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भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री देगा दून विश्वविद्यालय
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भारतीय वन्यजीव संस्थान में वन्यजीवों व जैव विविधता समेत तमाम विषयों पर शोध करने वाले शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री के लिए दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों पर नहीं निर्भर रहना होगा। वन्यजीव संस्थान के शोधार्थियों को दून विश्वविद्यालय की ओर से शोध कराने के साथ ही पीएचडी की डिग्रियां दी जाएंगी। शोधार्थियों को शोध कराने के साथ ही डिग्री दी जा सके, इसे लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान और दून विश्वविद्यालय के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों संस्थानों की ओर से समझौते पर भारतीय वन्यजीव संस्थान रजिस्ट्रार डॉ मोनाली सेन और दून विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉक्टर एमएस मंदरवाल ने हस्ताक्षर किए।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ धनंजय मोहन ने बताया कि देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच समझौते के बाद जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में शोध करने के साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकेगा। अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में दोनों संस्थान एक दूसरे को सहयोग देंगे। समझौते के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान के नोडल अधिकारी डॉक्टर वीपी उनियाल, डॉ बिलाल हबीब व दून विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य प्रोफ़ेसर कुसुम अरुणाचलम, डॉ अरुण कुमार समेत कई उपस्थित थे।
अब नहीं होगी दिक्कत
अभी तक भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधार्थी सौराष्ट्र विश्वविद्यालय गुजरात समेत कई अन्य विश्वविद्यालयों में जाकर शोध करने के साथ ही पीएचडी की डिग्री हासिल करते थे। लेकिन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से गाइडलाइन में बदलाव किए जाने से संस्थान के शोधार्थियों को शोध करने में तमाम दिक्कतें आ रही थी। अब दून विश्वविद्यालय व भारतीय वन्यजीव संस्थान के बीच समझौता के बाद उन्हें न केवल शोध में आसानी होगी बल्कि डिग्री हासिल करने में भी दिक्कत नहीं होगी।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ धनंजय मोहन ने बताया कि देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच समझौते के बाद जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में शोध करने के साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकेगा। अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में दोनों संस्थान एक दूसरे को सहयोग देंगे। समझौते के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान के नोडल अधिकारी डॉक्टर वीपी उनियाल, डॉ बिलाल हबीब व दून विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य प्रोफ़ेसर कुसुम अरुणाचलम, डॉ अरुण कुमार समेत कई उपस्थित थे।
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अब नहीं होगी दिक्कत
अभी तक भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधार्थी सौराष्ट्र विश्वविद्यालय गुजरात समेत कई अन्य विश्वविद्यालयों में जाकर शोध करने के साथ ही पीएचडी की डिग्री हासिल करते थे। लेकिन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से गाइडलाइन में बदलाव किए जाने से संस्थान के शोधार्थियों को शोध करने में तमाम दिक्कतें आ रही थी। अब दून विश्वविद्यालय व भारतीय वन्यजीव संस्थान के बीच समझौता के बाद उन्हें न केवल शोध में आसानी होगी बल्कि डिग्री हासिल करने में भी दिक्कत नहीं होगी।
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