श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर व दो सीनियर छात्र तीन महीने के लिए निलंबित, ये है पूरा मामला
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्र के प्रकरण में संस्थान ने एक जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर और दो छात्र-छात्राओं को तीन माह के लिए निलंबित कर दिया है। एक अन्य छात्र को 15 दिन के लिए निलंबित किया गया है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से गठित कमेटी ने रविवार दिन भर पीड़ित छात्र सहित अन्य छात्रों और आरोपियों से पूछताछ की। प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि कॉलेज के जेआर (जूनियर रेजीडेंट) डा. प्रद्युम्न चौहान ने स्वीकारा कि फाइल न बनाने पर एक छात्र से उनकी बहस हुई थी। प्राचार्य के मुताबिक चौहान के बोलने पर वर्ष 2017 बैच का एक छात्र जूनियर छात्रों से फाइलें तैयार करवाता है। इसी छात्र ने वर्ष 2016 बैच की एक छात्रा की फाइल बनाने का काम जूनियर छात्र को दिया था।
जूनियर छात्र को परेशान करने के मामले में जूनियर डाक्टर समेत तीनों को कालेज से तीन माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। डा. चौहान बेस अस्पताल में संविदा पर जेआर नियुक्त है। इसके अलावा वर्ष 2014 बैच के एक अन्य छात्र, जिसको पीड़ित छात्र ने घटनास्थल पर मौजूद होना बताया है, उसे भी 15 दिन के लिए निलंबित किया गया है। प्रो. रावत ने बताया कि सुभारती मेडिकल कॉलेज से आए छात्रों ने भी सीनियर छात्रों पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया था। इसमें एक छात्र की पहचान हुई है, जो निलंबित हुए छात्रों में शामिल है।
क्या है मामला
शनिवार शाम को मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जानकारी में आया कि एमबीबीएस बैच 2019 के छात्रों ने रैगिंग की शिकायत की है। कॉलेज प्रशासन द्वारा संबंधित छात्रों को बुलाकर बात की गई तो छात्रों ने बताया कि कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल के एक जूनियर डॉक्टर (जूनियर रेजीडेंट) ने प्रथम वर्ष के एक छात्र को एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की एक छात्रा की फाइल बनाने के लिए दी थी। छात्र ने एक फाइल तो बना दी। दूसरी फाइल बनाने के लिए उसने अपने एक साथी से कहा तो उसने साफ इंकार कर दिया। इसी बात पर शुक्रवार रात 12 बजे जेआर और जूनियर छात्रों का विवाद हो गया।
खुलकर सामने नहीं आ रहे जूनियर छात्र
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्रों के हाव भाव बताते हैं कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रथम वर्ष के कक्षा प्रतिनिधि आशुतोष मिश्रा और अक्षित भंडारी ने बताया कि फाइल बनाने को लेकर यह छोटा सा विवाद था। एक सहपाठी को फाइल बनाने को दी गई थी, लेकिन उसने मना कर दिया था, जिस पर विवाद हुआ था। आपस में बैठकर मामला सुलझा लिया गया था, लेकिन यह मामले के तूल पकड़ने से अन्य छात्र डर गए। इनमें से कुछ ने हमारी ओर से शिकायत कर दी। कॉलेज के प्राचार्य भी इसे फाइल बनाने का सामान्य मामला बता रहे हैं। उनका कहना है कि अकसर सीनियर छात्र जूनियर छात्र को फाइल बनाने को दे देते हैं।
वीडियो को रही जांच
कॉलेज प्रशासन को एक वीडियो मैसेज मिला है, जिसमें कुछ छात्रों के चिल्लाने और गाली-गलौच की आवाज आ रही है। प्राचार्य का कहना है कि इस बात की जांच की जा रही है कि यह वीडियो नया है या पुराना।