एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: केजरीवाल का एलान, उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी आप
- दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अमर उजाला से खास बातचीत में किया रणनीति का खुलासा
- कहा, किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा, इसी सप्ताह होगी औपचारिक घोषणा
- पार्टी के सर्वे के अनुसार प्रदेश की 62 फीसदी जनता चाहती है कि आप विधानसभा चुनाव लड़े
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विस्तार
पंजाब और गोवा के बाद उत्तराखंड तीसरा राज्य है, जहां आम आदमी पार्टी पूरी गंभीरता से चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी इसी सप्ताह उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने जा रही है। डेढ़ माह पहले राज्य में कराए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से उत्साहित होकर आप पार्टी ने उत्तराखंड को कर्मभूमि बनाने का मन बनाया है।
अमर उजाला को दिए गए एक्सक्लूसिव वर्चुअल इंटरव्यू में आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने माना कि वर्तमान में आप का बड़ा संगठन या नेटवर्क उत्तराखंड में नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि चुनाव पब्लिक की उम्मीद से लड़े जाते हैं, संगठन से नहीं। जनता की आशाएं साथ हों और नेताओं की नीयत ठीक हो, तो संगठन बनने में देर नहीं लगती। कहा- दिल्ली में भी आप के पास संगठन नहीं था, लेकिन पार्टी बनने के दो साल के भीतर ही आप ने कांग्रेस जैसी सवा सौ साल पुरानी और भाजपा जैसी चालीस साल पुरानी पार्टी को घुटनों पर बैठा दिया।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में आप पार्टी को उत्तराखंडी आबादी से भरपूर समर्थन मिलता रहा है। उन्होंने देश की राजधानी में स्कूलों और अस्पतालों का कायाकल्प होते देखा है। उन्होंने ही पार्टी से अनुरोध किया कि आप पार्टी को उत्तराखंड की राजनीति में उतरना चाहिए।
क्या कांग्रेस और भाजपा के जनाधार में सेंध लगाना आसान होगा?
इसके अलावा दिल्ली से उत्तराखंड लौटे प्रवासियों ने भी प्रदेश में लौटकर पाया कि कोरोना नियंत्रण और स्कूल सुधार के लिए प्रदेश में आप पार्टी को आना चाहिए। इसी फीडबैक के आधार पर आप ने डेढ़ माह पहले प्रदेश में एक व्यापक सर्वे कराया, जिसमें 62 प्रतिशत लोगों ने इच्छा जताई कि आप को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेना चाहिए।
लेकिन क्या कांग्रेस और भाजपा के जनाधार में सेंध लगाना आसान होगा? इस सवाल के जवाब में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि बाकी देश की तरह उत्तराखंड में भी कांग्रेस खत्म हो चुकी है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में लोगों ने देखा कि कांग्रेस को वोट देना बेकार है क्योंकि वे बाद में भाजपा से मिल जाते हैं। भाजपा खुश है कि विपक्ष खत्म हो चुका है इसलिए उसकी काम में रूचि नहीं रही। राज्य में भाजपा ने एक भी उल्लेखनीय काम किया तो कोई बताए।
कहा कि उत्तराखंड में भी दलबदल का इतिहास रहा है। भयानक नेतृत्वहीनता के इस दौर में उत्तराखंड की जनता इन दोनों पार्टियों से खिन्न है और बेहतर विकल्प चाहती है। इसलिए जनाधार बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आप का चुनाव आप के कार्यकर्ता नहीं, जनता लड़ेगी। वही आप को पैसा और वोट देगी, वही आप के लिए पैसा और वोट मांगेगी। उत्तराखंड की जनता चुनाव लड़ेगी, केजरीवाल नहीं।
उत्तराखंड के सबसे बड़े मुद्दे गिनाए
केजरीवाल ने कहा कि रोजगार की कमी से पैदा हुआ पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सरकारी स्कूल-कॉलेजों में अच्छी शिक्षा का अभाव, ये तीन मुद्दे उत्तराखंड के सबसे बड़े मुद्दे हैं। दिल्ली में आप पार्टी ने इन्हीं तीनों पर फोकस किया और जनता का विश्वास हासिल किया। उत्तराखंड में भी वही प्रयोग दोहराया जाएगा। प्रदेश के हर गांव की पहुंच में एक मोहल्ला क्लिनिक बनाया जाएगा।
शहरों की सुविधाओं को गांव तक पहुंचा कर पलायन रोका जाएगा। स्थानीय संसाधनों से जोड़कर स्वरोजगार और छोटे कारोबार को बढ़ावा देकर बेरोजगारी की समस्या दूर की जाएगी। देवभूमि के लिए आपदा प्रबंधन की विशेष रणनीति बनेगी। हर स्तर पर प्रकृति संरक्षण की व्यवस्था होगी। साथ ही पूरी दुनिया को धर्म सिखाने वाले इस प्रदेश में चारधाम समेत सभी आस्था केंद्रों की रक्षा और प्रोत्साहन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आस्था और विकास एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। दोनों को मिलाकर उत्तराखंड का एक विशेष विकास मॉडल बनेगा और इस मॉडल को आप पार्टी नहीं, प्रदेश की जनता ही मिल बैठकर बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति, आपदा और समाधान, इनका सबसे अच्छा ज्ञान स्थानीय आबादी को होता है। आप पार्टी उसी स्थानीय प्रतिभा का सदुपयोग अपने नीति निर्णयों के लिए करेगी।
केजरीवाल से सवाल-जवाब
केजरीवाल: दिल्ली में कोरोना का असर बहुत ज्यादा था। 22 मार्च को लॉकडाउन लगने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बीमारी लेकर आ चुकी थीं। नई दिल्ली में 35 हजार लोग बाहर से आए थे और फैल गए। लेकिन हमने सारे मतभेद भुलाकर केंद्र से, हर सामाजिक-धार्मिक संस्था से सहयोग लिया और महामारी से जंग लड़ी। हर स्तर पर सीखते हुए अपनी गलतियां सुधारीं और फिलहाल हम कह सकते हैं कि महामारी नियंत्रण में है।
प्रश्न: आप कैसे कह सकते हैं कि अब दिल्ली सेफ जोन में है?
केजरीवाल: देखिए, महामारी के हर पैरामीटर पर सुधार हुआ है। 23 जून को एक दिन में 3970 मामले संक्रमण के आए थे। आज यह संख्या औसतन 1000 केस दैनिक है। जून माह में हर दिन 100 मौतें हो रही थीं। आज यह आंकड़ा 10-12 मौतों के बीच है। मौतों का आंकड़ा 90 प्रतिशत तक कम हुआ। ठीक होने वालों की दर भी काफी बढ़ गई है। देश में सबसे अधिक रिकवरी रेट दिल्ली का है। जून में सौ लोगों का टेस्ट करते थे तो 35 पॉजिटिव मिलते थे। आज यह दर छह-सात रह गई है।
प्रश्न: दिल्ली में लगातार चुनाव जीत कर आपने अलग पहचान बनाई, लेकिन आज भी आपकी गिनती प्रमुख विपक्षी दलों में नहीं होती। यह पदवी कांग्रेस के पास है?
केजरीवाल: हकीकत यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को लेकर एक बहुत बड़ा खालीपन (वेक्यूम) है। कांग्रेस पार्टी खत्म हो चुकी है। उसके नेतृत्व में विश्वसनीयता की कमी है। जिन कुछ जगहों पर कांग्रेस है, वहां उसके विधायक बिक गए। कर्नाटक, मध्यप्रदेश हाथ से निकल गए, राजस्थान मुश्किल से बचा। लोग ये मानने लगे हैं कि वे कांग्रेस को वोट देते हैं और कांग्रेस के एमएलए बीजेपी की सरकार बनवा देते हैं। बीजेपी तो इससे खुश है। उसे कोई काम करने की जरूरत ही नहीं है। ऐसे में जनता के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। अब यह जनता को सोचना है कि यह वेक्यूम कैसे भरा जाए।
प्रश्न: आप पार्टी के लिए उत्तराखंड कितना अहम है और 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर आप कितने गंभीर हैं?
केजरीवाल: दिल्ली में उत्तराखंड के लोगों की बहुत बड़ी संख्या है। विस चुनाव में उनका हमें बहुत प्यार मिला। कोरोनाकाल में बहुत से लोग उत्तराखंड चले गए। इसी दौरान बहुत से लोग मुझसे मिले। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि आप उत्तराखंड से चुनाव लड़े। इसके बाद उत्तराखंड में एक सर्वे कराया। इस सर्वे में 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि आप को यहां चुनाव लड़ना चाहिए। अब हमने पूरी गंभीरता के साथ यहां चुनाव लड़ना तय किया है।
प्रश्न: आप की नजर में आज की तारीख में उत्तराखंड के सबसे बड़े मुद्दे क्या हैं?
केजरीवाल: रोजगार सबसे अहम मुद्दा है। उस के लिए लोग पलायन कर रहे हैं। दूसरा प्रमुख मुद्दा शिक्षा का है। स्कूलों में अध्यापक नहीं हैं। सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है। प्राइवेट स्कूल शोषण कर रहे हैं। तीसरा मुद्दा स्वास्थ्य सेवाओं का है। आज भी वहां पहाड़ पर लोगों को चारपाई पर मरीजों को लेकर आते हैं और महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। 21वीं सदी में ये 20वीं सदी जैसे हालात चिंताजनक हैं।
प्रश्न- उत्तराखंड में आप का न तो कोई सांगठनिक नेटवर्क है न इतिहास, आखिर भाजपा और कांग्रेस सरीखे मजबूत दलों को कैसे चुनौती देंगे?
केजरीवाला: चुनाव संगठन से नहीं, जनता की उम्मीद से लड़ा जाता है। दिल्ली में हमारा कितना संगठन था और कितना इतिहास था? नवंबर 2012 में आप पार्टी बनी थी और दो साल में ही हमने इतिहास बना दिया। हमारा संगठन जनता ही बनाती है। दिल्ली में भी मजबूत संगठन और भरपूर संसाधनों वाली भाजपा और कांग्रेस सरकारें रही हैं। हमने उन्हें कई बार हराया। जिस तरह दिल्ली में जनता ने ही हमें चुनाव लड़ाया, प्रचार किया, पैसा लगाया। यहां भी उत्तराखंड की जनता ही हमें चुनाव लड़ाएगी। पैसा लगाएगी और हमारा प्रचार करेगी। उत्तराखंड में आप पार्टी पैसे या संगठन से नहीं, जनांदोलन से चुनाव लड़ेगी और दिल्ली की तरह इतिहास रचेगी।
प्रश्न: क्या किसी क्षेत्रीय दल से गठजोड़ भी हो सकता है?
केजरीवाल: नहीं। आम आदमी पार्टी सभी 70 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारेगी। किसी भी दल से कोई गठबंधन नहीं करेगी।
प्रश्न: कांग्रेस और भाजपा में ऐसी कौन सी कमियां हैं, जिनकी वजह से आप उत्तराखंड में अपनी राजनीतिक संभावनाएं देख रहे हैं?
केजरीवाल: सिर्फ एक मिसाल देख लीजिए। पिछले दिनों चीन हमलावर था और कोरोना चरम पर था। लेकिन भाजपा और कांग्रेस कहां व्यस्त थे? दोनों राजस्थान में सरकार गिराने-बचाने के खेल में जुटे थे। एक विधायक खरीदने में बिजी थी और दूसरी पार्टी विधायकों को बाड़े में बंद करके बचाने में जुटी थी। ये हमारी राष्ट्रीय पार्टियों का चरित्र है। इसीलिए कहता हूं कि आम आदमी छला हुआ महसूस कर रहा है और ईमानदार विकल्प चाहता है। उत्तराखंड को भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी से लूटा है। मौका आने पर विधायकों की खरीदफरोख्त भी हुई। दोनों की फितरत को वोटर समझ चुका है। इन दोनों दलों में सबसे बड़ी कमी नीयत की है।
प्रश्न: आपने कहा, रोजगार यहां एक प्रमुख मुद्दा है। आप के पास ऐसा कौन सा फॉर्मूला है कि रोजगार के मुद्दे का समाधान कर देगी, जबकि उत्तराखंड के युवाओं में सरकारी नौकरी को लेकर ज्यादा चाव रहता है।
केजरीवाल: हमने दिल्ली में स्वरोजगार को लेकर स्कूलों में प्रयोग किया। युवाओं को कुछ पूंजी दी और उन्हें बिजनेस करना सिखाया। इससे वे आत्मनिर्भरता की मानसिकता वाले बने। उत्तराखंड में भी यदि सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं और वहां रह रहे लोगों को स्थानीय उत्पादों पर आधारित बिजनेस के लिए प्रेरित किया जाए तो रोजगार का रास्ता निकाला जा सकता है। हम उत्तराखंड के नौजवान को नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाना चाहते हैं। सरकारों के पास संसाधनों की कमी कभी नहीं होती। नीयत की कमी होती है। नीयत ठीक होगी तो रोजगार की संभावनाएं खूब लहलहाएंगी।
प्रश्न: मोहल्ला क्लिनिक का फॉर्मूला दिल्ली में कामयाब रहा, लेकिन अलग और कठिन भौगोलिक हालात वाले उत्तराखंड में यह प्रयोग कितना करामाती साबित होगा? यहां कितने मोहल्ला क्लिनिक खोलेंगे?
केजरीवाल: दिल्ली में हमने मोहल्ला क्लिनिक का यह प्रयोग सत्ता में आने के बाद किया। उत्तराखंड में भी हम हर गांव की पहुंच में एक मोहल्ला क्लिनिक खोलने का इरादा रखते हैं। लेकिन उसके लिए हमें यहां सत्ता में आना होगा। एक मोहल्ला क्लिनिक खोलने और उसे संचालित करने में एक साल में 80 लाख रुपये खर्च होते हैं। हजारों क्लिनिक खोलने के लिए बड़ी धनराशि चाहिए। उत्तराखंड की हर बस्ती में मोहल्ला क्लिनिक खोलना है। डंडी-कंडी से यहां की जनता को मुक्त कराना है।
प्रश्न: खाली होते गांवों में वीरान पड़े स्कूलों में शिक्षा का स्तर कैसे सुधारेंगे?
केजरीवाल: गांवों में शहर जैसी सुविधाएं मिलेंगी तो पलायन क्यों होगा? पास के सरकारी स्कूल में ही अगर उम्दा शिक्षा मिलेगी तो कोई क्यों अपनी जमीन छोड़ेगा? स्थानीय संसाधनों के बूते स्वरोजगार विकसित करके हम खाली गांव और खाली स्कूल दोनों समस्याओं पर वार करेंगे। अभी तो प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों का शोषण जनता को मार रहा है।
प्रश्न: उत्तराखंड की एक समस्या आपदा नियंत्रण भी है। उसके लिए आपकी योजना?
केजरीवाल: आपदाओं के मूल में अनियंत्रित विकास, अवैध कब्जे ,भ्रष्टाचार और प्रकृति से खिलवाड़ है। आपदा नियंत्रण की हमारी रणनीति उत्तराखंड के स्थानीय लोगों की राय से बनेगी। प्रकृति, उसकी समस्याएं और उनके समाधान। इन सबका सबसे अच्छा ज्ञान स्थानीय लोगों को होता है। उनके सहयोग और परामर्श से आपदा नियंत्रण योजनाएं बनेंगी।
प्रश्न: चार धामों के गढ़ उत्तराखंड में मतदाता बहुत आस्थावान है। दिल्ली के विकास मॉडल का यहां के धर्मप्रेमी जनमानस के साथ विरोधाभास तो नहीं होगा?
केजरीवाल: विकास और आस्था विरोधाभासी नहीं, वरन एक दूसरे के पूरक हैं। उत्तराखंड देवभूमि है। यहां तो प्रकृति को भी पूजा जाता है। यह राज्य पूरे देश के लिए संजीवनी है। जड़ी-बूटी का भंडार है। पूरी दुनिया को धर्म सिखाने वाली पवित्र धरा है यह। आप पार्टी देवभूमि के इस विशिष्ट चरित्र को संरक्षित करेगी। सारे धाम, सारे आस्था केंद्र सुचारू काम करेंगे और विकसित होंगे।
प्रश्न: उत्तराखंड में कांग्रेस के पास हरीश रावत तो बीजेपी के पास निशंक और त्रिवेंद्र रावत जैसे बड़े नाम हैं जो जमीन से जुड़े हैं। आप के पास भी बड़े चेहरे हैं लेकिन वे दिल्ली की राजनीति से कितनी फुर्सत उत्तराखंड के लिए निकाल पाएंगे?
केजरीवाल: बड़े नाम या चेहरे की जरुरत ही क्या है? उत्तराखंड में हमारा चुनाव उत्तराखंड के लोग ही लड़ेंगे। उत्तराखंड की जनता के चेहरे ही सरकार बनाएंगे। हम जैसे लोग तो बस दूर से उनकी नीयत और ईमानदारी की निगरानी करेंगे। हां, चुनाव प्रचार में पूरा वक्त हम देंगे। इसके अलावा जब भी हमारी जरुरत होगी, हम हाजिर हो जाएंगे। देवभूमि के दौरे का मौका भला कौन गंवाना चाहेगा?