अनियमित मासिक धर्म को हल्के में न लें, भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई महिलाएं अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं। जिसके बाद में उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए महिलाओं व लड़कियों को चाहिए कि मासिक धर्म शुरू होने पर अपने स्वास्थ्य पर खास ध्यान दें। अनियमित मासिक धर्म उनके लिए खतरे की घंटी हो सकती है।
धर्मपुर स्थित होम्योपैथी क्लीनिक के फिजिशियन डॉ. विनीत काला बताते हैं कि महिलाओं के चेहरे पर बाल उग आना, बार-बार मुहासे होना, अनियमित रूप से मासिक धर्म का होना और गर्भधारण में मुश्किल होना महिलाओं के लिए खतरे की घंटी है। चिकित्सकीय भाषा में महिलाओं की इस समस्या को पोलीसिस्टिक ओवरी डिजीज यानी पीसीओडी के नाम से जाना जाता है।
समय रहते चिकित्सीय जांच करानी चाहिए
इस समस्या के होेने पर महिलाओं, खासकर अविवाहित लड़कियों को समय रहते चिकित्सीय जांच करानी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर महिलाओं की ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही आगे चल कर उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और हृदय से जुड़े रोगों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि आज करीब 30 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त हैं।
डॉ. काला ने बताया कि पीसीओडी बीमारी एक हार्मोनल डिसऑर्डर है। मासिक धर्म के पहले और बाद में महिलाओं के शरीर में बहुत तेजी से हार्मोन में बदलाव आते हैं जो कई बार इस बीमारी का रूप ले लेते है। कुछ महिलाओं जिन्हें पीसीओडी की समस्या है, उनका मासिक धर्म नहीं आता। इससे महिला की ओवरी में सिस्ट बनती चली जाती है। कई बार अल्ट्रासाउंड कराने पर भी ये सिस्ट दिखाई नहीं देती हैं। लाइफ स्टाइल में बदलाव, आनुवंशिकी व जेनेटिक फैक्टर भी इस बीमारी की वजह है।
क्या हैं सिस्ट के लक्षण
- युवतियों के शरीर पर पुरुषों की तरह बाल उगने लगते हैं।
- एंड्रोजन की अधिकता के कारण शरीर की शुगर इस्तेमाल करने की क्षमता भी दिन-प्रतिदिन कम होती जाती है। जिससे शुगर का स्तर भी बढ़ता चला जाता है।
- महिलाओं में इस्ट्रोजन अधिक मात्रा में बनता है तो ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन भी ज्यादा बनता है। जिस की वजह से मासिक धर्म में अनियमितता पाई जाती है।
- अगर गर्भाशय में इस्ट्रोजन बहुत दिन तक काम करता है, तो महिलाओं को यूटेराइन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
- अगर किसी महिला में पीसीओडी के लक्षण हैं तो उसे इस बीमारी की जांच के लिए पैल्विक अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए। इस के अलावा हार्मोनल और लिपिड टेस्ट होते हैं।
- जिन महिलाओं में यह बीमरी होती है, उन्हें गर्भधारण के दौरान ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। क्योंकि इन महिलाओं में गर्भपात की आशंका बहुत ज्यादा बनी रहती है।
- इस से पीड़ित महिलाओं को दिन में एक बार में ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए। इसके बजाय उन्हें बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाना चाहिए।