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देहरादून: होटल कर्मचारी को नौ साल बाद मिला न्याय, अब मिलेगा 26 साल का पीएफ

Mon, 13 Jan 2020 08:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 13 Jan 2020 08:35 PM IST
सार

  • दस्तावेज पूरे नहीं होने पर ईपीएफओ ने कर दिया था फंड देने से इनकार
  • नौ साल के संघर्ष के बाद उपभोक्ता फोरम से मिली कर्मचारी को राहत
  • कर्मचारी को मानसिक क्षतिपूर्ति, मुकदमे का खर्च भी देगा ईपीएफओ

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Epfo will give 26 years PF to Hotel Staff Youth after Consumer Court decision in dehradun
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

देहरादून में बंद हो चुके एक होटल के कर्मचारी को अपने पीएफ के लिए नौ सालों तक लड़ाई लड़नी पड़ी है। अब जिला उपभोक्ता फोरम ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को कर्मचारी का 26 साल का फंड देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कर्मचारी को मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे में आया खर्च भी मिलेगा। 

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यह फैसला भूपेंद्र सिंह दुग्तल की अध्यक्षता वाली जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया है। इस मामले में अशोक कुमार निवासी सहस्रधारा रोड ने फोरम में शिकायत की थी। अशोक के मुताबिक उन्होंने मसूरी माल रोड स्थित हैकम्स ग्रैंड होटल में अप्रैल 1984 से नौकरी शुरू की थी।
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फरवरी 2011 सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह होटल बंद हो गया, जिससे सभी कर्मचारियों को निकाल दिया गया। इसके बाद अशोक कुमार ने अपने पीएफ के लिए ईपीएफओ में आवेदन किया। लेकिन, ईपीएफओ ने जानकारी दी कि होटल प्रबंधन ने फार्म 3ए व 6ए जमा ही नहीं किए हैं।

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इन्हीं फार्म के आधार पर कर्मचारियों का वर्षवार विवरण बनाया जाता है। इस तरह ईपीएफओ ने दर्शाया कि कर्मचारियों के पीएफ का विवरण उपलब्ध ही नहीं है। अशोक कुमार ने होटल प्रबंधन से जानकारी ली तो बताया गया कि सभी कर्मचारियों का पीएफ और सभी फार्म समय से जमा किए गए हैं।  छह सालों तक अशोक कुमार इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकला। 

इसके बाद परेशान होकर अशोक ने 15 सितंबर 2017 को जिला उपभोक्ता फोरम को इसकी शिकायत की। होटल प्रबंधन ने भी साक्ष्य समेत सभी दस्तावेज फोरम में उपलब्ध करा दिए। इस बीच ईपीएफओ से जो जवाब आए उन्हें फोरम ने निराधार माना।

इस आधार पर उपभोक्ता फोरम ने ईपीएफओ को आदेश दिए हैं कि वह अशोक कुमार का 26 साल का फंड उन्हें उपलब्ध कराए। इसके साथ ही पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और तीन हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देना होगा।

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