शिवलिंग पीक की परिक्रमा के दौरान एवरेस्टर ने खोज निकाले 'गणेश' और 'पार्वती', देखकर नहीं कर पाए यकीन
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वर्षों इंतजार और कठोर परिश्रम के बाद एवरेस्टर विश्वेश्वर सेमवाल व उनके दल ने शिवलिंग पीक की परिक्रमा पूरी कर एक नया हाई एल्टीट्यूड ट्रेकिंग रूट खोज निकाला है। ग्यारह दिवसीय अभियान में दल ने गंगोत्री पर्वत श्रृंखला के इस अनछुए हिस्से में कई नए पड़ाव खोज निकाले हैं, जिन्हें भगवान शिव के सम्मान में पार्वती कैंप, गणेश कैंप आदि नाम दिए गए हैं। दल की इस खोज से गंगोत्री क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर की तर्ज पर शिवलिंग की परिक्रमा यात्रा के मार्ग भी खुल गए हैं।
बता दें कि विगत 15 सितंबर को स्नो स्पाइडर ट्रैक एंड टूर के संयोजक एवरेस्टर विश्वेश्वर सेमवाल के नेतृत्व में निर्मल सिंह भांवली, शैलेष सेमवाल व प्रेम सिंह ने शिवलिंग पीक की परिक्रमा का अभियान शुरू किया था। दल गंगोत्री से भोजवासा, गोमुख होते हुए तपोवन पहुंचा, यहां से यात्रा आरंभ कर दल कीर्ति ग्लेशियर व एडवांस बेस कैंप होते हुए 4745 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचा।
इस स्थान को दल ने भगवान शिव के सम्मान में पार्वती कैंप का नाम दिया। इस स्थान से कुछ आगे चलते ही दल को दूध के समान सफेद जल धारा दिखी, जिसे दूध गंगा नाम दिया गया। यहां से छोटे बड़े हिमखंडों को पार कर दल 21 सितंबर को 5600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अंतिम पड़ाव पर पहुंचा, जिसे गणेश कैंप नाम दिया गया।
चारों धामों का केंद्र है माउंट शिवलिंग
इस स्थान पर पहुंचते ही मौसम ने करवट बदल ली और लगातार 82 घंटों तक भारी बर्फबारी होने से अगले चार दिनों तक दल इसी स्थान पर फंसा रहा। हालांकि मौसम खुलते ही दल ने परिक्रमा के सबसे ऊंचे स्थान 5700 मीटर की रेकी कर अभियान को पूरा कर लिया।
बुधवार को उत्तरकाशी पहुंचने पर विश्वेश्वर सेमवाल ने बताया कि इस अभियान के लिए वह बीते छह-सात वर्षों से तैयारी कर रहे थे, लेकिन बजट के अभाव में उन्हें पीछे हटना पड़ रहा था। हालांकि कड़े परिश्रम के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो गया है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार सहयोग करे तो इस परिक्रमा यात्रा को कैलाश मानसरोवर की तर्ज पर संचालित किया जा सकता है, जिससे जिले के पर्यटन को मजबूती मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि आज बृहस्पतिवार को देहरादून में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के नेतृत्व में दल का फ्लैग इन समारोह आयोजित होगा।
चारों धामों का केंद्र है माउंट शिवलिंग
उत्तरकाशी। एवरेस्टर विश्वेश्वर सेमवाल के मुताबिक माउंट शिवलिंग उत्तराखंड के चारों धामों के मध्य में स्थित है। कंटूर मैपिंग तकनीक से किए गए सर्वे के अनुसार शिवलिंग से केदारनाथ और बदरीनाथ की हवाई दूरी 11 किमी है। जबकि गंगोत्री धाम की 9 किमी व यमुनोत्री धाम की 19 किमी है, जिससे इस पर्वत की धार्मिक महत्ता भी बढ़ गई है।
आध्यात्मिक शक्ति का हुआ अहसास
एवरेस्टर विश्वेश्वर सेमवाल ने बताया कि करीब 20 वर्षों के पर्वतारोहण करियर में उन्हें पहली बार आध्यात्मिक शक्ति का अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण में हमेशा तकनीक व दिमाग का प्रयोग होता है, लेकिन शिवलिंग पीक की परिक्रमा करते समय उन्हें साक्षात भगवान शिव की परिक्रमा करने का अहसास हुआ। शायद यही कारण रहा कि कई अड़चनों के बावजूद उनका अभियान सफल हो गया। इसी वजह से ट्रैक में पड़ने वाले स्थानों का नाम माता पार्वती व भगवान गणेश को समर्पित किया गया।
कम अनुभवी लोग भी कर सकते हैं शिवलिंग परिक्रमा
प्रोफेशनल पर्वतारोहियों के साथ ही कम अनुभवी ट्रेकर भी शिवलिंग पीक की परिक्रमा कर सकते हैं। इस यात्रा पर पर्यटकों को रॉक क्लाइंबिंग, स्नो क्लाइंबिंग, ट्रेकिंग व माउंटेनियरिंग जैसे सभी एडवेंचर का एक साथ अनुभव मिल सकेगा।
पूरे ट्रैक रूट में कैंपिंग साइट व कई जल धाराएं होने के कारण पर्यटकों को बुनियादी सुविधाओं की भी कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि खराब मौसम इस स्थान पर कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।