फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   eid ul azha namaz in dehradun masjid

बकरीद के मौके पर देहरादून के ईदगाह में हुई नमाज

Tue, 13 Sep 2016 09:40 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 13 Sep 2016 09:40 AM IST
विज्ञापन
eid ul azha namaz in dehradun masjid

ईद-उल-अजहा (बकरीद) मंगलवार को हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। चकराता रोड स्थित ईदगाह में सुबह नौ बजे नमाज अदा की गई।

विज्ञापन


इसके बाद जानवरों की कुर्बानी का सिलसिला शुरू होगा, जो तीन दिन तक चलेगा। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देर रात तक बाजार में बकरों की खरीदारी की। इसके अलावा अन्य मस्जिदों में सुबह साढ़े आठ बजे का समय मुकर्रर किया गया है।

शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती मोहम्मद सलीम अहमद ने लोगों से सौहार्द के साथ त्योहार मनाने और कुर्बानी के अवशेषों का सही ढंग से निस्तारण करने की अपील की है।
विज्ञापन


उधर, महापौर विनोद चमोली ने ईद की बधाई देते हुए मुस्लिम इलाकों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने अतिरिक्त सफाई कर्मी तैनात करने को भी कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
क्या है बकरीद
उलमा के अनुसार ईद-उल-अजहा का त्योहार मुसलमान हजरत इब्राहिम की सुन्नत अदा करने के लिए जानवरों की कुर्बानी देकर मनाते हैं। अब से 1400 पहले पैगंबर इस्लाम हजरत इब्राहिम की कोई औलाद नहीं थी।

ऐसे में उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि उन्हें एक नेक बेटा दे। जो उनके बुढ़ापे का सहारा बने। अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की दुआ कबूल की। उनके यहां एक बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा। इस्माइल जब बड़े हुए तो हजरत इब्राहिम ने एक रात सपना देखा, जिसमें उनसे कहा गया कि वह अपने इकलौते अजीज बेटे को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दे।

सुबह जब उन्होंने यह बात बेटे को बताई तो हजरत इस्माइल ने सिर झुकाते हुए कहा कि आप अल्लाह के हुक्म की तामील कीजिए। यह सुन हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को लेकर मीना की पहाड़ियों में पहुंचे। वहां बेटे की आंख में पट्टी बांधकर उस पर तलवार चला दी।

अल्लाह को दोनों की आत्मीयता पसंद आई और उन्होंने हजरत इस्माइल को बचाकर उनके स्थान पर एक दुंबा भेड़ को भेज दिया। इसी याद में दुनिया भर के मुसलमान इस पर्व पर जानवरों की कुर्बानी करते हैं।

इन जानवरों की होती है कुर्बानी
ऊंट पांच साल का, भैंसा दो साल का, बकरा, भेड़, दुंबा एक साल का होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जिस जानवर में जितना बाल होंगे, उतना सवाब मिलेगा। इस लिए लोग अधिक बाल वाले और सुंदर दिखने वाले जानवरों की कुर्बानी करते हैं।


50 हजार से एक लाख तक है बकरों की कीमत
कुर्बानी के बकरों की खरीदारी को इनामुल्ला बिल्डिंग, मुस्लिम कॉलोनी, आजाद कॉलोनी में जगह-जगह अस्थायी पैठ लगी है। यहां सामान्य बकरों की कीमत 10 से 15 हजार रुपये है। जबकि कई बकरों की कीमत 50 हजार से एक लाख तक भी है। कई लोग मक्का, दुबई से लाखों की कीमत के दुंबे भी लाए हैं। जो देखने में खूबसूरत और भारी हैं।

ये है नमाज का वक्त 
कांवली जामा मस्जिद : सुबह आठ बजे 
पार्क वाली मस्जिद मुस्लिम कॉलोनी: 8:30 बजे
गौसिया जामा मस्जिद गांधी ग्राम: 8:30 बजे
ईसी रोड स्थित मस्जिद: 8:30 बजे
टर्नर रोड स्थित मस्जिद : 8:30 बजे
चकराता रोड स्थित ईदगाह: सुबह 9 बजे 
पलटन बाजार की जामा मस्जिद : 9:30 बजे 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed