{"_id":"2f295e2e4e08d6d950936e3f354aec37","slug":"doonites-want-australian-khadi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बापू की देसी खादी पर भारी ऑस्ट्रेलियन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बापू की देसी खादी पर भारी ऑस्ट्रेलियन
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 04 Oct 2013 11:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इन दिनों देहरादून में बापू की देसी खादी पर ऑस्ट्रेलियन वैरायटी भारी पड़ रही है। खादी के सबसे अधिक ऊनी उत्पाद इसी वैरायटी की मांग में हैं।
विज्ञापन
रेट भी ज्यादा
राजस्थान, हल्द्वानी से पहुंचे कच्चे माल से तैयार होने वाली इस खादी के रेट भी दूसरी वैरायटी के मुकाबले कुछ ज्यादा हैं। दरअसल, यह खादी ऑस्ट्रेलियन नस्ल की भेड़ों के बालों से तैयार होती है, जो देसी भेड़ों के मुकाबले ज्यादा मुलायम रहती है। स्थानीय गांधी आश्रमों में सभी उत्पादों पर राष्ट्रपति महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर घोषित 40 फीसदी छूट के बाद ग्राहकों का रुझान और बढ़ा है।
विज्ञापन
रजाई, गद्दे को छोड़ दिया जाए तो लेडीज सूट, साड़ी, जैकेट के साथ ही कुर्ता पाजामा, कोट, शाल सभी की खासी मांग चल रही है। यह छूट 108 कार्य दिवसों तक जारी रहेगी।
विज्ञापन
गरीब-अमीर सबकी प्यारी खादी
खादी के उत्पाद गरीब, अमीर सबको भा रहे हैं। लेडीज सूट को ही लें तो 200 रुपए से शुरू कर 10 हजार रुपए तक के उत्पाद गांधी आश्रमों से मिल रहे हैं। कॉटन सूट जहां 400-500 में भी उपलब्ध है, वहीं खादी सिल्क की साड़ी डेढ़ हजार रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक में खरीदी जा सकती है। इसी तरह जैकेट, शाल और कोट भी 500 रुपए से लेकर तीन हजार रुपए तक की रेंज में उपलब्ध हैं।
तीन बजे बाद ट्रैफिक बंद होने से दिक्कत
पलटन बाजार में शाम तीन बजे के बाद ट्रैफिक का आवागमन बंद हो जाने से खादी आश्रम की बिक्री पर भी फर्क पड़ा है। यहां के कारिंदों के मुताबिक अकेले बुधवार को ही पलटन बाजार में आवागमन बंद होने से पहले तकरीबन सवा पांच लाख रुपए की बिक्री हो चुकी थी, जो इसके बाद गिर गई। दरअसल, इसकी वजह से खरीदारों को रजाई, गद्दे जैसी चीजें ले जाने में दिक्कत आ रही हैं।
फैब इंडिया में महुआ सिल्क की बहार
खादी के चाहने वाले कम नहीं, यह इसके उत्पादों से जुड़े फैब इंडिया की बिक्री से भी साबित होता है। सबसे ज्यादा डिमांड काटन, सिल्क की है। महुआ सिल्क इसमें भी अव्वल है। फैब इंडिया के सुबोध बताते हैं कि शर्ट, सूट, ट्यूनिक हर किसी उत्पाद की तरफ रुझान देखने को मिल रहा है।
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...