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अब कूड़े को फेकिए मत, बिजली बनाइए

Wed, 17 Jun 2015 04:54 PM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Jun 2015 04:54 PM IST
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electricity production from garbage.

उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने वाला है, जहां कूड़े से बिजली का उत्पादन किया जाएगा।

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जर्मन ‘गेसिफिकेशन’ तकनीक से हर दिन 500 मीट्रिक टन कूड़े से 25 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। रुड़की में लगने वाले इस प्लांट पर 500 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसका संचालन पीपीपी मोड पर किया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार पहले ही प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। रुड़की नगर निगम से प्रोजेक्ट के लिए जमीन मांगी गई है। प्रोजेक्ट की डीपीआर एवं अन्य औपचारिकताओं के लिए अगले सप्ताह शासन में बैठक बुलाई गई है। सिडकुल को प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी बनाया है।
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अधिकारियों के अनुसार बिजली उत्पादन के लिए जरूरी कूड़ा देहरादून, ऋषिकेश, रुड़की और हरिद्वार से आएगा। इन स्थानों से हर दिन कूड़ा प्लांट तक लाया जाएगा। प्लांट में पहले कूड़े से रेडियो एक्टिव हटाया जाएगा। उसके बाद कूड़े को कई लाख तापमान वाले प्लांट में जलाया जाएगा। इसके बाद बिजली का उत्पादन किया जाएगा।

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ऐसे करता है काम

electricity production from garbage.

सिडकुल के प्रबंध निदेशक आर राजेश कुमार ने बताया कि इस संबंध में तीन बैठकें हो चुकी हैं। बताया कि प्लांट के लिए रुड़की नगर निगम को जमीन उपलब्ध करानी है। अगर निगम जमीन जल्द उपलब्ध करा देता है तो इसी साल जुलाई माह के आखिरी तक टेंडर जारी कर दिए जाएंगे।

जैविक एवं अजैविक कूड़े को प्लांट में 1700 डिग्री फेरानाइट तापमान में जलाया जाता है। उससे भाप बनती है। इसी भाप से टरबाइन को चलाया जाता है, जिससे डायनुमो बिजली का उत्पादन किया जाता है।

डायनुमो से बिजली बड़े-बड़े इनवर्टर में बैंक होती है। जहां से वह ग्रिड को भेज दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार 25 मेगावाट बिजली लगभग 50 हजार घरों को रोशन और जरूरी उपकरण जलाने में सक्षम है।

कूड़े का होगा निस्तारण
एक ओर प्रोजेक्ट से जहां बिजली मिलेगी, वहीं देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, डोईवाला, रायवाला, मंगलौर आदि क्षेत्रों के कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान भी हो जाएगा।

कूड़ा निस्तारण की समस्या से जूझ रहे नगर निगमों और नगर निकायों को इसके बाद ट्रंचिंग ग्राउंड की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि इसके बाद देहरादून में बन रहे रिसाइकलिंग प्लांट के औचित्य पर सवाल उठने लगेगा।

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