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उत्तराखंड में बिजली संकट: 47 मिलियन यूनिट का आंकड़ा पार गई बिजली की डिमांड, गांव-कस्बों में दो से तीन घंटे कटौती
Thu, 28 Apr 2022 03:57 PM IST
अनुराग सक्सेना
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Thu, 28 Apr 2022 03:57 PM IST
सार
यूपीसीएल ने बुधवार को बिजली की डिमांड 46 मिलियन यूनिट मानते हुए इंतजाम किए थे लेकिन गर्मी में खपत बढ़ने के चलते पूर्ति नहीं हो पाई। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्रों में ढाई से तीन घंटे की कटौती हुई। छोटे शहरों में भी दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्रीज में चार से पांच घंटे की कटौती हुई।
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उत्तराखंड में बिजली हुई महंगी।
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
प्रदेश में बिजली का संकट बढ़ता जा रहा है। प्रदेशभर में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच बिजली की डिमांड 47.7 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। यूपीसीएल ने इसके सापेक्ष जरूरी 18 में से 16 मिलियन यूनिट बिजली खरीद ली है। बावजूद इसके गांव, कस्बों, छोटे शहरों, फर्नेश इंडस्ट्रीज में बृहस्पतिवार को भी बिजली कटौती होगी।
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यूपीसीएल ने बुधवार को बिजली की डिमांड 46 मिलियन यूनिट मानते हुए इंतजाम किए थे लेकिन गर्मी में खपत बढ़ने के चलते पूर्ति नहीं हो पाई। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्रों में ढाई से तीन घंटे की कटौती हुई। छोटे शहरों में भी दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्रीज में चार से पांच घंटे की कटौती हुई। हालांकि यूपीसीएल का दावा है कि लगातार तीसरे दिन उद्योगों में किसी तरह की कटौती नहीं की गई।
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यूपीसीएल के एसई कॉमर्शियल गौरव शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार की अपेक्षित बिजली की डिमांड अब तक की सर्वाधिक 47.7 मिलियन यूनिट मानी गई है। इसके सापेक्ष यूजेवीएनएल से 13.50 से 14 मिलियन यूनिट और केंद्रीय कोटे से 16 मिलियन यूनिट बिजली मिली। शेष करीब 18 मिलियन यूनिट के सापेक्ष उन्होंने 16 मिलियन यूनिट बिजली खरीद ली है। अभी भी पौने दो से दो मिलियन यूनिट बिजली की कमी है। इस कमी को रियल टाइम मार्केट से पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने बताया कि अगर यह कमी बरकरार रही या डिमांड इससे भी ऊपर गई तो ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों में दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्री में चार से पांच घंटे की कटौती की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल उद्योगों को कटौती से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि अगर यह कमी बरकरार रही या डिमांड इससे भी ऊपर गई तो ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों में दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्री में चार से पांच घंटे की कटौती की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल उद्योगों को कटौती से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही है।