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पहाड़ में सूखे पेयजल स्रोत, गहराया संकट
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल
Updated Wed, 13 Apr 2016 01:46 PM IST
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गर्मी बढ़ते ही पहाड़ों में पेयजल और सिंचाई का संकट भी गहरा गया है। बारिश नहीं होने से पूरे पहाड़ में दर्जनों पेयजल स्रोत सूख गए हैं और तमाम स्रोत सूखने के कगार पर हैं। चमोली जिले में 78 गांव पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
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करीब 28 पेयजल स्रोत सूख गए हैं और 209 में से 198 पेयजल योजनाओं में पानी की मात्रा आधी हो गई है। टिहरी जिले की 65 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। उत्तरकाशी जिले में करीब 750 से अधिक पेयजल योजनाएं होने के बावजूद पेयजल संकट गहराने के आसार हैं। रुद्रप्रयाग जिले में 50 बड़े स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। पौड़ी जिले में स्रोत सूखने के साथ ही कई योजनाएं बूढ़ी हो चुकी हैं।
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उत्तरकाशी जिले में 750 योजनाएं, फिर भी संकट
उत्तरकाशी जिले की करीब साढ़े तीन लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए साढ़े सात सौ से अधिक पेयजल योजनाओं की मौजूदगी के बावजूद इस बार गर्मियों में पेयजल संकट गहराने के आसार हैं। सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जलस्रोत सूखने लगे हैं। गंभीर पेयजल संकट को भांपते हुए जल संस्थान ने दो दर्जन से ज्यादा गांवों में टैंकर और खच्चरों से पानी ढुलान की कार्ययोजना तैयार कर ली है।
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जिले में जल संस्थान की 373 पेयजल योजनाएं हैं। इनके अलावा 385 पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों की देखरेख में चल रही हैं। पेयजल निगम की ओर से बनाई गई कई पेयजल योजनाएं तकनीकी खामियों के चलते जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं हो पाई हैं।
यहां टैंकर और खच्चरों से होगा पानी ढुलान
बड़कोट नगर, मनेरा, जसपुर, तिलोथ, संग्राली, चिन्यालीसौड़, सूलीठांग, कफनौल, धारी, कलोगी, खमुंडी, किरूण, रनाड़ी, मुस्टिकसौड़ आदि गांवों में टैंकरों और बड़ाथा, सुकण, फुआणगांव, डरोगी, इंद्रा, टिपरी, रौंतल, दारगढ़, बैजकोट, पैणी भवान, धनेटी में खच्चरों से ढोया जाएगा पानी।
पानी नहीं होने से उजड़ा था बिल्ला गांव
उत्तरकाशी। नौगांव ब्लाक के बिल्ला गांव में भी 40 साल पहले पेयजल स्रोत सूखने पर ग्रामीणों ने यहां से पलायन कर लिया था। ग्रामीणों ने अपनी छानियों वाले मंजियाली तोक में पलायन किया था। अब मंजियाली बड़ा गांव बन चुका है और बिल्ला वीरान पड़ा है।
इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से पेयजल स्रोत सूखने के साथ ही भूजल स्तर भी गिर सकता है। शुरूआती गर्मी में ही कुछ गांवों से पानी की किल्लत की शिकायत आने लगी है। पेयजल समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है।
- विरेंद्र वर्मा, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान उत्तरकाशी
पानी भरने में बीत रही आधी रात
गंगा-जमुना जी का मुल्क मनखी-गोर प्यासा, कख लगाण छुई ये पहाड़ की.. गढ़वाली गीत की यह पंक्तियां रुद्रप्रयाग और यहां के गांवों की स्थिति को बयां कर रही है। यहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। तड़के से लेकर आधी रात स्रोतों पर पानी भरने में ही बीत रही है।
2 लाख 57 हजार की आबादी वाले रुद्रप्रयाग जिले में 40 फीसदी से अधिक आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। पांच माह में सामान्य से बहुत कम बारिश के कारण जिले में 50 बड़े स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे 150 से अधिक ग्राम पंचायतों के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
कई स्रोतों पर तो पानी की मात्रा 6 से 8 एलपीएम तक पहुंच गई है। रुद्रप्रयाग को जिस पुनाड़ गदेरे के स्रोत से पानी सप्लाई होती है, वहां तीन गुना से अधिक पानी कम हुआ है। नगर को 1800 एलपीएम पानी के सापेक्ष सिर्फ 450 एलपीएम पानी मिल रहा है।
अगस्त्यमुनि हो चाहे ऊखीमठ या फिर जखोली ब्लाक, यहां गाड़-गदेरे से लगे कई गांवों में भी पानी के लिए हाहाकार मचा है। जलसंस्थान की ओर से 29 गांवों के 70 तोक को गंभीर पेयजल संकट में चिह्नित किया गया है, जहां टैंकर से सप्लाई होनी है। वर्तमान में चार टैंकरों से प्रभावित 10 से अधिक गांवों को पानी पहुंचाया जा रहा है।
पानी नहीं होने से खाली हुआ गांव
जखोली ब्लाक के क्वीलाखाल गांव में पानी के लिए एक दशक में 90 परिवार पलायन कर चुके हैं। यहां रह रहे 35 परिवार आज भी पानी के लिए ढाई किमी दूर प्राकृतिक स्रोत पर निर्भर हैं।
ताले में कैद हैंडपंप
जखोली ब्लाक के रौंठिया गांव के 250 परिवार वर्षों से दो किमी दूर से पानी जुटा रहे हैं। गागड़ तोक में जलसंस्थान के हैंडपंप पर 20 परिवार निर्भर हैं। दिनभर हैंडपंप से पानी बर्बाद न हो, इसलिए ताला लगा दिया जाता है। यहां सरकारी योजना का निशान तक नहीं हैं।
अधर में लटकी योजनाएं
13 करोड़ खर्च के बाद भी जवाड़ी रौंठिया और 7 करोड़ रुपये में बन रही लस्तर-सुमाड़ी पेयजल योजनाएं एक दशक से निर्माण की बाट जो रही हैं। इन योजनाओं से 24 ग्राम पंचायतों के 50 से अधिक गांवों को लाभ मिलना है। 60 से अधिक गांवों के लिए बन रही तल्ला नागपुर योजना पर कछुवा गति से काम हो रहा है। जिले में जलनिगम की 35 योजनाएं लंबे समय से अटकी हैं।
चमोली जिले में सूखे 28 स्रोत
चमोली जिले में वर्तमान में 78 गांव पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यहां दशोली, घाट, पोखरी और जोशीमठ ब्लॉक के करीब 28 पेयजल स्रोत ऐसे हैं, जो सूख गए हैं। ऐसे में ग्रामीण गदेरों और कुएं के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। साथ ही जिले की 209 में से 198 पेयजल योजनाओं पर पानी की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में पचास फीसदी कमी आ गई है।
दशोली ब्लॉक के हरमनी, पलेठी, कनेरी और नरोधार गांव के प्राकृतिक पेयजल स्रोत सूख गए हैं। भीमतल्ला, पीपलकोटी, घिंघराण, गाड़ी, सोनला-बछेर, लासी, कुजौं-मैकोट, सरतोली, देवर, रांगतोली, मासौं, बैंडो, कम्यार, दुर्मी, कौंज, टंगसा, सिणजी और बमियाला गांवों में भी प्राकृतिक स्रोत सूखने के कगार पर हैं।
इन गांवों के लोग दूसरे गांवों से पेयजल आपूर्ति कर रहे हैं। पोखरी ब्लॉक में कोठगीड़, रानों, क्वींठी, सिनाऊं, खन्नी, रौता, नौली, विशाल, गुगली और आली-कांडई तथा घाट ब्लॉक में ग्राम पंचायत सेमा, नंदप्रयाग, प्राणमति, कुंडी, पगना और लुंतरा गांवों में भी पेयजल स्रोत सूख गए हैं, जिससे इन गांवों के लोग गदेरों का पानी पीने को मजबूर हैं।
योजनाओं की मरम्मत को नहीं मिला बजट
दशोली ब्लॉक में कांडा-कुणखेत पेयजल योजना वर्ष 2013 की आपदा के बाद से क्षतिग्रस्त पड़ी है। योजना की मरम्मत के लिए जल निगम को 6.55 लाख का बजट आज तक आवंटित नहीं किया गया है। देवर ग्राम समूह, दुर्मी, गडोरा, नौरी, भोंती, बेडुला, पिलंग, बैंडी, रूद्रनाथ, घाट, सैंती, फाली और मथकोट पेयजल योजनाएं भी वर्ष 2013 की आपदा के बाद से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
तीर्थयात्रियों को भी झेलनी होगी दिक्कत
बदरीनाथ यात्रा पड़ाव पीपलकोटी, चमोली, भीमतल्ला और छिनका में भी पेयजल किल्लत बनी है। चमोली में लोग अलकनंदा से पेयजल आपूर्ति कर रहे हैं। गडोरा पेयजल योजना से पानी की सप्लाई सुचारू नहीं होने से यात्रा पड़ाव पीपलकोटी में पेयजल टंकियां सूखी पड़ी हैं। जोशीमठ बाजार में भी पेयजल की किल्लत बनी हुई है।