एक्सक्लूसिव:...तो आजादी से पहले ही रेल लाइन से जुड़ जाती पर्यटन नगरी रानीखेत
- अंग्रेज वायसराय लार्ड मेयो ने दिए थे रेल लाइन के सर्वे के आदेश
- ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को रानीखेत करना चाहते थे शिफ्ट
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वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों को रेल लाइन से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। आजादी से पूर्व की बात करें तो पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात रानीखेत ब्रिटिश शासन में ही रेल लाइन से जुड़ जाती और शायद यह कुमाऊं की पहली रेल लाइन भी होती।
भारत के चौथे वायसराय रहे लार्ड मेयो रानीखेत के प्राकृतिक सौंदर्य से इतने अभिभूत थे कि वह ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला से रानीखेत स्थानांतरित करना चाहते थे। त्वरित विकास के लिए उन्होंने रामनगर से रानीखेत तक रेल लाइन के सर्वे के आदेश तक दिए थे, लेकिन 1872 में उनकी मृत्यु के बाद उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। इस पर कई लोगों ने बाद में रिसर्च भी किया।
यहां छावनी बसाने से पूर्व अंग्रेज हुक्मरानों ने 1869 में जंगल को काटकर सड़कों और बैरकों का निर्माण करने का निर्णय लिया। इसके लिए सेना का अग्रिम दल यहां भेजा गया था। लंदन मिशन सोसायटी के पादरी जेम्स केनेडी ने अपनी किताब लाइफ एंड वर्क इन बनारस एंड कुमाऊं में लिखा है कि 1869 में यहां एक भी घर नहीं था।
दो यूरोपीय इंजीनियर और एक सार्जेंट एक रसोई में रहते थे। इसके बाद से निर्माण शुरू हुए। 1869 से 1972 तक लार्ड मेयो भारत के वायसराय रहे। जब उन्होंने पहली बार रानीखेत का भ्रमण किया तो उन्हें रानीखेत काफी सुंदर लगा। उन्होंने रामनगर से रानीखेत तक रेलवे लाइन बिछाने और सर्वे कराने के आदेश जारी किए, लेकिन असमय मौत के कारण यह सपना सपना ही रह गया।
हिमाचल में रेलवे लाइनों का जाल बिछाया गया
इसके बाद शिमला ही राजधानी रही और हिमाचल में रेलवे लाइनों का जाल बिछाया गया। आजादी के बाद समय समय पर लोगों ने भी रेलवे लाइन बिछाने को लेकर सरकार को ज्ञापन भेजे। 1996 में तत्काल रेल मंत्री सतपाल महाराज, 2004 में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तक मांग पहुंचाई गई। वर्तमान में जहां चौखुटिया को रेल लाइन से जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं, वहीं बागेश्वर से भी मांग उठ रही है। यदि अंग्रेज शासनकाल में रानीखेत रेलवे से जुड़ गया होता तो शायद कुमाऊं की यह पहली रेल लाइन होती। संवाद
मैंने रानीखेत के अभ्युदय और विकास विषय को लेकर लंबा रिसर्च किया है। जिसमें रानीखेत का पुरातन इतिहास, अंग्रेजों की खोज, रानीखेत निर्माण एवं विकास, वायसरॉय लार्ड मेयो के जीवन सहित कई विषय शामिल रहे। लार्ड मेयो ने रेल लाइन बिछाने के आदेश तो दिए थे, लेकिन उस वक्त के प्रपत्र उपलब्ध नहीं हो पाए।
-डा. महिराज माहरा, प्राध्यापक, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत।
रानीखेत को रेल लाइन से जोड़ने तथा अंग्रेज शासनकाल में आदेशित रामनगर से रानीखेत तक की सर्वे को शुरू करने की मांग को लेकर 1990 के बाद से ही तमाम रेल मंत्रियों को पत्र भेजकर आग्रह किया गया, लेकिन किसी ने भी इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। लार्ड मेयो की असमयिक मौत हो गई, यदि वह जिंदा होते तो रानीखेत में रेल लाइन और राजधानी दोनों विकसित हो जाती।
-मोहन नेगी, पूर्व उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड रानीखेत।