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अश्वमेध यज्ञ स्थल तक सड़क पहुंचाने की कवायद हुई तेज
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जगतग्राम बाड़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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जिलाधिकारी के आदेश के बाद ब्लॉक और तहसील स्तर पर जगतग्राम बाड़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल तक सड़क पहुंचाने की कवायद तेज कर दी गई है। मंगलवार को खंड विकास अधिकारी (ट्रेनी आईएएस) आकांक्षा वर्मा ने नायब तहसीलदार पंचम सिंह नेगी के साथ मिलकर यज्ञ स्थल का निरीक्षण किया।
यज्ञ स्थल आम के बाग के बीचों-बीच स्थित है। ऐसे में वर्तमान में यज्ञ स्थल तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। लोगों को बाग से होते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंचना पड़ता है। बीते दिनों जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने यज्ञ स्थल के भ्रमण के दौरान लोनिवि, पर्यटन, ब्लॉक और तहसील प्रशासन को संबंधित बाग स्वामी के साथ बैठक कर शीघ्र यज्ञ स्थल तक रास्ता तैयार करने के निर्देश दिए थे। जिस पर अब ब्लॉक और तहसील प्रशासन ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है।
खंड विकास अधिकारी आकांक्षा वर्मा ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर संबंधित बागान स्वामी के साथ बैठक कर उनके हितों को ध्यान में रखते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार कर लिया जाएगा। यदि सहमति नहीं बनी तो वैकल्पिक रास्ता निर्माण पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। मालूम हो कि सरकार की योजना यज्ञ स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की है। यज्ञ स्थल की ब्राडिंग के लिए बाकायदा गरुड़ के आकार का लोगो डिजाइन करने की भी तैयारी चल रही है।
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यज्ञ स्थल तीसरी शताब्दी का है। यहां पर बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश के परम शक्तिशाली राजा शील वर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। वर्ष 1952-53 में जगतग्राम बाड़वाला में अश्वमेध यज्ञ स्थल होने के सबूत मिले थे। इसके बाद यहां पर पुरातात्विक उत्खनन कार्य शुरू किया गया था। जिसमें तीसरी शताब्दी की कई यज्ञ वेदिकाएं निकली। जिसके बाद इस जगह को आर्कियोजिकल साइट के रूप में पुरातत्व विभाग ने अंडरटेक कर लिया। ये यज्ञ वेदिकाएं पक्की इंटों से बनाई गई हैं जो ऊपर से देखने पर गरुड़ के आकार की नजर आती हैं। यज्ञ स्थल पर तीन यज्ञ वेदिकाएं ढूंढी जा चुकी है जबकि, चौथे को अभी खोजना बाकी है।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान अरुण सिंह खत्री, वॉर्ड मेंबर मनीश शर्मा, संदीप शर्मा आदि मौजूद रहे।
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यज्ञ स्थल आम के बाग के बीचों-बीच स्थित है। ऐसे में वर्तमान में यज्ञ स्थल तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। लोगों को बाग से होते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंचना पड़ता है। बीते दिनों जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने यज्ञ स्थल के भ्रमण के दौरान लोनिवि, पर्यटन, ब्लॉक और तहसील प्रशासन को संबंधित बाग स्वामी के साथ बैठक कर शीघ्र यज्ञ स्थल तक रास्ता तैयार करने के निर्देश दिए थे। जिस पर अब ब्लॉक और तहसील प्रशासन ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है।
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खंड विकास अधिकारी आकांक्षा वर्मा ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर संबंधित बागान स्वामी के साथ बैठक कर उनके हितों को ध्यान में रखते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार कर लिया जाएगा। यदि सहमति नहीं बनी तो वैकल्पिक रास्ता निर्माण पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। मालूम हो कि सरकार की योजना यज्ञ स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की है। यज्ञ स्थल की ब्राडिंग के लिए बाकायदा गरुड़ के आकार का लोगो डिजाइन करने की भी तैयारी चल रही है।
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यज्ञ स्थल तीसरी शताब्दी का है। यहां पर बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश के परम शक्तिशाली राजा शील वर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। वर्ष 1952-53 में जगतग्राम बाड़वाला में अश्वमेध यज्ञ स्थल होने के सबूत मिले थे। इसके बाद यहां पर पुरातात्विक उत्खनन कार्य शुरू किया गया था। जिसमें तीसरी शताब्दी की कई यज्ञ वेदिकाएं निकली। जिसके बाद इस जगह को आर्कियोजिकल साइट के रूप में पुरातत्व विभाग ने अंडरटेक कर लिया। ये यज्ञ वेदिकाएं पक्की इंटों से बनाई गई हैं जो ऊपर से देखने पर गरुड़ के आकार की नजर आती हैं। यज्ञ स्थल पर तीन यज्ञ वेदिकाएं ढूंढी जा चुकी है जबकि, चौथे को अभी खोजना बाकी है।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान अरुण सिंह खत्री, वॉर्ड मेंबर मनीश शर्मा, संदीप शर्मा आदि मौजूद रहे।