फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   earning from roti making.

इनके लिए रोटी बनी परिवार की रोजी

Tue, 09 Dec 2014 08:13 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 09 Dec 2014 08:13 AM IST
विज्ञापन
earning from roti making.

अनु, निशा और नीरू तीनों का दर्द एक ही था गुरबत। आर्थिक कमजोरी, उस पर ज्यादा पढ़ा-लिखा न होना। वे कोई रोजगार तलाशने की कोशिश करतीं तो नाकामी ही हाथ आती थी।

विज्ञापन


हाथों में कोई खास हुनर भी नहीं, सिवाय इसके कि चूल्हा-चौका करना इनकी नियति और शौक भी था। पति-बच्चों के लिए रोटियां बेलते-बेलते इन महिलाओं ने कुछ करने की ठान ली और रोटियों को ही परिवार की रोजी-रोटी का जरिया बना लिया।
विज्ञापन


आज देहरादून की शादियों में खुड़बुड़ा मोहल्ले की रहने वाली ये महिलाएं अपना स्टाल सजाती हैं। वहां इनकी बनाई नर्म, गर्म रोटियां मेहमानों की जुबानों में घुलती हैं तो तारीफों के पुल बंधने शुरू हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अनु 44 वर्ष की हैं। पहले घर का गुजारा पति की कमाई से चलता था। कुछ समय पूर्व उनकी तबीयत खराब रहने लगी। काम छूट गया, उस पर इलाज का खर्चा बढ़ता गया। खाना बनाने का शौक था। अनु ने शादियों में रोटी बनाना शुरू किया, मोहल्ले की और महिलाओं को भी साथ जोड़ा।

49 वर्षीय निशा के पति बेरोजगार हैं। कमाई का कोई जरिया न होने से परिवार के पालन की जिम्मेदारी उन पर ही है। रोजगार का कोई ठिकाना था नहीं। एक काम ही सबसे अच्छा आता था, खाना बनाना, तो इसे ही रोजी से जोड़ लिया। बच्चों ने भी साथ दिया और काम चल निकला।

47 वर्षीय नीरू बताती हैं कि परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। कागज के लिफाफे बनाकर दुकानों में देती थीं, लेकिन इससे गुजारा चलाना मुश्किल था। अब शादियों के सीजन में स्टालों पर रोटियां बनाकर अच्छी रोजी जुट जाती है। हालांकि, बाकी समय लिफाफे अब भी बनाती हैं।

प्रोफेशनल है प्रजेंटेशन

earning from roti making.

ये महिलाएं भले ही कम पढ़ी-लिखी हों, लेकिन शादियों में उनका अंदाज प्रोफेशनल शेफ से कम नहीं होता। अनु बताती हैं कि आज के दौर में क्वालिटी के साथ प्रजेंटेशन भी अच्छा होना चाहिए।

यही वजह है कि इनके स्टाल पर रोटियां बनाने वाली महिलाएं बकायदा शेफ कोट और कैप पहने नजर आती हैं। मेहमानों को रोटियां सर्व करने का अंदाज भी ऐसा होता है कि खाने वाले मुरीद हो जाएं।

एक शादी @ 300
अनु बताती हैं कि शुरुआत उन्होंने अकेले की थी। मोहल्ले में और आसपास की शादियों में मेहंदी से ही लोग उन्हें घरों में खाना बनाने बुलाते थे। इसमें वह नीरू और निशा की मदद लेती थीं। लोगों को खाना पसंद आया तो डिमांड बढ़ी।

इसके बाद मोहल्ले की कई दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी साथ ले लिया। अब शादी में मेहमानों की संख्या के आधार पर वे अपने ग्रुप की साथियों को ले जाती हैं।

एक ही दिन दो-तीन शादियां हों तो भी दिक्कत नहीं होती। हर महिला को एक शादी में 300 रुपए मिल जाते हैं। अब तो कई वेडिंग प्वाइंट वाले भी बुलाने लगे हैं।

देती हैं वैरायटी
अनु बताती हैं कि उनका स्टाल सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि वहां तवे की रोटियां मिलती हैं। बल्कि ग्रुप की महिलाएं मेहमानों की डिमांड पर चने, मक्के की रोटियां भी बनाती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed