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छात्रों पर भारी शिक्षा और सिंचाई विभाग की खींचातानी
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प्राइमरी स्कूल डाकपत्थर में बदहाल पड़ा बहुद्देशीय भवन।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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शिक्षा और सिंचाई विभाग की आपसी खींचातान कभी भी जीआईसी डाकपत्थर में पढ़ने वाले छात्रों पर भारी पड़ सकती है। कहने को तो पूरा स्कूल चार ब्लॉक (बिल्डिंग) में विभाजित है, लेकिन वर्तमान में एक भवन रखरखाव के अभाव में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। स्कूल प्रशासन ने खतरे के डर को भांपते हुए इस भवन में छात्रों के बैठने पर रोक लगा दी है। वहीं, मुख्य भवन के दो कमरों में भी बरसात शुरू होते ही पानी टपकने लगता है। इससे दोनों कमरों में पानी भर जाता है। साथ ही स्कूल के अन्य ब्लॉकों में भी कमरे सीलन की चपेट में आ गए हैं।
70 के दशक में परियोजना क्षेत्र डाकपत्थर में सिंचाई विभाग ने जीआईसी डाकपत्थर के भवन का निर्माण कराया था। इसमें लंबे समय से शिक्षा विभाग स्कूल का संचालन करता आ रहा है, लेकिन राज्य गठन के बाद से दोनों ही विभाग स्कूल मरम्मत के नाम पर एक दूसरे पर पल्ला झाड़ते आ रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि अब स्कूल परिसर में बना एक भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इस भवन के कमरों में लंबी-लंबी दरारें पड़ी हुई हैं। वहीं, मुख्य भवन के कमरे में भी पानी टपकने लगा है। दोनों विभाग बजट का रोना रोकर एक-दूसरे के ऊपर अपनी जिम्मेदारियों का ठीकरा फोड़ रहे हैं। अभिभावक सुरेश चौहान, अमित तोमर, रिंकी पंवार आदि का कहना है कि स्कूल परिसर में खड़ा निष्प्रोज्य भवन कभी भी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए खतरा बन सकता है। शासन-प्रशासन को शीघ्र नए भवन का निर्माण करना चाहिए। ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
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प्राइमरी में भी कमोवेश यही हालात
डाकपत्थर स्थित प्राइमरी स्कूल में बना बहुद्देशीय भवन भी मरम्मत के अभाव में पूरी तरह से खंडहर बन चुका है। इस भवन के रखरखाव की जिम्मेदारी पर भी दोनों विभागों में खींचातानी है। स्कूल की खस्ताहालत को देखते हुए दो वर्ष पूर्व शिक्षा विभाग ने अपने मद से मुख्य भवन की मरम्मत कराई थी, लेकिन अब भी बहुद्देशीय भवन की मरम्मत नहीं हो सकी है। ऐसे में यह भवन भी खंडहर में तब्दील हो चुका है। बरसात में कभी भी यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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कभी थे सबसे बड़े स्कूल
परियोजना क्षेत्र में 70 के दशक में शुरू हुए प्राइमरी और इंटर कॉलेज डाकपत्थर कभी अविभाजित उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े स्कूलों में से एक थे। इंटर कॉलेज में करीब 3000 छात्र एक साथ शिक्षा ग्रहण करते थे, लेकिन राज्य गठन के बाद से ही स्कूूल की हालत बिगड़ती चली गई।
कोट,,,,,
स्कूल सिंचाई विभाग के भवन में संचालित है। ऐसे में रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। पूर्व में भी रखरखाव के लिए विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। एक बार फिर से विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
-वीपी सिंह, खंड शिक्षाधिकारी, विकासनगर
कोट,,,,
सिंचाई विभाग ने शिक्षा विभाग को स्कूल संचालित करने के लिए जमीन और भवन मुहैया कराया है। इसका कोई भी शुल्क शिक्षा विभाग से नहीं लिया जाता। ऐसे में यदि शिक्षा विभाग रखरखाव के लिए बजट मुहैया कराता है तो विभाग इसकी मरम्मत कराएगा। यदि विभाग को लगता है कि भवन निष्प्रोज्य है तो इसकी सूचना लिखित में विभाग को दे सकता है। जिसके बाद उसे ध्वस्त कराया जाएगा।
-एके वर्मा, अधिशासी अभियंता, अवस्थापना खंड सिंचाई विभाग, डाकपत्थर
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70 के दशक में परियोजना क्षेत्र डाकपत्थर में सिंचाई विभाग ने जीआईसी डाकपत्थर के भवन का निर्माण कराया था। इसमें लंबे समय से शिक्षा विभाग स्कूल का संचालन करता आ रहा है, लेकिन राज्य गठन के बाद से दोनों ही विभाग स्कूल मरम्मत के नाम पर एक दूसरे पर पल्ला झाड़ते आ रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि अब स्कूल परिसर में बना एक भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इस भवन के कमरों में लंबी-लंबी दरारें पड़ी हुई हैं। वहीं, मुख्य भवन के कमरे में भी पानी टपकने लगा है। दोनों विभाग बजट का रोना रोकर एक-दूसरे के ऊपर अपनी जिम्मेदारियों का ठीकरा फोड़ रहे हैं। अभिभावक सुरेश चौहान, अमित तोमर, रिंकी पंवार आदि का कहना है कि स्कूल परिसर में खड़ा निष्प्रोज्य भवन कभी भी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए खतरा बन सकता है। शासन-प्रशासन को शीघ्र नए भवन का निर्माण करना चाहिए। ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
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प्राइमरी में भी कमोवेश यही हालात
डाकपत्थर स्थित प्राइमरी स्कूल में बना बहुद्देशीय भवन भी मरम्मत के अभाव में पूरी तरह से खंडहर बन चुका है। इस भवन के रखरखाव की जिम्मेदारी पर भी दोनों विभागों में खींचातानी है। स्कूल की खस्ताहालत को देखते हुए दो वर्ष पूर्व शिक्षा विभाग ने अपने मद से मुख्य भवन की मरम्मत कराई थी, लेकिन अब भी बहुद्देशीय भवन की मरम्मत नहीं हो सकी है। ऐसे में यह भवन भी खंडहर में तब्दील हो चुका है। बरसात में कभी भी यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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कभी थे सबसे बड़े स्कूल
परियोजना क्षेत्र में 70 के दशक में शुरू हुए प्राइमरी और इंटर कॉलेज डाकपत्थर कभी अविभाजित उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े स्कूलों में से एक थे। इंटर कॉलेज में करीब 3000 छात्र एक साथ शिक्षा ग्रहण करते थे, लेकिन राज्य गठन के बाद से ही स्कूूल की हालत बिगड़ती चली गई।
कोट,,,,,
स्कूल सिंचाई विभाग के भवन में संचालित है। ऐसे में रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। पूर्व में भी रखरखाव के लिए विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। एक बार फिर से विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
-वीपी सिंह, खंड शिक्षाधिकारी, विकासनगर
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सिंचाई विभाग ने शिक्षा विभाग को स्कूल संचालित करने के लिए जमीन और भवन मुहैया कराया है। इसका कोई भी शुल्क शिक्षा विभाग से नहीं लिया जाता। ऐसे में यदि शिक्षा विभाग रखरखाव के लिए बजट मुहैया कराता है तो विभाग इसकी मरम्मत कराएगा। यदि विभाग को लगता है कि भवन निष्प्रोज्य है तो इसकी सूचना लिखित में विभाग को दे सकता है। जिसके बाद उसे ध्वस्त कराया जाएगा।
-एके वर्मा, अधिशासी अभियंता, अवस्थापना खंड सिंचाई विभाग, डाकपत्थर