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Engineers Day 2020: रुड़की को मिला देश के पहले इंजीनियरिंग संस्थान का गौरव
Tue, 15 Sep 2020 02:31 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 15 Sep 2020 02:31 PM IST
सार
- गंगनहर के निर्माण की जरूरत को पूरा करने को हुई थी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना
- इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश ही नहीं, विदेश में भी बनाई विशिष्ट पहचान
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आईआईटी रुड़की
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश के पहले इंजीनियरिंग संस्थान का गौरव रुड़की को प्राप्त है। अंग्रेजी हुकूमत के समय कर्नल कॉटले ने रुड़की में गंगनहर का खाका खींचा तो इस बड़े प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए इंजीनियरों की जरूरत महसूस हुई। तभी रुड़की में देश के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी गई।
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गंगनहर निर्माण में लगे इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने के लिए 1845 में सिविल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण स्कूल की स्थापना की गई। इसे नवंबर 1847 में एक कॉलेज के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। इस कॉलेज ने 1848 से ही विधिवत रूप से कार्य करना प्रारंभ किया।
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इसके बाद यह ब्रिटिश उपनिवेश के साथ ही भारत और एशिया का पहला रुड़की कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग बन गया। इसका नाम थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग कर दिया गया। देश की आजादी के बाद 1948 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया।
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इसके बाद यह संस्थान रुड़की यूनिवर्सिटी के रूप में जाना गया। 21 सितंबर 2001 में संसद में कानून पारित कर इसे देश के सातवें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में मान्यता मिली। लंबे इतिहास के दौरान संस्थान ने देश ही नहीं, विदेश में अपने शोध और अनुसंधान से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान हासिल की।