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Uttarakhand: नहीं लग पा रहा मौसम का सटीक अनुमान, ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज के उपकरण पड़े हैं खराब

Mon, 31 Jul 2023 08:31 AM IST
रेनू सकलानी करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी
करन सिंह दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 31 Jul 2023 08:31 AM IST
सार

ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन हर घंटे या प्रोग्रामिंग अनुसार अपने आसपास के मौसम जैसे हवा की रफ्तार, तापमान, बारिश, नमी आदि की सटीक जानकारी देता है। इससे प्राप्त डाटा के आधार पर ही मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से अनुमान जारी किया जाता है, लेकिन उपकरण खराब होने से मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। 

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Equipment automatic weather station and rain gauge is defective accurate forecast of weather is not available
बरसात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चारधाम के आसपास समेत प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगे करीब दस फीसदी ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज के उपकरण खराब पड़े हैं। कई जगह वेदर स्टेशन और रेन गेज भारी बारिश के कारण काम नहीं कर रहे हैं तो कहीं की बैटरी खराब होने से दिक्कत आ रही है। इसके चलते न तो मौसम का सटीक अनुमान लग पा रहा है और न ही बारिश का आंकड़ा रिकॉर्ड किया जा रहा है।

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मौसम विभाग की ओर से प्रदेशभर में 132 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और 52 रेन गेज लगाए गए हैं। ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन हर घंटे या प्रोग्रामिंग अनुसार अपने आसपास के मौसम जैसे हवा की रफ्तार, तापमान, बारिश, नमी आदि की सटीक जानकारी देता है। इससे प्राप्त डाटा के आधार पर ही मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से अनुमान जारी किया जाता है। जबकि, रेन गेज से बारिश के आंकड़े रिकॉर्ड किए जाते हैं।

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लेकिन, कई जगह उपकरणों की बैटरी खराब होने और नेटवर्क न होने से चारधाम समेत कई पहाड़ी इलाकों से बारिश संबंधी डाटा नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते बारिश का सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मुश्किल हो रही है। उधर, मौजूदा समय में कुछ ही दूरी में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, किसी जिले का वेदर स्टेशन खराब होने पर वैज्ञानिक उसके आसपास के जिलों के स्टेशन से प्राप्त डाटा से अनुमान जारी कर रहे हैं। 

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रडार सिस्टम बेहतर करने के लिए सरकार से मांगा सहयोग

मौसम विभाग के अनुसार, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिलों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगे वेदर स्टेशन और रेन गेज के उपकरण बारिश के चलते खराब पड़े हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया, प्रदेश में रडार सिस्टम को बेहतर करने के लिए राज्य सरकार से सहयोग मांगा गया है। ताकि, चारधाम समेत प्रदेशभर के मौसम के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त कर पूर्वानुमान जारी किया जा सके।

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प्रदेशभर में बनाए ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज में से करीब दस फीसदी उपकरण खराब हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब होने के दौरान नेटवर्क न होने से भी डाटा नहीं मिल पाता। ऐसे में आसपास के स्टेशन और रेन गेज के अनुसार मौसम का पूर्वानुमान जारी किया जा रहा है। जल्द खराब उपकरणों को सही कराया जाएगा। -बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र

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