हो गई खोज, अब भूकंप से बचाएगा यह सिस्टम
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उत्तराखंड में भूकंप की पूर्व चेतावनी का तंत्र स्थापित कर लिया गया है। पढ़िए, कैसे काम करता है यह तंत्र...
इस तंत्र के स्थापित होने से छह से अधिक तीव्रता का भूकंप आने पर दिल्ली को कम से कम 90 सेकेंड और देहरादून को 37 सेकेंड पहले चेतावनी जारी की जा सकेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आईआईटी रुड़की की मदद से गढ़वाल क्षेत्र में कई स्थानों पर सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर भूकंप के कंपन में काम करते हैं। इनसे निकलने वाले सिग्नल को संचार तंत्र से जोड़कर आसानी से पूर्व चेतावनी जारी की जा सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भूकंप का केंद्र उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल में लगाए गए सेंसर के नेटवर्क में कहीं हैं तो इसकी जानकारी दिल्ली में 90 सेकेंड पहले दी जा सकती है।
भूकंप आने पर उत्पन्न होती हैं दो तरंगें
हालांकि जो स्थान भूकंप के केंद्र से जितना नजदीक होगा वहां चेतावनी जारी करने के लिए समय उतना ही कम समय होगा। इस हिसाब से भूकंप आने के 37 सेकेंड पहले देहरादून और 70 सेकेंड पहले मेरठ में चेतावनी जारी की जा सकेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक,भूकंप आने पर दो तरह की तरंगें उत्पन्न होती है। पी तरंग और एस तरंग। भूकंप आने पर पहले पी तरंग उत्पन्न होती है और उत्तर भारत की मिट्टी में यह तरंग छह किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से यात्रा करती है।
इसके विपरीत अधिक नुकसान करने वाली एस तरंग तीन किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से यात्रा करती है। सेंसर पी तरंगों को ग्रहण करके संकेत भेजते हैं।