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अब अपनी साख बचाने कांग्रेस उत्तरेगी मैदान में
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 10 Mar 2014 01:54 PM IST
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2014 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के सामने साख बचाने की चुनौती है तो भाजपा को अपना खोया जनाधार हासिल करना होगा।
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दलों के लिए टेड़ी खीर साबित
पिछले दो लोक सभा चुनाव की तस्वीर बता रही है कि प्रदेश में इन दो दलों का वर्चस्व तोड़ना अन्य दलों के लिए टेड़ी खीर साबित होगा। हाल यह है कि कई दलों से बेहतर प्रदर्शन निर्दलियों का रहा है।
ऐसे में इस चुनाव में बसपा और आप का प्रदर्शन कई दलों की चुनावी ताल को बेताल कर सकता है। 2004 के लोक सभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस ने 2009 में करीब पांच प्रतिशत अधिक वोट हासिल किए थे।
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इसका परिणाम यह भी रहा था कि कांग्रेस की झोली में उत्तराखंड की पांचों सीटें आ गिरी थीं। दूसरी तरफ इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा था। भाजपा के वोट बैेंक में करीब सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
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ध्रुवीकरण मैदानी क्षेत्रों में बसपा
जाहिर है कि भाजपा को कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल ने भी नुकसान पहुंचाया था। यह दल बहुत हद तक बसपा थी। बसपा का ध्रुवीकरण मैदानी क्षेत्रों में हैं और यही क्षेत्र हैं जहां भाजपा बेहतर प्रदर्शन करती रही है।
2004 की तुलना में बसपा ने 2009 के लोक सभा चुनाव में करीब आठ प्रतिशत वोट अधिक बटोरे थे। सबसे अधिक फर्क नैनीताल सीट पर पड़ा था। यहां बसपा को 2004 में कुल 1.24 वोट मिले थे।
जबकि 2009 के लोक सभा चुनाव में बसपा ने इस सीट पर 19 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने इस सीट पर नुकसान उठाया था, हालांकि जीत कांग्रेस के खाते में ही दर्ज हुई थी।
कांग्रेस व भाजपा को हुआ था नुकसान
फिर भी 2004 के मुकाबले कांग्रेस को करीब दो प्रतिशत और भाजपा को करीब छह प्रतिशत का नुकसान हुआ था। जाहिर है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही बसपा की चुनौती का कुछ हद तक सामना करना होगा।
मत प्रतिशत में बसपा भले ही आरामदायक स्थिति में न हो पर मार्जिन पर मामला रहा तो बसपा समीकरण को गड़बड़ाने की ताकत का प्रदर्शन तो कर रही है। इस बार दिल्ली मे प्रयोग के आधार पर कुछ करने की तमन्ना आप की ओर से भी है।
सपा के लिए अलबत्ता सबसे अधिक परेशानी है। 2004 की तुलना में सपा ने 2009 में खासा नुकसान उठाया है। इस बार भी उसके दो घोषित प्रत्याशी चुनाव शुरू होने से पहले ही विवाद में घिर गए थे।
हाईकमान को भेजा पत्र
2014 लोक सभा चुनाव में क्लीन स्वीप का दावा कर रहे प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद के झगड़े से ही उबर नहीं पा रही है।
एक तरफ दावा किया जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ही 2014 में पार्टी के खेवनहार होंगे। दूसरी ओर अंदरखाने अध्यक्ष पद पर बदलाव के लिए भी मुहिम जारी है।
रविवार को कांग्रेस टास्क फोर्स के समन्वयक योगेंद्र खंडूरी ने हाईकमान को पत्र भेजकर प्रदेश अध्यक्ष पद पर तुरंत बदलाव की मांग की है। खंडूरी का कहना है कि आर्य अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
साफ-सुथरी छवि के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना चाहिए
पार्टी खुद एक व्यक्ति एक पद की बात कर रही है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर नए व्यक्ति की तैनाती तुरंत होनी चाहिए। लोक सभा चुनाव को देखते हुए किसी साफ-सुथरी छवि के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना चाहिए।
अध्यक्ष बनाते समय क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का भी ध्यान रखा जाए। खंडूरी ने यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा जनार्द्धन द्विवेदी और अन्य केंद्रीय नेताओं को भी भेजा है।
खंडूरी ने यह पत्र ऐसे समय भेजा है जब आर्य समर्थक चुनाव तक कोई बदलाव न होने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर दिल्ली में अध्यक्ष पर पर तीन अलग-अलग नेताओं से बातचीत की बात हो रही है।