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सरकारी स्कूलों में सूखे बच्चों के हलक

Tue, 07 Mar 2017 11:34 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल Updated Tue, 07 Mar 2017 11:34 AM IST
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drinking water shortage in uttarakhand government school
पानी - फोटो : getty

उत्तराखंड गठन के 16 सालों बाद भी राज्य के स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों में पानी की भी व्यवस्‍था नहीं कर पाया है। गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है और पांच पांच पर्वतीय जिलों के 451 स्कूलों में पानी की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है।

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उत्तरकाशी जिले में 140 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विभाग ने स्कूलों को पेयजल सुविधा से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। जिले में 1069 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
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इनमें 126 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि 124 माध्यमिक विद्यालयों में से 14 विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते छात्र दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभाग ने केंद्र सरकार को तीन करोड़ 62 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव काफी पहले भेज दिया था, लेकिन अभी तक विभाग को बजट उपलब्ध नहीं हो पाया। माध्यमिक स्तर पर भी विभाग ने करीब 47 लाख रुपये के बजट की डिमांड की है।

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रुद्रप्रयाग में 135 स्कूलों में नहीं पेयजल कनेक्शन

drinking water shortage in uttarakhand government school
पानी - फोटो : getty

रुद्रप्रयाग में 135 प्राथमिक और सात माध्यमिक स्कूल पेयजल कनेक्शन से वंचित हैं। विभाग ने इन स्कूलों को पानी देने के लिए जिला योजना के तहत प्रस्ताव तैयार किया है। जिले में 555 प्राथमिक और 108 माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन 135 स्कूलों को पेयजल सुविधा नसीब नहीं हो पाई है।

यहां पढ़ने वाले बच्चों को जहां स्वयं के प्रयास से अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। वहीं मध्याह्न भोजन बनाने के लिए दूरस्थ स्रोतों से पानी जुटाना पड़ रहा है। दूसरी तरफ 150 से अधिक प्राथमिक स्कूलों में कनेक्शन तो हैं, लेकिन अनियमित सप्लाई से पेयजल संकट बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी जखोली ब्लाक के सिलगढ़, भरदार, बड़मा व सौंराखाल और अगस्त्यमुनि के तल्ला नागपुर क्षेत्र के स्कूलों में है।

यहां हफ्ते में एक या दो दिन ही पानी मिल पा रहा है। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं घरों से पानी की बोतल साथ ला रहे हैं। जीआईसी तिमली-बड़मा सहित सात माध्यमिक स्कूलों में भी पेयजल कनेक्शन नहीं हैं। सर्व शिक्षा के सहायक अभियंता अजय शर्मा ने बताया कि जिला योजना में स्कूलों में पेयजल कनेक्शन लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 56 स्कूलों की स्वीकृति मिल चुकी है। नए शिक्षण सत्र में इन स्कूलों में पेयजल संयोजन लगा दिए जाएंगे। राज्य निर्माण के 16 वर्षों में भी शिक्षा विभाग प्राथमिक स्कूलों में जरूरी सुविधाएं नहीं जुटा पाया है। जबकि स्कूलों में मीड-डे-मील योजना संचालित की जा रही है। 

हैंडपंप से पानी ढो रहे बच्चे
विकासखंड खिर्सू की दिखोल्यू व कठूली ग्राम पंचायत के विद्यालयों में पेयजल समस्या बनी हुई है। यहां छात्रों को हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। ब्लाक खिर्सू में 69 प्राथमिक विद्यालय, 10 जूनियर हाईस्कूल व 19 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब चार हजार छात्र अध्ययनरत हैं। खंड शिक्षा अधिकारी एमएल आर्य ने बताया कि अधिकांश विद्यालयों में पेयजल कनेक्शन हैं। कठूली व दिखोल्यू ग्राम पंचायतों के विद्यालयों मेें पेयजल को लेकर कुछ समस्या है। यहां छात्रों को हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। जिला योजना के तहत पेजयल के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

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