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सीए ने सी दिया चुनावी खर्च का झोल
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 11 May 2014 03:11 PM IST
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चुनावी खर्च का पहला ब्योरा तैयार करने में चूके प्रत्याशियों ने बाद में कुछ खास गणित बैठाई।
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आंकड़ों में लाखों रुपए का अंतर
इस गणित से व्यय लेखा टीम और प्रत्याशियों के ब्योरे में फिर एक पैसे का फर्क नहीं आया। खर्च के पहले ब्योरे में प्रत्याशियों और व्यय लेखा टीम के आंकड़ों में लाखों रुपए का अंतर आया था।
सूत्रों ने बताया कि बाद में कई प्रत्याशियों ने ब्योरा तैयार करने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट की अगुवाई में अलग से टीम ही बना दी जिससे आंकड़ों में कोई फर्क नहीं आने पाया।
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प्रत्याशियों और व्यय लेखा टीम ने चुनावी खर्च का ब्योरा अलग-अलग तैयार किया था। जब कुल चुनावी खर्च के ब्योरे की जांच हुई तो प्रत्याशी और निर्वाचन आयोग की व्यय लेखा टीम के आंकड़ों में एक पैसे का फर्क नहीं मिला।
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इससे इन आंकड़ों पर सवालिया निशान लग गया। चुनावी गणितज्ञ चुनावी खर्च को करोड़ों में मान रहे हैं। जितना प्रत्याशियों ने कुल खर्च दिखाया है उतना पैसा तो सिर्फ प्रचार में खर्च होने का अंदाजा है।
प्रत्याशियों और व्यय लेखा टीम का ब्यौरा मिला
28 अप्रैल को जब पहला ब्योरा पेश हुआ था तो सभी प्रत्याशियों और व्यय लेखा टीम के आंकड़ों में फर्क था। कुछ प्रत्याशियों के ब्योरे में लाखों का अंतर था।
लेकिन दूसरी बैठक में सिर्फ भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह के ब्योरे में 2451793 रुपए का अंतर मिला। इसके बाद 5 मई को तीसरी और 9 मई को चौथी और अंतिम बैठक हुई।
इसमें प्रत्याशियों और व्यय लेखा टीम का ब्यौरा मिल गया। किसी में एक पाई का फर्क ही नहीं आया। सूत्रों का कहना है कि निर्वाचन आयोग के डंडे से बचने के लिए प्रत्याशियों ने ब्योरा तैयार करने के लिए अलग से टीम बना ली।
इसके बाद व्यय लेखा टीम के सदस्यों से सांठगांठ कर ली। जो ब्यौरा लेखा टीम ने तैयार किया, उसी को प्रत्याशियों की टीम ने नकल कर लिया जिससे ब्योरे में आने वाले फर्क के झंझट से निजात मिल गई।
चुनावी खर्च के व्यय लेखा प्रभारी जगत सिंह चौहान का कहना है कि उनके सामने जो कागजात आए उसकी जांच की गई।
पहली बैठक में ब्यौरे में आया फर्क देखिये
माला राज्य लक्ष्मी शाह (भाजपा)- 2020358 रुपए
साकेत बहुगुणा (कांग्रेस)- 2142331 रुपए
अनूप नौटियाल (आम आदमी पार्टी)- 234793 रुपए
शीशपाल सिंह (बसपा)- 319479 रुपए