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पैरोल पर बाहर आए पूर्व राज्यसभा सांसद डीपी यादव ने CBI कोर्ट में किया सरेंडर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:46 AM IST
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डीपी यादव
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पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल से पैरोल पर आए पूर्व राज्यसभा सांसद डीपी यादव ने सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
बुधवार को डीपी यादव ने देहरादून की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जिसके बाद उन्हें देहरादून जेल भेज दिया गया। यहां से डीपी यादव को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा।
28 फरवरी 2015 को देहरादून की सीबीआई कोर्ट से भाटी हत्याकांड में सजा सुनाए जाने के बाद से डीपी यादव दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
20 अगस्त 2017 को उनके पिता तेजपाल सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद डीपी यादव को 15 दिन की ही पैरोल मंजूर हुई थी।
पैरोल की अवधि पूरी होने से पूर्व ही डीपी यादव सीबीआइ कोर्ट पहुंच गए। जहां से डीपी यादव को अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। डीपी यादव को फिलहाल सुद्धोवाला जेल में रखा गया है।
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बुधवार को डीपी यादव ने देहरादून की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जिसके बाद उन्हें देहरादून जेल भेज दिया गया। यहां से डीपी यादव को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा।
28 फरवरी 2015 को देहरादून की सीबीआई कोर्ट से भाटी हत्याकांड में सजा सुनाए जाने के बाद से डीपी यादव दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
20 अगस्त 2017 को उनके पिता तेजपाल सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद डीपी यादव को 15 दिन की ही पैरोल मंजूर हुई थी।
पैरोल की अवधि पूरी होने से पूर्व ही डीपी यादव सीबीआइ कोर्ट पहुंच गए। जहां से डीपी यादव को अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। डीपी यादव को फिलहाल सुद्धोवाला जेल में रखा गया है।
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देहरादून की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई
तीन अन्य लोगों को भी उम्रकैद की भी सजा
बता दें कि अपने राजनीतिक गुरू और विधायक महेन्द्र सिंह भाटी की हत्या मामले में देहरादून की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी उम्रकैद की भी सजा सुनाई है।
13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद क्षेत्र के भंगेल रोड पर विधायक भाटी अपने समर्थकों के साथ बंद फाटक के खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान एक वाहन में सवार हथियारबंद बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
इसमें भाटी व उनके साथी उदय प्रकाश की मौत हो गई थी। कुछ अन्य घायल हुए थे। बाद में डीपी यादव व उनके साथियों का नाम सामने आया। पुलिस ने हत्या के दौरान प्रयोग की गई गाड़ी भी बरामद की थी।
अदालत ने इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी उम्रकैद की भी सजा सुनाई है।
13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद क्षेत्र के भंगेल रोड पर विधायक भाटी अपने समर्थकों के साथ बंद फाटक के खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान एक वाहन में सवार हथियारबंद बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
इसमें भाटी व उनके साथी उदय प्रकाश की मौत हो गई थी। कुछ अन्य घायल हुए थे। बाद में डीपी यादव व उनके साथियों का नाम सामने आया। पुलिस ने हत्या के दौरान प्रयोग की गई गाड़ी भी बरामद की थी।