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राजधानी में आग के साधन ज्यादा, पानी के कम

Mon, 09 Nov 2015 12:58 PM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, देहरादून
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 09 Nov 2015 12:58 PM IST
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diwali preparation in dehradun.

देहरादून पलटन बाजार में दो दिन पहले एक दुकान में लगी आग ने सुरक्षा के इंतजाम की पोल खोल दी।

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ऐसे में यदि दीपावली के अवसर पर कहीं आग लगती है तो बड़ा हादसा हो सकता है। दिवाली पर शहर वैसे भी बारूद की ढेर पर होता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस मौके पर पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए 691 लोगों ने आवेदन किए हैं।

इसके अलावा अवैध तरीके से बहुत सी पटाखे की दुकानें सज जाती हैं। जबकि आग बुझाने के लिए पानी के साधन के तौर पर काम आने वाले अधिकतर हाईड्रेंट खराब पड़े हैं। पटाखों की बिक्री के लाइसेंस के लिए दो नवंबर से आवेदन की प्रक्रिया चल रही थी। आवेदन के लिए सात नवंबर अंतिम तिथि तय थी।
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प्रशासन को शनिवार की शाम तक पटाखों की बिक्री के लिए 691 आवेदन प्राप्त हुए। आवेदन पत्रों की जांच के बाद आवेदकों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे। जिन लोगों को लाइसेंस मिलेंगे वह नौ नवंबर से 13 नवबंर तक ही पटाखे बेच पाएंगे।
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शहर में इतनी बड़ी संख्या में पटाखा बिक्री के लिए होने वाले आवेदनों से पता चलता है कि गली-गली में बारूद का ढेर लगेगा। वहीं, लाइसेंस भले ही अभी तक जारी नहीं हुए हैं लेकिन शहर में हजारों स्थानों पर पटाखों की बिक्री शुरू भी हो गई है। आग के लिहाज से दिवाली का समय सबसे संवेदनशील होता है।

दिवाली आते ही आग बुझाने के लिए पानी का साधन बनने वाले फायर हाईड्रेंट की तलाश हुई तो पता चला कि 68 में से 55 हाईड्रेंट किसी काम के ही नहीं हैं। इनमें से कुछ खराब हो चुके हैं तो कई का सड़क के नीचे दबकर अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ऐसे में आगजनी की कोई घटना होने पर अग्निशमन विभाग को ओवरहेड टैंक पर ही निर्भर रहना होगा।

दिवाली की भीड़ में पानी तक पहुंचना मुश्किल
दिवाली की भीड़ में ओवरहेड टैंक तक पहुंचना मुश्किल होता है। भीड़ और अतिक्रमण के चलते एक बार पानी खत्म होने पर दोबारा लाने में काफी समय लग जाता है। अगर सभी फायर हाईड्रेंट सही स्थिति में हों तो अग्निशन विभाग की गाड़ियों को पास से ही शीघ्र पानी उपलब्ध हो सकता है। इससे समय और हानि दोनों कम हो सकते हैं।

अधिकतर हाईड्रेंट सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ गए हैं। सड़कों के नीचे दबने से उनका अता-पता नहीं रहा। पुरानी लाइनों में पानी भी नहीं है। जरूरत पड़ने पर ओवरहेड टैंक से पानी लिया जाता है। त्योहार के समय पानी से ज्यादा सड़कों पर अतिक्रमण से दिक्कत होती है।

- शिवप्रसाद ममगई, अग्निशमन अधिकारी देहरादून

प्रशासन की ओर से दिवाली को लेकर बुलाई गई बैठक में अधिकतर हाईड्रेंट खराब होने का मामला उठा था। इसमें अग्निशमन विभाग केअधिकारियों और संबंधित एसडीएम को कहा गया कि आग लगने जैसी घटना होने पर पानी कहां से मिलेगा, इसकी व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर ली जाए। हाईड्रेंट और ओवरहेड टैंक को चेक करने केनिर्देश दिए गए हैं।
- झरना कमठान, अपर जिलाधिकारी

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