उत्तराखंड को आपदा से बचाएगा यह खास रडार
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दून के मौसम का भरोसा नहीं... अचानक बारिश होते ही लोगों की जुबां पर यही शिकायत होती है। लेकिन, अब आपको घर से निकलने से पहले पता होगा कि बारिश होने वाली है। यह भी पता होगा कि किस समय, कहां और कितनी बारिश होगी, कहां किस रफ्तार से आंधी आने वाली है या फिर कहां बादल फटने वाला है।
यह मुमकिन होगा मसूरी और अल्मोड़ा में लगने जा रहे दो डॉप्टर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) की मदद से। इस तकनीक के जरिये संबंधित क्षेत्र के मौसम में होने वाले बदलाव का पता दो घंटे पहले ही चल जाएगा।
हर साल मौसम में होने वाले अप्रत्याशित बदलाव के कारण होने वाले नुकसान से बचने के लिए मौसम विभाग इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। विदेशों में यह तकनीक पहले से ही काम कर रही है।
देश में अब तक 14 शहरों में यह विशेष रडार लगाए जा चुके हैं। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक उत्तराखंड में हिमालयन इंटिग्रेटेड मेट्रोलॉजी प्रोजेक्ट के तहत मसूरी और अल्मोड़ा के दीनापानी में दो डीडब्ल्यूआर लगाने का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। इसके लिए निरीक्षण किया जा चुका है।
जानिए, कैसे काम करता है डॉप्लर वेदर रडार
यह विशेष प्रकार का रडार होता है जो कि डॉप्लर इफेक्ट पर काम करता है। डॉप्लर इफेक्ट से यह बारिश, आंधी, तूफान के आने की रफ्तार और उसके जाने की रफ्तार के हिसाब से यह बता देता है कि किस जगह पर आंधी, तूफान और बारिश का कितने बजे असर होगा।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यह 400 किलोमीटर रेडियस का पूरा डाटा काउंट कर सकता है। इस रडार के संचालन के लिए मौसम विभाग ने इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) साथ वर्ष 2008 में एमओयू साइन किया था।
अब तक यहां लगाए जा चुके हैं डॉप्लर रडार
अगरतला, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मोहनबाड़ी, मच्छीलीपत्तनम, मुंबई, नागपुर, पटियाला, पटना और विशाखापटनम।
उत्तराखंड को नुकसान से बचाएगा रडार
उत्तराखंड में हर साल बारिश और बर्फबारी से भारी नुकसान होता है। 2013 की केदारनाथ आपदा के जख्म अब भी ताजा हैं। ऐसे में अगर मौसम में होने वाले बदलाव का पता दो घंटे पहले भी चल गया तो निश्चित तौर पर नुकसान से बचा जा सकता है।
इससे यह भी पता चल जाएगा कि किस जगह पर प्रति घंटा कितनी बारिश हुई है। इसके अलावा उत्तराखंड में विषम परिस्थितियों में तैनात सेना और आईटीबीपी के लिए भी यह तकनीक काफी मददगार साबित होगी।
इनका है कहना
देशभर में डॉप्लर वेदर रडार लगाने का काम चल रहा है। उत्तराखंड में भी दो जगहों पर रडार के लिए निरीक्षण किया जा चुका है। जल्द ही इसे लगाने का काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद से निश्चित तौर पर मौसम की भविष्यवाणी में सुधार आएंगे।
-बिक्रम सिंह, निदेशक, राज्य मौसम विभाग