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ऊर्जा प्रदेश में बिजली कटौती से उद्योग बेहाल
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 08 Dec 2013 09:25 PM IST
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ऊर्जा प्रदेश में सर्दी शुरू होते ही बिजली संकट शुरू हो गया है। इससे प्रदेश के उद्योगों की कमर टूटने लगी है। राजधानी के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना ढाई से आठ घंटे के बीच कटौती हो रही है। उद्योग बार-बार इस मुद्दे को उठ रहे हैं, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण ऊर्जा निगम बेबस नजर आ रहा है।
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नदियों का जलस्तर हुआ कम
इन दिनों नदियों में जलस्तर कम होने के कारण बिजली उत्पादन काफी कम हो गया है। गर्मी के मुकाबले उत्पादन एक तिहाई से भी कम रह गया है। केंद्रीय पुल से मिलने वाले शेयर और अतिरिक्त बिजली खरीद से भी जरूरत पूरी नहीं हो रही है। ऐसे में कटौती के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव अनिल मारवाह का कहना है कि सुबह सात बजे से औद्योगिक इकाईयों में हिटिंग प्रासेस शुरू हो जाता है। साढ़े आठ बजे तक लेबर पहुंच जाती है। आधे घंटे काम होता है। नौ बजे से बिजली कट जाती है। तीन घंटे बाद बिजली आती है।
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पांच घंटे होते है बरबाद
ऐसे में फिर से दो घंटे मशीन को हिट करने में लग जाता है। ऐसे में पांच घंटे समय बरबाद हो जाता है। इससे उद्योगों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऊर्जा निगम के प्रवक्ता मधुसूदन का कहना है कि बिजली उपलब्धता के अनुसार ही कटौती की जा रही है।
लेबर बैठ जाती है खाली
उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली कटौती होने के कारण लेबर को खाली बैठना पड़ता है। इससे उत्पादन तो कम होता ही है। साथ ही उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है। क्योंकि, उसी उत्पादन के लिए अतिरिक्त मजदूरी देनी पड़ती है।