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अफसरों की राह तकते-तकते निगम हुआ बेदम

Fri, 27 Jun 2014 05:49 PM IST
Updated Fri, 27 Jun 2014 05:49 PM IST
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employees shortage in mdda office

राजधानी के विकास का दम भरने वाली सरकार और उसके मातहतों ने ही इसके सत्यानाश का पूरा इंतजाम कर रखा है। बारह साल पहले देहरादून नगर निगम गठन के बाद आज तक इसके 80 फीसदी पर खाली हैं।

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वेंटिलेटर पर निगम
महीनों से न मुख्य नगर अधिकारी हैं, न वर्षों से निचले दर्जे के कर्मचारियों की नियुक्ति हुई। शहर में विकास से लेकर सफाई व्यवस्था, सब पूरी तरह चौपट है। पद रिक्त होने से निगम पूरी तरह ‘वेंटिलेटर’ पर है।
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मुख्यमंत्री से लेकर शासन में हर स्तर पर एड़ियां रगड़ने के बाद पार्षद और मेयर के हाथ सिर्फ आश्वासन लगा। मानसून नजदीक है और शासन का रवैया बेपवाह, लिहाजा बीते साल जैसे हश्र के लिए सभी पहले से घड़ियाली आंसू बहाने को तैयार हैं।
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ऐसे बेदम हो रही व्यवस्था
साल 2002 में देहरादून नगर पालिका नगर निगम में तब्दील हुई, तभी से इसके बुरे दिन शुरू हो गए। छह माह से पूर्णकालिक मुख्य नगर अधिकारी (एमएनए) न होने से काम ठप हैं।

मसूरी नगर पालिका और देहरादून नगर निगम क्षेत्र की सफाई के अलावा स्वास्थ्य अनुभाग वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह के जिम्मे है, जो पूर्णकालिक नहीं है। दो अपर मुख्य नगर अधिकारियों में एक अस्थायी हैं।

सचिव के पास अतिरिक्त प्रभार
पीसीएस बंशीधर तिवारी एमडीडीए सचिव हैं। उनके पास अपर मुख्य नगर अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार है। सहायक मुख्य नगर अधिकारी के तीनों पद खाली हैं। अधिशासी अभियंता और सेनिटरी इंस्पेक्टर के तीनों पद भी खाली हैं।

करीब छह माह पहले मुख्य नगर अधिकारी अशोक कुमार के ट्रांसफर के बाद डीएम डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम कार्यवाहक एमएनए बनाए गए। उनके प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जाने के बाद अब कार्यवाहक एमएनए भी छिन गया।

सीएम से मिले थे कांग्रेसी पार्षद
इन मुद्दों पर कांग्रेसी पार्षद मुख्यमंत्री हरीश रावत से दो बार मिले। दोनों बार सिर्फ आश्वासन की ‘गोली’ मिली। भाजपा पार्षद भी शासन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों से आश्वासन लेकर लौट आए।


मेयर विनोद चमोली खुद इस बाबत कई बार सीएम से मिल चुके हैं। कई पत्र भी लिखा। इसके बावजूद फर्क नहीं पड़ा।

अफसरों की कमी से अटके ये काम
सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है।
निगम की जमीनों पर नहीं रुक रहे कब्जे।
होटल और ढाबे में निरंतर खाद्य निरीक्षण।
सड़क, सीवर और अन्य विकास कार्य।
टैक्स संबंधित मामलों में कदम थमे हैं।

अब तक नाला गैंग भी नहीं
नीति निर्धारण और उसे लागू कराने वाले अफसर तो दूर निगम अब तक टेंपरेरी सफाई कर्मी यानी नाला गैंग भी नहीं जुटा सका है। निगम का दावा है कि मानसून से पहले नाला गैंग के सभी 55 कर्मी नियुक्त कर दिए जाएंगे। नाला गैंग मानसून में दो माह के लिए रखे जाते हैं। इनका काम नाली और नालों की सफाई होता है।

सरकार ही नहीं चाहती राजधानी का विकास
सरकार चाहती ही नहीं है कि नगर निगम मजबूत हो और शहर का विकास हो सके। अगर चाहती तो क्या इतने वर्षों में अफसरों की नियुक्ति नहीं की जा सकती थी।
-विनोद चमोली, मेयर, देहरादून

अगले हफ्ते मिलेगा एमएनए
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि अगले सप्ताह तक निगम में पूर्णकालिक मुख्य नगर अधिकारी नियुक्त कर दिया जाएगा। नियुक्ति होते ही विकास को गति मिलेगी।
-नीनू सहगल, नेता प्रतिपक्ष

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