{"_id":"65fbef5c48a647692b0bb32f","slug":"election-2024-uttarakhand-election-issue-garhwali-dialect-can-be-included-in-eighth-schedule-of-constitution-2024-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Election 2024: चुनावी मुद्दा बने तो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो सकेगी गढ़वाली बोली, पैरवी का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Election 2024: चुनावी मुद्दा बने तो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो सकेगी गढ़वाली बोली, पैरवी का इंतजार
Thu, 21 Mar 2024 02:33 PM IST
रेनू सकलानी
विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
Published by: रेनू सकलानी
Updated Thu, 21 Mar 2024 02:33 PM IST
सार
गढ़वाली बोली/भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए वर्षों से मंचों पर खूब मांग उठती रही पर संसद में पैरवी का इंतजार रहा।
विज्ञापन
बैठक (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तराखंड की गढ़वाली बोली/भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने का इंतजार है। आजादी के बाद से लोक बोली व भाषा को उसका हक दिलाने के लिए छोटे-बड़े मंचों पर निरंतर मांग हो रही है, लेकिन आज तक संसद में इसकी पैरवी नहीं हो पाई है। लोक भाषा से जुड़े साहित्यकारों ने भी गढ़वाली बोली-भाषा को उसका मान दिलाने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री रहते हुए सतपाल महाराज भी गढ़वाली बोली-भाषा की पैरवी कर चुके हैं।
विज्ञापन
लोक साहित्य से जुड़े कुछ जानकार गढ़वाली भाषा में लिखित साहित्य का सृजन वर्ष 1750 तो कुछ गढ़वाल नरेश सुदर्शन शाह (1815-1856) से होना मानते हैं। लोक साहित्यकार नंद किशोर हटवाल, रमाकांत बेंजवाल और बीना बेंजवाल का कहना है कि गढ़वाली बोली-भाषा स्वयं में समृद्ध है। इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना अनिवार्य है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें...Lok Sabha Election 2024: भाजपा प्रत्याशी जीते या हारे, मंत्रियों की होगी परीक्षा...कई सीटों पर कड़ी टक्कर
विज्ञापन
लोक साहित्य के क्षेत्र में बीते दो दशक से सक्रिय कलश संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल, लोक कवि जगदंबा चमोला व उपासना सेमवाल का कहना है कि रुद्रप्रयाग सहित गढ़वाल के सभी जिलों में गढ़वाली में साहित्य सृजन का कार्य नित नए मुकाम हासिल कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि गढ़वाली बोली-भाषा को आठवीं अनुसूचित में शामिल करने की बात लोकसभा चुनाव का मुद्दा बने। संवाद