ. महेंद्र पंत, डॉ. राजेश मौर्य, डॉ. राकेश गोयल, सुरेंद्र मित्तल, अनिल नंदा, निशा अग्रवाल, चंद्रगुप्त विक्रम, डॉ. प्रशांत सिंह, डोली डबराल, प्रोफेसर अतुल गुप्ता, गोपाल गर्ग, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. दिनेश सिंह रावत समेत अन्य लोग मौजूद रहे।I
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II- दधीचि देहदान समिति के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर सम्मान समारोह का आयोजनI
I- कार्यक्रम में समिति की स्मारिका का विमोचन किया गया
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Iदधीचि देहदान समिति के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर देहदान, अंगदान और नेत्रदान करने वाले दिवंगत के परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रविवार को सर्वे चौक स्थिति आईआरडीटी ऑडिटोरियम में किया गया।
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Iकार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, मुख्य वक्ता दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष चिकित्सा शिक्षा निदेशक व दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, विशिष्ट अतिथि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तरन्नुम शकी रहीं।
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Iकार्यक्रम के दौरान समिति की स्मारिका का विमोचन किया गया। पिछले पांच महीने में समिति के माध्यम से जिन चार महादानियों के शरीर का दान हुआ है। इनके परिवारों को सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल छात्रों को शोध के लिए मृत देह की आवश्यकता होती है। इनके बिना शोध करना संभव नहीं होता है। सामाजिक सहयोग के बिना मृत देह मिलना संभव नहीं होता है।
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Iडॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि 1950 में दुनिया में पहली किडनी का प्रत्यारोपण हुआ था तब से लेकर आज तक अन्य अंगों का प्रत्यारोपण होने लगा है। समाज की यह धारणा बन चुकी है कि किसी भी वस्तु के बिगड़ने पर उसकी मरम्मत करने के स्थान पर उसको बदल दिया जाए।
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Iनेत्रदान के लिए लोगों में कई तरह के मिथ
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Iडॉ. तरन्नुम शकील ने कहा कि नेत्रदान को लेकर लोगों में कई तरह के मिथ हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि नेत्रदान करने के बाद अगले जन्म में आंखें नहीं मिलेंगी यह बिल्कुल गलत है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि यदि आंखों की रोशनी कमजोर है तो नेत्रदान नहीं कर सकते। यह भी बिल्कुल गलत मिथ है।
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Iदून अस्पताल में जल्द शुरू होगा सोटो सेंटर
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Iकार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज में सोटो के गठन का कार्य पूरा हो चुका है। चुनाव खत्म होने के बाद सोटो सेंटर का उद्घाटन किया जाएगा। ऐसे में उत्तराखंड में देहदान और अंगदान की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज में अंग प्रत्यारोपण का कार्य भी जल्द ही शुरू हो जाएगा। डॉ. सयाना ने दधीचि देहदान समिति से कहा कि यदि वह चाहते हैं तो दून अस्पताल में अपना एक सेंटर खोल सकते हैं। वहीं, समिति की ओर से यह आग्रह किया गया कि समिति चाहती है कि दून अस्पताल में एक दीवार मिल जाए जहां पर वह देहदानियों की तस्वीरें लगा सकें। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।
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Iनौ देहदान और 12 नेत्र दान हो चुके
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Iसमिति के महासचिव नीरज पांडेय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 274 व्यक्तियों ने देह, अंग एवं नेत्र दान का संकल्प लिया है। समिति अपने दो वर्ष के कार्यकाल में अब तक कुल नौ देहदान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून में, 12 जोड़े नेत्रों का दान निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान, नेपाली फार्म ऋषिकेश, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल देहरादून में संपन्न हुआ है।
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Iकार्यक्रम के अंत में समिति के कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार अरोड़ा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन समिति के महासचिव नीरज पांडेय ने किया। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष मुकेश गोयल, श्री निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान से आए आत्म स्वरूप बाबूजी, डॉ. महेंद्र पंत, डॉ. राजेश मौर्य, डॉ. राकेश गोयल, सुरेंद्र मित्तल, अनिल नंदा, निशा अग्रवाल, चंद्रगुप्त विक्रम, डॉ. प्रशांत सिंह, डोली डबराल, प्रोफेसर अतुल गुप्ता, गोपाल गर्ग, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. दिनेश सिंह रावत समेत अन्य लोग मौजूद रहे।I