उत्तराखंड: नंधौर अभयारण्य के कोर जोन में ही बनेगा टाइगर रिजर्व, इको सेंसिटिव जोन बाहर
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नंधौर वन्य जीव अभयारण्य में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व से 578 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कम कर दिया गया है। अब नंधौर अभयारण्य के कोर जोन में ही टाइगर रिजर्व बनेगा। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में भी इस पर मुहर लगा दी गई है। अब 25 जून को दिल्ली में होने वाली नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में टाइगर रिजर्व पर अंतिम रूप से फैसला हो जाएगा।
नंधौर में घना जंगल होने से वन्य जीव और जैव विविधता भरपूर है। वर्ष 2012 में नंधौर को वन्य जीव अभयारण्य बनाया गया था। एक साल पूर्व नंधौर में टाइगर रिजर्व बनने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य (269.95 वर्ग किमी) और इको सेंसिटिव जोन (578 वर्ग किमी) को मिलाकर टाइगर रिजर्व प्रस्तावित था। हाल ही में नंधौर को टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से रायशुमारी की थी। इस रायशुमारी में लोगों ने रिजर्व का पुरजोर विरोध किया था।
रिजर्व का क्षेत्रफल कम करने से खनन पर नहीं पड़ेगा असर
लोगों के विरोध को देखते हुए अब ईको सेंसिटिव जोन का 578 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा टाइगर रिजर्व से बाहर कर दिया गया है। अब टाइगर रिजर्व की हद सिर्फ अभयारण्य तक ही सीमित रहेगी। हाल ही में हुई स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इको सेंसिटिव जोन में ही अधिकतर आबादी है। टाइगर वैसे भी नंधौर के कोर जोन में ही रहते हैं।
रिजर्व का क्षेत्रफल कम करने से खनन पर नहीं पड़ेगा असर
नंधौर अभयारण्य में टाइगर रिजर्व बनने पर खनन पर कोई असर नहीं होगा। केंद्र के नियमानुसार टाइगर रिजर्व, अभ्यारण्य से 10 किमी की दूरी पर खनन होना चाहिए। वर्तमान में अभयारण्य से 10 किमी से अधिक दूरी पर खनन होता है। अब वहां रिजर्व बन जाएगा तो कोई बदलाव नहीं आएगा। खनन बंद होने की आशंका को लेकर भी टाइगर रिजर्व का विरोध हो रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि खनन से ही क्षेत्र में कई लोगों का रोजगार जुड़ा है।