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फर्जी कनेक्शन, फर्जी बिल, फर्जी रसीद
डॉ. योगेश योगी/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 03 Oct 2013 12:35 AM IST
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बिजली का फर्जी कनेक्शन। बिल भी फर्जी बनाया और जमा की रसीद भी फर्जी पाई
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गई। फर्जीवाड़े का बड़ा खेल ऊर्जा निगम की पकड़ में आया है।
प्रारंभिक जांच में दो मामले सामने आ चुके हैं। दोनों के खिलाफ ऊर्जा निगम ने नगर कोतवाली में तहरीर दे दी है। इसमें विभागीय कर्मियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है।
ऊर्जा निगम के काम
मामले सामने आने के बाद से ऊर्जा निगम के अधिकारी सकते में हैं। एक मामला होता तो केवल उपभोक्ता को दोषी ठहराया जा सकता था।
लेकिन दूसरा मामला पकड़ में आने के बाद इसमें किसी गिरोह के हाथ होने की आशंका प्रबल हो गई है। गिरोह भी ऐसा है, जो ऊर्जा निगम के काम के तौर-तरीकों से पूरी तरह वाकिफ है।
केस एक
हरकी पैड़ी क्षेत्र स्थित एक कलर लैब पर छह किलोवाट का बिजली कनेक्शन चल रहा है। यह कनेक्शन घनश्याम सक्सेना के नाम पर चल रहा है। मीटर रीडर की शिकायत पर ऊर्जा निगम की ओर से कराई जांच में कनेक्शन के लिए 25 जून 2011 को काटी गई सात हजार रुपये की रसीद फर्जी पाई गई।
इतना ही नहीं अप्रैल 2013 में जारी किया 45753 रुपये का बिल भी फर्जी है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के मुताबिक इस बिल का भुगतान 15 अप्रैल 2013 को करना दिखाया गया है। 45753 रुपये की भुगतान रसीद भी नकली निकली।
केस दो
बिरला रोड पर एक उपभोक्ता प्यारेलाल के नाम 13 जुलाई 2013 को जारी 14757 रुपये का बिल जांच में फर्जी पाया गया। यह बिल ऊर्जा निगम की ओर से जारी ही नहीं किया था।
इस बिल का भुगतान 26 जुलाई 2013 को किया गया। ऊर्जा निगम के मुताबिक 14757 रुपये की जो रसीद काटी है, वह भी जालसाजी कर बनाई है।
प्रारंभिक जांच में दो मामले सामने आ चुके हैं। दोनों के खिलाफ ऊर्जा निगम ने नगर कोतवाली में तहरीर दे दी है। इसमें विभागीय कर्मियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है।
ऊर्जा निगम के काम
मामले सामने आने के बाद से ऊर्जा निगम के अधिकारी सकते में हैं। एक मामला होता तो केवल उपभोक्ता को दोषी ठहराया जा सकता था।
लेकिन दूसरा मामला पकड़ में आने के बाद इसमें किसी गिरोह के हाथ होने की आशंका प्रबल हो गई है। गिरोह भी ऐसा है, जो ऊर्जा निगम के काम के तौर-तरीकों से पूरी तरह वाकिफ है।
केस एक
हरकी पैड़ी क्षेत्र स्थित एक कलर लैब पर छह किलोवाट का बिजली कनेक्शन चल रहा है। यह कनेक्शन घनश्याम सक्सेना के नाम पर चल रहा है। मीटर रीडर की शिकायत पर ऊर्जा निगम की ओर से कराई जांच में कनेक्शन के लिए 25 जून 2011 को काटी गई सात हजार रुपये की रसीद फर्जी पाई गई।
इतना ही नहीं अप्रैल 2013 में जारी किया 45753 रुपये का बिल भी फर्जी है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के मुताबिक इस बिल का भुगतान 15 अप्रैल 2013 को करना दिखाया गया है। 45753 रुपये की भुगतान रसीद भी नकली निकली।
केस दो
बिरला रोड पर एक उपभोक्ता प्यारेलाल के नाम 13 जुलाई 2013 को जारी 14757 रुपये का बिल जांच में फर्जी पाया गया। यह बिल ऊर्जा निगम की ओर से जारी ही नहीं किया था।
इस बिल का भुगतान 26 जुलाई 2013 को किया गया। ऊर्जा निगम के मुताबिक 14757 रुपये की जो रसीद काटी है, वह भी जालसाजी कर बनाई है।