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...अब पहाड़ भी चढ़ने लगे हाथी, राजाजी नेशनल पार्क से बेमुंडा के जंगल की पहाड़ियों तक पहुंचे गजराज

Sat, 06 Jun 2020 01:30 AM IST
अलका त्यागी विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी) Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 06 Jun 2020 01:30 AM IST
सार

  • हाथियों की सटीक गणना करने के  लगाएंगे जीपीएस और ड्रोन कैमरे

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Elephant Reached in Mountain Area of chamba bemuda Forest from raja ji National park
मैदान में चारा खाते हाथी - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस

विस्तार

कोरोना संकट के बीच एक अच्छी खबर भी है। शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में धरती के विशालकाय जीव हाथियों का कुनबा बढ़ रहा है। पहली बार राजाजी पार्क के मैदानी जंगलों से एक हाथी के बेमुंडा की पहाड़ियों पर चढ़ना इस बात की तस्दीक दे रहा है। वन विभाग की मानें तो  कुनबा बढ़ने के कारण हाथी अपने नए ठिकाने की तलाश में नए जंगल की ओर चढ़ा होगा। वन  विभाग भी अब हाथियों की सटीक गणना करने के  लिए जीपीएस और ड्रोन कैमरे की मदद लेने की तैयारी कर रहा है।

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अभी तक हाथियों की चहलकदमी नरेंद्रनगर के आस-पास के जंगलों तक ही सुनाई देती थी। लेकिन पहली बार पिछले दिनों राजाजी पार्क से कई किलोमीटर दूर एक हाथी ऋषिकेश-चंबा हाईवे पर बेमुंडा के जंगलों में घूमता नजर आया।
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पहाड़ के जंगल में हाथी देख वन कर्मी भी हैरत में पड़ गए। उन्होंने किसी तरह हाथी को वापस ठिकाने की ओर लौटाया। बताया गया कि गजराज चार-पांच दिनों बाद वापस राजाजी पार्क के जंगल में अपने झुंड में पहुंचा। वन विभाग ने बताया कि तीन साल पूर्व हुई गणना में हाथियों की संख्या सात थी। लेकिन अब उनका कुनबा काफी बढ़ गया है। एक हाथी दिनभर में ही करीब 200 किलो घास-पत्ती खाने के साथ ही एक सप्ताह में 400 किमी की दूरी तय कर लेता है। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि शिवपुरी में हेंवल नदी के किनारे-किनारे हाथी भोजन खाते हुए बेमुंडा आ पहुंचा।

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तीन दिवसीय होगी हाथियों की गणना

नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने हेंवल नदी के किनारे रोहिणी, बांज, आंवला, बेल, अमलतास, अर्जुन और जामुन के पेड़ लगाए हैं। हाथी को ये सभी वृक्ष काफी पसंद हैं। जिससे अपने पसंदीदा भोजन का आनंद लेते हुए हाथी अपने  झुंड से काफी दूर पहाड़ आ पहुंचा होगा। हाथी के बेमुंडा के जंगल तक पहुंचने से विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी काफी गदगद हैं। 

शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में हाथियों की संख्या अच्छी खासी बढ़ गई है। बेमुंडा के जंगलों में हाथी का पसंदीदा भोजन पेड़-पौधे हैं। ऐसे में संभव है कि बेमुंडा में भोजन और पानी की प्रचूर मात्रा की उपलब्धता के कारण हाथी अपने नए ठिकाने की तलाश कर रहा हो। हाथी की पूरी मॉनिटरिंग करने के बाद उसे वापस झुंड की ओर लौटा दिया गया था।
-धर्म सिंह मीणा, डीएफओ नरेंद्रनगर वन प्रभाग।

शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में हाथियों की गणना शुरू

नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में हाथियों की गणना शुरू की गई है। विभाग ने गिनती करने के लिए 12 विशेषज्ञों की टीम गठित की है। हाथियों की सटीक गणना के लिए टीम को ड्रोन कैमरे और जीपीएस तकनीक से लैस किया गया है। इस दौरान हाथी की आयु संबंधी जानकारियां भी जुटाई जाएगी।

एक घंटे में 24 किमी तक अपना ठिकाना बदलने वाले हाथियों की गणना करना कठिन काम है। इस चुनौती से निपटने के लिए विभाग पहली बार ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। शनिवार को नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवपुरी और नरेंद्रनगर रेंज में विभाग की 12 प्रशिक्षित टीमों ने हाथियों की आबादी का आकलन करने का काम शुरू किया।

हाथियों की गणना का सटीक परिणाम जानने के लिए टीमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विधि का इस्तेमाल कर रही हैं। निश्चित समय में सभी टीमें हाथियों की गणना करेगी, जिससे एक हाथी की गिनती दूसरी जगह न हो सके। डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने बताया कि हाथियों की गणना का काम तीन दिन तक चलेगा। सटीक परिणाम जानने के लिए पारंपरिक विधि के साथ ही ड्रोन कैमरे की मदद भी ली जा रही है। इसके लिए टीमों को एक प्रपत्र भी दिया गया है।

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