EXCLUSIVE: दांव पर जान; खांसी-जुकाम पीड़ित बच्चे को दे दी पेट के कीड़े मारने की दवाई, बढ़ सकती है परेशानी
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही मरीजों की जान खतरे डाल रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट चिकित्सकों की लिखीं दवाईयां समझ में न आने की स्थिति में मरीजों को अपनी मर्जी मुताबिक ही दवाईयां दे रहे हैं।
विस्तार
दून अस्पताल में उपचार के लिए आए खांसी-जुकाम पीड़ित बच्चे को फार्मेसी से पेट के कीड़े मारने की दवाई दे दी गई। यह बात तब खुल गई जब तीमारदार दोबारा चिकित्सक को दवाईयां दिखाने पहुंचे। यह पहली घटना नहीं है, अस्पताल के अलग-अलग विभागों में हर रोज पांच से छह मरीज गलत दवाईयां देने की शिकायत करने आते हैं। चिकित्सक के अनुसार गलत दवाईयों का सेवन मरीजों के लिए जानलेवा हो सकता है।
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही मरीजों की जान खतरे डाल रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट चिकित्सकों की लिखीं दवाईयां समझ में न आने की स्थिति में मरीजों को अपनी मर्जी मुताबिक ही दवाईयां दे रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि हर रोज करीब दो बच्चों को भी गलत दवाईयां दी जा रहीं हैं। शनिवार को एक तीमारदार अपने बच्चे को लेकर बाल रोग विभाग की ओपीडी में आए थे। बच्चे को खांसी-जुकाम की शिकायत थी।
चिकित्सक की ओर से इसके लिए एमोक्सिसिलिन नाम की एंटीबायोटिक दवाई लिखी गई थी। तीमारदार जब नीचे दवाईयां लेने पहुंचे तो फार्मासिस्ट ने इसे एल्बेंडाजोल समझ लिया। फार्मासिस्ट ने मरीज को पेट के कीड़े मारने के लिए खाई जाने वाली एल्बेंडाजोल दवाई दे दी। गनीमत रही कि तीमारदार दवाईयाें को दिखाने के लिए वापस चिकित्सक को दिखाने पहुंच गए। चिकित्सक ने जब गलत दवाई देखी तो उनके भी होस उड़ गए। इसके बाद काउंसलर ने संबंधित फार्मासिस्ट को कॉल कर फटकार लगाई।
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केस-1
बाल रोग विभाग में पेट दर्द की शिकायत लेकर एक मरीज आया था। चिकित्सक ने एक मरीज को पेट दर्द की एंटीबायोटिक दवाई लिखी थी। तीमारदार जब फार्मेसी में दवाईयां लेने गए तो उनको एंट-डायबिटिक ड्रग दे दिया गया। जब वे चिकित्सक को दिखाने आए तो बात खुली।
केस-2
बाल रोग विभाग के चिकित्सक ने एक मरीज को आयरन-फॉलिक एसिड लिखी थी। तीमारदार जब दवाईयां लेने के लिए अस्पताल की डिस्पेंसरी में पहुंचे तो उनको मल्टी विटामिन दवाई दे दी। चिकित्सक ने जब फार्मासिस्ट से बात की तो उसने दोनों दवाईयों को एक समान होने की बात कही।
केस-3
एक मरीज को दस्त की शिकायत थी। चिकित्सक ने उसे एल्बेंडाजोल सिरप लिखा था। लेकिन फार्मासिस्ट ने उसे एल्बेंडाजोल टेबलेट दे दिया। एक दूसरे मामले में फार्मासिस्ट ने ओआरएस जिंक के साथ फार्मासिस्ट ने अपनी मर्जी से प्रो-बायोटिक दवाई दे दी थी।
पिछले कुछ दिनों में इसकी कई शिकायतें आईं हैं। इससे पहले भी फार्मेसी संवर्ग के अधिकारियों को इस तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में भी जानकारी तलब की गई है। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल
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