पहाड़ों से लेकर मैदान तक खतरे में नौनिहाल
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उत्तराखंड में इस समय पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक के सरकारी अस्पतालों में बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। कई जगहों पर दशकों से डॉक्टर नहीं तो कहीं लंबी छुट्टियों पर हैं।
प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण में 17 सालों से कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। देहरादून के महिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ 15 दिनों की छुट्टी पर हैं। हरिद्वार के जिला अस्पताल की डॉक्टर चार माह की छुट्टी पर हैं।
पौड़ी के ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिले में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ के पद भी स्वीकृत हैं। थराली में आज तक बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है जबकि यहां 11 साल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुला था।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्णप्रयाग में 2012 से बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। रुद्रप्रयाग को 17 वर्षों बाद इसी नवंबर में बाल रोग विशेषज्ञ मिला है लेकिन वे अभी अवकाश पर हैं। नई टिहरी के जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ ने ज्वाइन तो कर लिया है पर वे आठ दिसंबर से आएंगे।
हरिद्वार में चार महीने की छुट्टी पर डॉक्टर
हरिद्वार जिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति पाठक चार महीने के लिए अवकाश पर हैं। मंगलवार को मेला अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर संदीप निगम भी अवकाश पर रहे।
जांच के लिए 50 बच्चे डॉक्टर का दोपहर तक इंतजार करते रहे, बाद में निराश होकर लौट गए। डॉक्टर के छुट्टी पर होने की कोई सूचना भी चस्पा नहीं की गई थी।
बच्चों को लेकर पहुंचे माता-पिता अस्पताल की अव्यवस्था को कोसते नजर आए। यहां की मशीन खराब पड़ी है जिससे गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहा है।
देहरादून: 16 के बाद आएंगी डॉक्टर
दून महिला अस्पताल की ओपीडी देखने वाली एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तृप्ति बहुगुणा ने दो से 16 दिसंबर तक की छुट्टी ली है। कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से यहां ओपीडी और प्रसव का काम प्रभावित हो रहा है।
ओपीडी में रोजाना करीब 50-60 बच्चे आते हैं। प्रसव के दौरान भी ओपीडी में तैनात डॉक्टर को बुलाया जाता है। बीते दो दिनों में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड भी नहीं हुए। महिला अस्पताल में एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट तीन दिन की छुट्टी पर गए थे। जिससे महिलाओं को बैरंग लौटना पड़ा।