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अब कामरेडों ने लिया सोशल साइट्स का सहारा
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 28 Apr 2014 03:11 PM IST
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उत्तराखंड में वर्षों से तीसरे विकल्प के तौर पर उभरने का सपना देख रहे वामपंथी तकनीक के मामले में अब तक बाकी दलों से पिछड़े रहे थे।
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प्रचार के लिए सड़कें नापना और जनता तक सीधा संवाद ही अब तक वामपंथियों का तरीका था।
लेकिन, बदलते वक्त में फेसबुक, वाट्स एप जैसे सोशल साइट्स के बढ़ते इस्तेमाल और कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के वर्चुअल वर्ल्ड में बढ़ते असर को देख आखिर वामपंथियों ने भी वक्त के साथ कदमताल शुरू कर दी है।
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टिहरी सीट पर माकपा प्रत्याशी शिवप्रसाद देवली और पौड़ी सीट से भाकपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह नेगी ने फेसबुक पर प्रोफाइल बना लिए हैं। दोनों हर रोज अपनी चुनावी गतिविधियां और एजेंडा अपडेट कर रहे हैं।
इसके साथ ही वामपंथी देर से ही सही, यह भी मानने लगे हैं कि सोशल साइट भी जनता से मुखातिब होने का अच्छा प्लेटफार्म है।
हो रही गर्मागर्म बहस
माकपा-भाकपा प्रत्याशी इन दिनों सुबह उठते ही अपने प्रोफाइल अपडेट कर रहे हैं। दिनभर की गतिविधियों, कहां सभा होनी है, कहां जनसंपर्क आदि जानकारी डाल रहे हैं।
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इसके अलावा अखबारों में खुद को मिलने वाली कवरेज की कतरनें भी पोस्ट की जा रही हैं। साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक मसलों पर भी विचार रखे जा रहे हैं।
वामपंथियों की ये पोस्ट सियासत में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बहस-मुबाहिसे का अच्छा प्लेटफार्म भी दे रही है। सीपीआई और सीपीआई (एम) दोनों दलों के फेसबुक एकाउंट में एक बात कॉमन है।
यहां कई वामपंथी (गैर दलीय) भी दोनों दलों को उनकी नीतियों के लिए कोसते नजर आते हैं।
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इनकी शिकायत यह है कि ये पार्टियां करती कुछ नहीं, बस देश-विदेश की बातें छेड़कर निकल लेती हैं। हालांकि, इन तंजों के बीच कुछ लोग वामपंथियों को देश के लिए जरूरी भी मानते हैं।
स्टूडेंट विंग कर रहीं मदद
वामपंथी दलों के वर्चुअल वर्ल्ड में प्रचार में इनकी छात्र विंग मदद कर रही हैं। एसएफआई, एआईएसएफ, आईसा जैसे वाम छात्र संगठनों से जुड़े युवा पोस्ट, शेयरिंग के जरिये लोगों तक पार्टी की नीतियां पहुंचा रहे हैं।
युवा कार्यकर्ताओं को हर रोज पार्टी प्रत्याशियों की ओर से अधिक से अधिक लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने और जोड़ने का टारगेट भी दिया जा रहा है।
अरविंद की कामयाबी से मिली राह
वामपंथी दल लंबे समय तक प्रचार के पुराने तरीकों पर ही भरोसा करते रहे।
कुछ समय पूर्व दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत और अरविंद केजरीवाल के सोशल साइट्स पर सक्रियता के भरोसे राष्ट्रीय फलक पर पहचान पाने के बाद प्रदेश के वामपंथियों में भी तकनीक के इस्तेमाल की राह पर चलने की अलख जगी।
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फेसबुक और सोशल साइट्स जनता तक अपनी बात पहुंचाने का अच्छा जरिया हैं। ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को फेसबुक से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन तक एजेंडा पहुंचाया जा सके। यह बात सही है कि फेसबुक पर आने में हमने कुछ देरी कर दी। लेकिन अब इसके जरिये हम रचनात्मक कार्य कर रहे हैं।
- शिवप्रसाद देवली, टिहरी माकपा प्रत्याशी
सोशल साइट्स प्रचार का अच्छा माध्यम हैं। छात्र और युवा इनका सर्वाधिक इस्तेमाल करते हैं। इस लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण हैं। हर राज्य में वामपंथी दल सोशल साइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- विजय रावत, राज्य सचिव, माकपा