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जेल निरीक्षक से सवाल-जवाब कर छात्रों ने की जिज्ञासा शांत
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डीएवी महाविद्यालय के विधि विभाग के छात्र-छात्राओं ने जिला कारागार सुद्धोवाला में जाकर जेल के भीतर की गतिविधियों से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त किया। जेल निरीक्षक की निगरानी में हुए भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने कई सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।
विधि विभागाध्यक्ष डॉ. पारुल दीक्षित ने बताया कि विधि के छात्रों के लिए न्यायिक प्रक्रिया में शामिल सभी स्थानों जैसे पुलिस थाने, बाल सुधारगृह, कारागार, कचहरी, न्यायालय आदि के बारे में और उनकी प्रक्रियाओं की भी समझ होनी चाहिए। विभाग इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। यहां जेल निरीक्षक ने छात्रों को बताया कि किस प्रकार उम्रकैद के कैदियों के संबंध में राज्य सरकार निर्णय लेती है। कैसे बेल के संबंध में कार्रवाई की जाती है। मृत्युदंड की सजा दी जाती है। छात्रों ने महिला बैरक और कैदियों के कौशल संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों को भी देखा। विभागाध्यक्ष डॉ.पारुल दीक्षित ने बताया कि ज्यूडिशियल प्रॉप्रेस में आने वाले सभी स्थानों जैसे न्यायालय जेल पुलिस थाने कचहरी आदि उनकी कार्रवाईयों के बारे में विधि के छात्रों को जानकारी होनी ही चाहिए। बताया कि इससे पूर्व में छात्रों को उच्च न्यायालय नैनीताल भी ले जाया गया है। छात्रा वर्षा धीमान ने बताया कि कैदियों के कौशल से संबंधित कई काम यहां किए जा रहे हैं। कैदियों से किस प्रकार काम लिया जाता है, यह भी हमने देखा। वर्षा ने बताया कि कैदियों की ओर से बनाए गए उत्पादों के बारे सवाल पूछने पर जेल निरीक्षक द्वारा बताया गया कि कैदियों के द्वारा बनाई गई उत्पादों के स्टॉल बाहर भी लगाया जाता है। राजा रस्तोगी, अंकित चमोली, आइशा तोमर, प्रीति, अभिनव, शुभम आदि थे।
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विधि विभागाध्यक्ष डॉ. पारुल दीक्षित ने बताया कि विधि के छात्रों के लिए न्यायिक प्रक्रिया में शामिल सभी स्थानों जैसे पुलिस थाने, बाल सुधारगृह, कारागार, कचहरी, न्यायालय आदि के बारे में और उनकी प्रक्रियाओं की भी समझ होनी चाहिए। विभाग इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। यहां जेल निरीक्षक ने छात्रों को बताया कि किस प्रकार उम्रकैद के कैदियों के संबंध में राज्य सरकार निर्णय लेती है। कैसे बेल के संबंध में कार्रवाई की जाती है। मृत्युदंड की सजा दी जाती है। छात्रों ने महिला बैरक और कैदियों के कौशल संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों को भी देखा। विभागाध्यक्ष डॉ.पारुल दीक्षित ने बताया कि ज्यूडिशियल प्रॉप्रेस में आने वाले सभी स्थानों जैसे न्यायालय जेल पुलिस थाने कचहरी आदि उनकी कार्रवाईयों के बारे में विधि के छात्रों को जानकारी होनी ही चाहिए। बताया कि इससे पूर्व में छात्रों को उच्च न्यायालय नैनीताल भी ले जाया गया है। छात्रा वर्षा धीमान ने बताया कि कैदियों के कौशल से संबंधित कई काम यहां किए जा रहे हैं। कैदियों से किस प्रकार काम लिया जाता है, यह भी हमने देखा। वर्षा ने बताया कि कैदियों की ओर से बनाए गए उत्पादों के बारे सवाल पूछने पर जेल निरीक्षक द्वारा बताया गया कि कैदियों के द्वारा बनाई गई उत्पादों के स्टॉल बाहर भी लगाया जाता है। राजा रस्तोगी, अंकित चमोली, आइशा तोमर, प्रीति, अभिनव, शुभम आदि थे।
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