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बड़ी खबरः इस तकनीक से अब पहले ही पता चल जाएगा भूकंप आने वाला है...

Wed, 17 May 2017 08:48 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 May 2017 08:48 AM IST
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earthquake alert before earthquake
earthquake - फोटो : IBTimes India

पर्वतीय भूभाग में अगर चमोली या उत्तरकाशी सरीखा भूकंप आया तो इस जलजले की खबर देहरादून से लेकर मेरठ और दिल्लीवालों को एक मिनट पहले मिल जाएगी।

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ऐसा भूकंप पूर्व चेतावनी सिस्टम से मुमकिन होगा, जिसे अब समूचे उत्तराखंड में स्थापित करने को मंजूरी दे दी गई है। गढ़वाल के बाद अब कुमाऊं मंडल के 86 संवेदनशील स्थानों पर एस्लोग्राफ लगाए जाएंगे।
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इसके साथ ही समूचे प्रदेश में भूकंप पूर्व चेतावनी सिस्टम लागू करने वाला उत्तराखंड देश का सबसे पहला राज्य हो जाएगा। गढ़वाल में 100 एस्लोग्राफ स्थापित किए जा चुके हैं।

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रुद्रप्रयाग में आए भूकंप की पूर्व सूचना जारी न होने पर सवाल उठे थे

earthquake alert before earthquake
भूकंप - फोटो : SELF

इस योजना को एक वर्ष के लिए बढ़ाते हुए इस मद में 3.061 करोड़ रुपये की धनराशि आईआईटी के निदेशक को देने के आदेश जारी कर दिए हैं।

गढ़वाल में चेतावनी प्रणाली होने के बावजूद फरवरी माह में रुद्रप्रयाग जिले में आए भूकंप की पूर्व सूचना जारी न होने पर सवाल उठे थे। लेकिन योजना से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि ये प्रणाली छह और छह से अधिक तीव्रता के भूकंप की ही चेतावनी जारी करेगी। 

आईआईटी रुड़की के अर्थक्विक इंजीनियरिंग के पूर्व प्रभारी डॉ. एमएल शर्मा के मुताबिक, भूकंप की वेव एक सेकेंड में तीन से पांच किमी की दूरी तय करती है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक वेव की रफ्तार इससे सौ गुना अधिक है।

खतरे की स्थिति में सायरन बज उठेंगे

earthquake alert before earthquake

इस तरह भूकंप का केंद्र जितना ज्यादा दूर होता जाएगा, भूकंप पूर्व सूचना का समय भी उतना ही अधिक बढ़ता जाएगा। 

भूकंप पूर्व सूचना प्रणाली स्थापित होने के बाद इससे सायरन जोड़ दिए जाएंगे। खतरे की स्थिति में ये सायरन बज उठेंगे। ये सूचना मोबाइल में एसएमएस के जरिये भी प्रसारित हो सकती है। आईआईटी रुड़की के सभी भवनों में सायरन तकनीक स्थापित हो चुकी है।

गढ़वाल के बाद कुमाऊं मंडल में भी भूकंप पूर्व चेतावनी संयंत्र लगाने को मंजूरी दे दी गई है। आईआईटी रुड़की को ये कार्य दिया गया है। इस सूचना तंत्र से लोगों को भूकंप के प्रति सचेत करने में मदद मिलेगी।
-अमित सिंह नेगी, सचिव, आपदा प्रबंधन

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