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इन केंद्रों पर मोमबत्ती के सहारे होगा मतदान
अनूप वाजपेयी / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 20 Apr 2014 02:53 PM IST
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उत्तरकाशी में लोकतंत्र के महापर्व में जिले के 158 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को मोमबत्ती के सहारे वोट डालने होंगे।
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जबकि 7 बूथों पर पीने के पानी के लिए भी तरसाना पड़ेगा। जिले में मतदान के लिए 449 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
इसमें पुरोला विधानसभा में 150, यमुनोत्री में 144 तथा गंगोत्री में 155 हैं, जिसमें 158 मतदान केंद्रों पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। जबकि 7 केंद्रों पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए ऊर्जा निगम एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ शीघ्र ही बैठक की जाएगी। इसके अलावा सभी केंद्रों पर मोमबत्ती भी उपलब्ध रखी जाएगी।
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- डीपी डंगवाल, जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी
उत्तराखंड में भी बनेंगे कुछ मॉडर्न पोलिंग सेंटर
देश में हर पांच साल में होने वाले महापर्व के बहाने समाज को कुछ देने हसरत भी चुनाव आयोग की है।
इसी को ध्यान में रखकर उसने माडर्न पोलिंग सेंटर का खाका तैयार किया है। एक ऐसा मतदान केंद्र जहां सिर्फ गर्मी से बचने के लिए छाया और पानी ही नहीं बल्कि विकलांगों के लिए रैंप, साफ-सुथरा परिसर, रंग-रोगन युक्त भवन भी हो।
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ऐसा करने से प्रत्येक चुनाव में लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की कुछ खस्ताहाल जर्जर सरकारी इमारतें भी चमचमा उठेंगी।
इमारतों व भवनों को बनाते हैं मतदान केंद्र
देश की दिशा और दशा सुधारने के लिए चुनाव होते हैं लेकिन आम तौर जिन इमारतों व भवनों को मतदान केंद्र बनाया जाता है उसकी दशा और खस्ताहाल तस्वीर मतदाताओं को कहीं न कहीं कचोटती भी है।
आम तौर पर इलाके का सरकारी स्कूल या कार्यालय मतदान स्थल बनता है। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अपनी क्षमता के अनुरूप कम से कम एक माडर्न मतदान केंद्र प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में बनाएं।
ऐसे भवन को चुना जाए जिससे चुनाव के बाद उसका इस्तेमाल करने वालों को उसका लाभ मिल सके। उत्तराखंड में भी माडर्न मतदान केंद्र बनाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन(सीईओ) अधिकारी राधा रतूड़ी का कहना है कि हमारी भी कोशिश है कि कुछ माडर्न केंद्र जरूर बनें। चुनाव तक कितने बन पाएंगे अभी कहना मुश्किल है।
मतदान कक्ष खोजने में दिक्कत न हो
उनका कहना है कि फिलहाल सभी मतदान केंद्र में आधारभूत सुविधाएं जैसे पीने का पानी, शौचालय, धूप से बचने के लिए छाया और मतदान कक्ष खोजने में दिक्कत न हो इसके लिए बीएलओ भी बाहर बैठेंगे।
सीईओ का कहना है कि आयोग का कांसेप्ट बेहतर है। हमारी कोशिश भी है लेकिन जिलों में बजट कितना है इस पर ध्यान देना होगा।
उत्तराखंड में लगभग सभी मतदान केंद्र स्कूलों में बनेंगे। ऐसे में शिक्षा विभाग को भी आगे आना होगा ताकि कुछ भवनों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत और रंग-रोगन कर माडर्न केंद्र बनाया जा सके।
23 बूथों पर बिजली-पानी नहीं
कर्णप्रयाग का राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वर्का इस बार लोक सभा चुनावों का मतदान केंद्र है। लेकिन विद्यालय दो वर्ष पूर्व बंद हो चुका है।
हालांकि स्कूल भवन ठीक है। लेकिन मतदान स्थल तक पंहुचने के रास्ते भी बदहाल पड़े हैं। यहां न तो बिजली और न ही पानी। ग्रामीणों की मानें तो स्कूल प्रांगण में झाड़ियां उग आई हैं।
गत वर्ष आपदा से यहां पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। जिसे अभी तक ठीक नहीं किया गया है। दूसरी ओर ब्लाक के 79 मतदान केंद्रों में 23 बूथों पर बिजली नहीं है।