झटका: उत्तराखंड में फिर बिजली महंगी करने की तैयारी, याचिका दायर, 27 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा भार
यूपीसीएल ने बीपीएल, आम उपभोक्ता से लेकर उद्योगों के लिए बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया। नियामक आयोग अध्ययन करेगा और इसके बाद प्रस्ताव पर निर्णय लेगा।
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बाजार से महंगी बिजली खरीद रहे ऊर्जा निगम ने बिजली दरों में दोबारा बढ़ोतरी के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की है। शुक्रवार को आयोग ने याचिका स्वीकार तो कर ली लेकिन अभी इस पर निर्णय नहीं लिया गया है। यूपीसीएल ने बीपीएल, आम उपभोक्ता से लेकर उद्योगों व व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए सरचार्ज के तौर पर बढ़ोतरी करने की मांग की है।
बिजली किल्लत के दौर में यूपीसीएल ने शुक्रवार को नियामक आयोग में याचिका दायर की। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में इस साल गैस आधारित बिजली संयंत्रों से 2525 मिलियन यूनिट बिजली की उम्मीद की गई थी। गैस की कीमतें बढ़ने की वजह से यह प्लांट बंद हो गए, जिसकी कमी को एनर्जी एक्सचेंज से रोजाना महंगी बिजली खरीदकर पूरा किया जा रहा है।
एक्सचेंज में बिजली की दर 12 रुपये प्रति यूनिट है जबकि गैस आधारित प्लांट से आपूर्ति होने पर यह दर 4.80 रुपये प्रति यूनिट होती। यूपीसीएल ने याचिका में कहा है कि अप्रैल से सितंबर की अवधि में निगम को करीब 922 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
इसकी रिकवरी के लिए निगम ने विद्युत दरों में 12.27 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग आयोग के सामने रखी है। यूपीसीएल ने यह वसूली एडिशनल एनर्जी चार्ज के तौर पर लेने को कहा है। आयोग ने याचिका स्वीकार तो कर ली है लेकिन अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
किस श्रेणी में कितना बढ़ोतरी का प्रस्ताव
यूपीसीएल ने बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए 25 पैसे प्रति यूनिट, डोमेस्टिक उपभोक्ताओं के लिए करीब 50 पैसे प्रति यूनिट और उद्योग व कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए 75 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी की मांग की है।
प्रदेश में इतने उपभोक्ता
घरेलू उपभोक्ता- 23,74,191 (बीपीएल-4.28 लाख)
अघरेलू उपभोक्ता- 2,83,168
गवर्नमेंट संस्थान- 6678
प्राइवेट ट्यूबवेल- 41,931
एलटी व एचडी इंडस्ट्री- 16,100
मिक्स लोड- 80
रेलवे ट्रैक्शन- 02
ऐसे पड़ेगा महंगाई का असर
अगर किसी बीपीएल उपभोक्ता का बिल 100 यूनिट का आता है तो उसे 25 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से एडिशनल एनर्जी चार्ज देना होगा। इस हिसाब से उसके बिल में सीधे 25 रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी। नियामक आयोग की ओर से बिजली दरों में एक अप्रैल से बढ़ोतरी की गई थी। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत एक वित्तीय वर्ष में एक बार ही बढ़ोतरी का प्रावधान है। ऐसे में आयोग के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। उधर, उपभोक्ता भी लगातार दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग करते हुए आयोग को ज्ञापन भेज रहे हैं।
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