लॉकडाउन में भी दिव्यांग जितेंद्र ने नहीं मानी हार, उत्तराखंड की राज्यपाल ने किया सम्मानित

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Jun 2020 04:57 PM IST
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राज्यपाल बनने के पहले वर्ष  2018 में जितेंद्र को एक ट्राई साइकल भेंट की थी।
राज्यपाल बनने के पहले वर्ष  2018 में जितेंद्र को एक ट्राई साइकल भेंट की थी। - फोटो : File Photo

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कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते आगरा के दिव्यांग ने हार नहीं मानी और लॉकडाउन खत्म होने के बाद उसने फिर से ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। उसके धैर्य और साहस से खुश होकर आगरा प्रवास पर पहुंची उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने जितेंद्र को सम्मानित किया।
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देवरी रोड आगरा के निवासी जितेंद्र कुमार एक दुर्घटना में दोनों पैर खो चुके हैं। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने वर्ष 2018 में जितेंद्र को एक ट्राई साइकल भेंट की थी। कुछ माह बाद राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के प्रयासों से जितेंद्र को कृत्रिम पैर भी मिल गए।
अपनी दिव्यंगता से हार न मानते हुए जितेंद्र ने एक नया जीवन प्रारम्भ किया और ई-रिक्शा के माध्यम से अपना रोज़गार शुरू किया। लॉकडाउन में भी जितेंद्र ने हार नहीं मानी। लॉकडाउन के उपरांत जितेंद्र ने फिर से ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया है। अपने आगरा प्रवास पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने जितेंद्र की कुशल क्षेम पूछी और उनको सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि क़ोरोना महामारी के दौर में जब समाज का हर वर्ग परेशान है, ऐसे में दिव्यांगों के समक्ष भी चुनौतियां है। जितेंद्र ने अपने साहस और धैर्य से यह दिखा दिया है कि दिव्यांग भी किसी से कम नहीं हैं , बस उन्हें सही समय पर सही मदद मिल जाए। दिव्यांग भी आत्मनिर्भर हो सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांगता शारीरिक अथवा मानसिक हो सकती है, किन्तु सबसे बड़ी दिव्यांगता समाज की उस सोच में होती है जो दिव्यांग जनों के प्रति हीन भाव रखती है।

उन्होंने कहा कि अब दिव्यांगों के प्रति अपनी सोच बदलने का समय आ गया है। दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में तभी शामिल किया जा सकता है, जब समाज इन्हें अपना हिस्सा समझे। दिव्यांग को किसी बहुत बड़ी मदद की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि थोड़ी मदद और प्रोत्साहन से वो अपना मार्ग खुद बनाने में सक्षम हैं।

हाल के वर्षों में दिव्यांगों के कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई योजना लागू की हैं। शीघ्र ही वे उत्तराखंड में दिव्यांग और अशक्तजनों के कल्याण और पुनर्वास की योजनाओं की भी समीक्षा करेंगी।
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