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उत्तराखंड : वकीलों के सत्यापन में अपनाए दोहरे मापदंड
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 03 Mar 2017 01:27 PM IST
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प्रदेश में वकीलों के सत्यापन में दोहरे मापदंड अपनाए गए हैं। तीन सौ से अधिक वकीलों को जहां बार एसोसिएशन की लिस्ट से बाहर किया गया, वहीं उत्तराखंड में कुछ कैबिनेट मंत्री न सिर्फ विभिन्न बार एसोसिएशनों से जुड़े हैं
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बल्कि वह एसोसिएशन चुनाव में मतदान भी करते रहे हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा के मुताबिक मंत्री का पद लाभ का पद है। यदि कोई वकील मंत्री बनता है तो उसका लाइसेंस उस समय के लिए सस्पेंड हो जाता है। वह न प्रैक्टिस कर सकता है न ही मतदान।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर प्रदेश भर में वकीलों का सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें कई वकीलों को एसोसिएशनों की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। जबकि चार हजार वकील अभी और ऐसे हैं, जिन्हें सत्यापन फार्म जमा न होने पर बाहर किए जाने की तैयारी है, लेकिन इसमें एसोसिएशन और काउंसिल की ओर से दोहर मापदंड अपनाए जा रहे हैं।
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कैबिनेट मंत्रियों का पद लाभ का पद होने के बावजूद वह न सिर्फ विभिन्न एसोसिएशनों से जुड़े हैं बल्कि हर साल होने वाले चुनाव में मताधिकार का प्रयोग भी करते रहे हैं। ताजा मामला दून बार एसोसिएशन के हाल में हुए चुनाव में सामने आया। कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने चुनाव में मतदान किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा के मुताबिक यदि कोई मंत्री बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान कर रहा है तो संबंधित बार एसोसिएशन इसके लिए जिम्मेदार है।
एसोसिएशन में बने रहना मुश्किल
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देश भर में वकीलों का सत्यापन किया जा रहा है, इसमें अन्य व्यवसाय से जुड़े वकीलों को कौंसिल से बाहर किया जा रहा है, जिसकी जद में अब वकील से मंत्री बने लोग भी हैं। बार कौंसिल के मुताबिक यह लोग मंत्री पद की अवधि तक एसोसिएशनों में सदस्य नहीं रह सकते।
एडवोकेट एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि वकालत के अलावा किसी अन्य व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति बार कौंसिल में नहीं रह सकता, इसके बावजूद कुछ मंत्री न सिर्फ एसोसिएशन चुनाव में वोट डाल गए बल्कि इनकी ओर से प्रचार तक किया गया।
-राजीव शर्मा, नवनिर्वाचित अध्यक्ष दून बार एसोसिएशन
यह तो बार कौंसिल को देखना चाहिए था, हमें वस्तुस्थिति की पूरी जानकारी नहीं है, हमारे पास जो सत्यापन फार्म आए थे उसे बार कौंसिल को भेज दिया गया था, यह फार्म ठीक हैं भी या नहीं बार कौंसिल इसे देखे, यह बात सही है कि मंत्री का पद लाभ का पद है, लेकिन खुद कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं।
-मनमोहन कंडवाल, पूर्व अध्यक्ष दून बार एसोसिएशन
प्रैक्टिस दो तरह की होती है, एक कोर्ट में वकालतनामा लगाकर और दूसरा लोगों को सलाह देकर, मैं लोगों को सलाह देता हूं, यह बार कौंसिल को तय करना है कि कौन लोग बार एसोसिएशन के सदस्य होंगे या नहीं होंगे, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली सहित कई बड़े मंत्री प्रैक्टिस कर रहे हैं।
-दिनेश अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री
एडवोकेट एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि वकालत के अलावा किसी अन्य व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति बार कौंसिल में नहीं रह सकता, इसके बावजूद कुछ मंत्री न सिर्फ एसोसिएशन चुनाव में वोट डाल गए बल्कि इनकी ओर से प्रचार तक किया गया।
-राजीव शर्मा, नवनिर्वाचित अध्यक्ष दून बार एसोसिएशन
यह तो बार कौंसिल को देखना चाहिए था, हमें वस्तुस्थिति की पूरी जानकारी नहीं है, हमारे पास जो सत्यापन फार्म आए थे उसे बार कौंसिल को भेज दिया गया था, यह फार्म ठीक हैं भी या नहीं बार कौंसिल इसे देखे, यह बात सही है कि मंत्री का पद लाभ का पद है, लेकिन खुद कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं।
-मनमोहन कंडवाल, पूर्व अध्यक्ष दून बार एसोसिएशन
प्रैक्टिस दो तरह की होती है, एक कोर्ट में वकालतनामा लगाकर और दूसरा लोगों को सलाह देकर, मैं लोगों को सलाह देता हूं, यह बार कौंसिल को तय करना है कि कौन लोग बार एसोसिएशन के सदस्य होंगे या नहीं होंगे, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली सहित कई बड़े मंत्री प्रैक्टिस कर रहे हैं।
-दिनेश अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री