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Hindi News ›   Uttarakhand ›   end of politics on fl-2 wine policy in uttarakhand.

एफएल-2 अध्याय खत्म, नीति से बाहर हुई 'राजनीति'

Wed, 20 Apr 2016 04:01 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 20 Apr 2016 04:01 AM IST
सार

  • सरकार के आगे छोटी पड़ गई थी नौकरशाही की जिद
  • भाजपा ने ‘एफएल-2’ को दो वर्षों तक बड़े हथियार के रूप में प्रयोग किया

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end of politics on fl-2 wine policy in uttarakhand.
विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद कांग्रेस सरकार ने एफएल-2 लागू कर दिया था।

विस्तार

नौकरशाही की मनाही के बावजूद जब कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने आबकारी विभाग की नीति एफएल-2 लागू की तब यह आभास नहीं था कि इससे राज्य की राजनीति इतनी प्रभावित होगी। बेहद चर्चित रही इस नीति का एक तरह से राजनीतिकरण हो गया था। 2014 में गैरसैंण में विधानसभा का पहला सत्र इसी नीति की भेंट चढ़ गया था।

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खास बात यह थी कि इसे लागू करने के मामले में नौकरशाही की जिद भी सरकार के आगे छोटी पड़ गई। पिछले दो सालों में जितना बवाल एफएल-2 नीति पर मचा, उतना ध्यान किसी विकास से जुड़ी नीति पर नहीं गया। अब यह राजनीतिक मुद्दा भले ही रहे, लेकिन नीति से ‘राजनीति’ बाहर हो गई है।
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एक फरवरी 2014 को हरीश रावत मुख्यमंत्री बने तो आबकारी नीति में परिवर्तन की कवायद शुरू हो गई। फाइल बनी, तत्कालीन प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह संधू व तत्कालीन आबकारी आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने लिखा कि यह संभव नहीं है, लेकिन नौकरशाही की तर्कसंगत मनाही के बावजूद नीति का शासनादेश जारी कर दिया गया।
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इसी दौरान गैरसैंण में आयोजित विधानसभा के प्रथम सत्र में भाजपा के पास सबसे बड़ा मुद्दा यही था। सरकार ने यहां तक कहा कि अभी आदेश जारी नहीं हुआ है, फाइल में लगा है, लेकिन सत्र खत्म होने के कुछ ही दिन बाद यह आदेश जारी हो गया।

कुछ लोगों के हाथ में आ गया था शराब का कारोबार

end of politics on fl-2 wine policy in uttarakhand.
वाइन, ड्राइ डे - फोटो : फाइल फोटो

शराब के कारोबार में लगे सैकड़ों लोग हाशिए पर चले गए और एफएल-2 की आबकारी नीति से करोड़ों का यह व्यवसाय चुनिंदा लोगों के हाथों में आ गया। कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुखर होने के लिए पिछले दो सालों में यदि कोई मुद्दा रहा तो वह थी आबकारी की एफएल-2 नीति।

हालांकि कानून व्यवस्था, अवैध खनन जैसे बहुत मुद्दे थे, लेकिन भाजपा ने इस तरकश में अपने तरकश में विशेष स्थान दिया। अब, जब यह नीति समाप्त कर पुरानी व्यवस्था लागू कर दी गई, तो ऐसे में कांग्रेस इसे मुद्दा बनाएगी और फिलहाल इसके आसार काफी कम है।

बोले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
मैंने राज्यपाल को नीति बदलने के लिए धन्यवाद दिया। हरीश रावत कहते थे कि भाजपा ने शराब के क्षेत्र में पीएचडी की है, मैं आज सबूत के तौर पर कह रहा हूं कि एफएल-2 को लागू करने के बाद राज्य को 300 से 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और यह सारा पैसा दूसरे रास्ते से हरीश रावत एंड कंपनी के खाते में गया, जो कि पुरानी नीति से राजकोष में जा सकता था। हमने इसकी लड़ाई लड़ी, सड़क से सदन तक। हम अब भी इस नीति को लागू करने के लिए सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं।
-अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा।

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