फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Eco sensitive zone out of from Nandhaur Sanctuary

उत्तराखंड: नंधौर अभयारण्य के कोर जोन में ही बनेगा टाइगर रिजर्व, इको सेंसिटिव जोन बाहर

Mon, 25 Jun 2018 11:42 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 25 Jun 2018 11:42 AM IST
विज्ञापन
Eco sensitive zone out of from Nandhaur Sanctuary
Nandhaur Sanctuary reserve

नंधौर वन्य जीव अभयारण्य में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व से 578 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कम कर दिया गया है। अब नंधौर अभयारण्य के कोर जोन में ही टाइगर रिजर्व बनेगा। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में भी इस पर मुहर लगा दी गई है। अब 25 जून को दिल्ली में होने वाली नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में टाइगर रिजर्व पर अंतिम रूप से फैसला हो जाएगा।

विज्ञापन


नंधौर में घना जंगल होने से वन्य जीव और जैव विविधता भरपूर है। वर्ष 2012 में नंधौर को वन्य जीव अभयारण्य बनाया गया था। एक साल पूर्व नंधौर में टाइगर रिजर्व बनने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य (269.95 वर्ग किमी) और इको सेंसिटिव जोन (578 वर्ग किमी) को मिलाकर टाइगर रिजर्व प्रस्तावित था। हाल ही में नंधौर को टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से रायशुमारी की थी। इस रायशुमारी में लोगों ने रिजर्व का पुरजोर विरोध किया था।
विज्ञापन

 

रिजर्व का क्षेत्रफल कम करने से खनन पर नहीं पड़ेगा असर

Eco sensitive zone out of from Nandhaur Sanctuary
Nandhaur Sanctuary reserve

लोगों के विरोध को देखते हुए अब ईको सेंसिटिव जोन का 578 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा टाइगर रिजर्व से बाहर कर दिया गया है। अब टाइगर रिजर्व की हद सिर्फ अभयारण्य तक ही सीमित रहेगी। हाल ही में हुई स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इको सेंसिटिव जोन में ही अधिकतर आबादी है। टाइगर वैसे भी नंधौर के कोर जोन में ही रहते हैं।

रिजर्व का क्षेत्रफल कम करने से खनन पर नहीं पड़ेगा असर
नंधौर अभयारण्य में टाइगर रिजर्व बनने पर खनन पर कोई असर नहीं होगा। केंद्र के नियमानुसार टाइगर रिजर्व, अभ्यारण्य से 10 किमी की दूरी पर खनन होना चाहिए। वर्तमान में अभयारण्य से 10 किमी से अधिक दूरी पर खनन होता है। अब वहां रिजर्व बन जाएगा तो कोई बदलाव नहीं आएगा। खनन बंद होने की आशंका को लेकर भी टाइगर रिजर्व का विरोध हो रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि खनन से ही क्षेत्र में कई लोगों का रोजगार जुड़ा है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed