सांपों में अभी भी भूकंप की 'दहशत', बिलों से भाग रहे बाहर
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नेपाल समेत समूचे उत्तर भारत में भूकंप का असर केवल इंसानों ही नहीं जीव जंतुओं पर पर भी पड़ा है। सांप इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उत्तराखंड में शहरी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में आए दिन सांप निकल रहे हैं।
वन विभाग की टीम एक सप्ताह के अंदर मेडिकल कॉलेज में 14 फीट का किंग कोबरा, 9 फीट का अजगर, घोड़ा पछाड़ आदि सांपों को पकड़ चुकी है। वनाधिकारी इस बीच सांप निकलने के पीछे हाल ही में आए भूकंप को एक कारण मान रहे हैं।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक सांप का मूवमेंट और एक्शन कंपन पर ही निर्भर होता है। सांप कंपन को बहुत तेजी से महसूस करता है। ऐसे में हो सकता है कि सांपों के इतनी बड़ी संख्या में बाहर आने का कारण भूकंप के झटके हो सकते हैं।
एक और वजह है सांपों के बाहर आने की
इसके अलावा गर्मी भी एक कारण हैं। चूंकि सांप का खून ठंडा होता है ऐसे में जब गर्मी बढ़ती है तो वह और ठंडक की तलाश में बिलों से बाहर आ जाते हैं। प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन नीतिशमणि त्रिपाठी भी मानते हैं कि भूकंप की वजह से सांप बिलों से बाहर आए हैं।
व्यवहार में भी बदलाव
वन्यजीव विशेषज्ञों को सांपों के व्यवहार में बदलाव के भी संकेत मिले हैं। नंधौर अभ्यारण्य के उप निदेशक प्रकाश आर्य ने जाड़ों में सांपों के व्यवहार को लेकर अध्ययन कराया था, इसमें जाड़े में भी खूब सांप निकले थे, जबकि सांप कड़ाके की ठंड में तुलनात्मक तौर पर बहुत कम बाहर निकलते थे।
प्रदेश भर में बढ़ी संख्या
सांपों का निकलना केवल हल्द्वानी ही नहीं बल्कि समूचे उत्तराखंड से भूकंप के बाद से सांप अधिक मात्रा में घरों और बिल्डिगों के अंदर से पकड़े गए हैं। राजधानी दून और ऋषिकेश में भी सांप पकड़े गए हैं।