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कुछ ऐसा था दून एक्सप्रेस में हुए हादसे का मंजर

Wed, 30 Apr 2014 11:48 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 30 Apr 2014 11:48 AM IST
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doon express accident

अंबेडकरनगर (यूपी) के जाफरगंज में पटरी से उतरी दून एक्सप्रेस के यात्री मंगलवार को देहरादून पहुंचे तो चेहरे पर हादसे का खौफ साफ नजर आया।

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जिसे जहां जगह मिली, ट्रेन से कूद गया
यात्रियों ने बताया कि अचानक जोरदार झटके से ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए। मुसाफिरों में चीख-पुकार के बीच भगदड़ मच गई। जिसको जहां से जगह मिली, ट्रेन से कूद गया।
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यूं लगा, जैसे सामने मौत नाच रही हो। किसी ने आग लगने की अफवाह फैला दी, तो निकलने की अफरातफरी में कई घायल हो गए। दूसरे डिब्बों में बैठे यात्री भी भगदड़ में जख्मी हुए। शुक्र है कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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ट्रेन के पहुंचने के इंतजार में थे लोग
सुबह सात बजे पहुंचने वाली दून एक्सप्रेस मंगलवार को दोपहर एक बजे आई। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन रात करीब दस बजे वहां से रवाना की गई।

इससे पहले ट्रेन में दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों की जगह दूसरे डिब्बे जोड़े गए। हादसे की सूचना मिलने से घबराए यात्रियों के परिचित भी सुबह दस बजे से स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने का इंतजार करते नजर आए।

‘आजमगढ़ से ट्रेन में बैठे थे। जोर की आवाज के साथ नौ-दस डिब्बे पटरी से उतर गए। पहुंची पुलिस और मेडिकल स्टाफ ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। आग की अफवाह से भगदड़ भी मची।’
- सुरेश पांडे, रेसकोर्स

‘मऊ से देहरादून के लिए सवार हुआ। आराम से बैठे थे कि तभी ट्रेन में चीख पुकार मचने लगी। यात्री बचाव के लिए ट्रेन से कूदने लगे।’
- अरुण कुमार, पांवटा साहिब

‘ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरने पर ट्रेन में सवार हमारे दोनों बच्चों को भी चोट आईं। बच्चों में अब भी दहशत है।’
-अंजू गुप्ता, आईएमए

‘बनारस से आ रहे थे। डिब्बे पटरी से उतरते ही अफरातफरी मच गई। बीस से अधिक लोग घायल हुए होंगे।’
- रितिका, रेसकोर्स

दून में जांची गई बोगियां
ट्रेन के दून पहुंचने पर स्टेशन अधिकारियों ने सभी डिब्बों की तकनीकी जांच की। उप स्टेशन अधीक्षक ओपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने कुछ यात्रियों से घटना के बारे में जानकारी ली।


हेल्पलाइन दी, एटेंडेंट नहीं
हादसे के बावजूद रेलवे की लापरवाही जारी रही। रेलवे ने हादसे की जानकारी के लिए तीन हेल्प लाइन नंबर जारी तो कर दिए, लेकिन मंगलवार सुबह एक नंबर मिलाने पर रांग नंबर का जवाब मिला।

वहीं, बाकी दो नंबरों पर कॉल रिसीव नहीं हो रही थी। सुबह साढ़े दस बजे रेलवे अफसरों ने जाकर देखा तो पता लगा कि हेल्प लाइन पर फोन रिसीव करने के लिए कर्मचारी ही नहीं था।

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