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उत्तराखंड में शिक्षा के हाल पर सवाल: 864 स्कूलों में 434 शिक्षक छुट्टी पर, बगैर बताए अनुपस्थित एक भी नहीं
Sat, 12 Mar 2022 04:29 PM IST
रेनू सकलानी
बिशन सिंह बोरा , अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा , अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 12 Mar 2022 04:29 PM IST
सार
ठीक दो दिन पहले शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के देहरादून जिले के कुछ स्कूलों के औचक निरीक्षण में एक स्कूल में ताला लगा मिला तो कुछ स्कूलों से शिक्षक नदारद मिले।अब दो दिन बाद प्रदेश भर में एक भी शिक्षक के बिना बताए अनुपस्थित न मिलने से सवाल खड़ा हो रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश में शुक्रवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 864 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जिसमें 434 शिक्षक छुट्टी पर मिले। यह हाल तब है जबकि कोविड की वजह से लंबे समय से बंद रहे स्कूल पिछले महीने सात फरवरी से खुले हैं। वहीं निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों को राज्यभर में एक भी शिक्षक के बिना बताए अनुपस्थित न मिलने से विभागीय निरीक्षण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सबसे अधिक ऊधमसिंह नगर के 142 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जिनमें 110 शिक्षक छुट्टी पर मिले। जबकि पौड़ी जिले के 111 स्कूलों के 57 शिक्षक, टिहरी के 46 स्कूलों के 12, हरिद्वार जिले के 81 स्कूलों के 21, देहरादून के 50 स्कूलों के दो, नैनीताल जिले के 61 स्कूलों के 52, अल्मोड़ा के 57 स्कूलों के 38 शिक्षक छुट्टी पर मिले। जबकि पिथौरागढ़ जिले के 57 स्कूलों के 38, चंपावत के 50 स्कूलों के 44 एवं बागेश्वर जिले के 37 स्कूलों के 13 शिक्षक छुट्टी पर मिले।
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निरीक्षण पर खड़े हो रहे सवाल
इसके अलावा कुछ अन्य जिलों के स्कूलों के निरीक्षण में भी शिक्षक छुट्टी पर मिले। हैरानी की बात यह है कि विभाग को प्रदेश भर में निरीक्षण के दौरान एक भी शिक्षक बिना बताए अनुपस्थित नहीं मिला। यह हाल तब है जबकि ठीक दो दिन पहले शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के देहरादून जिले के कुछ स्कूलों के औचक निरीक्षण में एक स्कूल में ताला लगा मिला तो कुछ स्कूलों से शिक्षक नदारद मिले, एक अन्य स्कूल में शिक्षक थे तो बच्चे ही नहीं थे। जबकि अब दो दिन बाद प्रदेश भर में एक भी शिक्षक के बिना बताए अनुपस्थित न मिलने से सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या दो दिन के भीतर प्रदेश भर में शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आ गई और सभी शिक्षक तय समय पर स्कूल आने लगे हैं।
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मिड-डे मील की गुणवत्ता नहीं मिली ठीक
शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के मुताबिक 864 स्कूलों के निरीक्षण में 91 हजार से अधिक बच्चे उपस्थित मिले हैं। बच्चों की यह संख्या कम है। निरीक्षण के दौरान जीजीआईसी अजबपुर कलां देहरादून में मिड-डे मील की गुणवत्ता ठीक नहीं पाई गई। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रायपुर में भी इसकी गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। इस पर जीजीआईसी अजबपुर के प्रधानाचार्य एवं मिड-डे मील प्रभारी का जवाब तलब किया गया है।
स्कूलों के निरीक्षण में शिक्षक छुट्टी पर मिले, पर बिना बताए छुट्टी पर कोई शिक्षक नहीं मिला। इससे लगता है कि शिक्षक इस मसले पर सतर्क हो गए हैं। प्रदेश भर में स्कूलों का औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा। - बंधीशर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक
बड़ी संख्या में शिक्षकों का छुट्टी पर जाना चिंताजनक : तिवारी
शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने शिक्षा निदेशक एवं समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिए निर्देशों में कहा कि हाल ही में उन्होंने कुछ स्कूलों का निरीक्षण किया, जिसमें कुछ स्कूलों में ताला लगा मिला तो कुछ में शिक्षक अनुपस्थित मिले। इससे स्पष्ट होता है कि शिक्षक छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के प्रति गंभीर नहीं हैं। वहीं दो साल बाद स्कूल खुलने के बावजूद कई शिक्षकों के छुट्टी पर होना भी चिंताजनक है।
शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि प्रदेश में कोविड की वजह से लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के बाद हाल ही में खुले हैं। इन स्कूलों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि शिक्षक तय समय पर स्कूल नहीं आ रहे। अधिकतर स्कूलों में तय समय से पहले ही छात्र-छात्राओं की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया गया। कुछ स्कूलों में ताले भी लगे मिले।
एसीआर लिखे जाने के दौरान किया जाए दर्ज
यह स्थिति ठीक नहीं है। कोविड-19 की स्थिति सामान्य होने पर स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों का छुट्टी पर जाना एवं बच्चों को पढ़ाने के प्रति गंभीर न होना चिंताजनक है। इस स्थिति से राज्य, मंडल, जनपद एवं विकासखंड स्तर पर तैनात विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाता तो यह स्थिति न होती।
शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि जब स्कूल का दोबारा निरीक्षण करें तो पूर्व के पाई गई कमियों का निराकरण हुआ कि नहीं इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। केवल निरीक्षण रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों को भेजकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। इस मसले में लापरवाही का वार्षिक गोपनीय आख्या लिखे जाने के दौरान संज्ञान लिया जाना चाहिए। जिसे एसीआर में दर्ज किया जाना चाहिए।
शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि प्रदेश में कोविड की वजह से लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के बाद हाल ही में खुले हैं। इन स्कूलों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि शिक्षक तय समय पर स्कूल नहीं आ रहे। अधिकतर स्कूलों में तय समय से पहले ही छात्र-छात्राओं की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया गया। कुछ स्कूलों में ताले भी लगे मिले।
एसीआर लिखे जाने के दौरान किया जाए दर्ज
यह स्थिति ठीक नहीं है। कोविड-19 की स्थिति सामान्य होने पर स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों का छुट्टी पर जाना एवं बच्चों को पढ़ाने के प्रति गंभीर न होना चिंताजनक है। इस स्थिति से राज्य, मंडल, जनपद एवं विकासखंड स्तर पर तैनात विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाता तो यह स्थिति न होती।
शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि जब स्कूल का दोबारा निरीक्षण करें तो पूर्व के पाई गई कमियों का निराकरण हुआ कि नहीं इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। केवल निरीक्षण रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों को भेजकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। इस मसले में लापरवाही का वार्षिक गोपनीय आख्या लिखे जाने के दौरान संज्ञान लिया जाना चाहिए। जिसे एसीआर में दर्ज किया जाना चाहिए।