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दून में ढूंढते रह जाओगे किराये की सवारी

Wed, 26 Nov 2014 12:35 PM IST
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 26 Nov 2014 12:35 PM IST
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divisional transport department.

देहरादून में आठ हजार वाणिज्य वाहन बुधवार से सड़कों पर खड़े होने शुरू हो जाएंगे।

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लॉग बुक जमा न कराने पर संभागीय परिवहन विभाग ने इन वाहनों को एनओसी देने और टैक्स जमा करने पर रोक लगा दी है। आदेश जारी होते ही वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है। अब वाहन संचालकों को जुर्माना भरने पर ही राहत मिल पाएगी।

आम लोगों को झेलनी पड़ेगी परेशानी
बड़ी संख्या में टैक्सियों का संचालन बंद होने से आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। खासकर दिसंबर आखिरी सप्ताह में विवाह के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। ऐसे में दुल्हा-दुल्हन के लिए किराये की सवारी चाहिए तो मशक्कत करनी पड़ सकती है।
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साथ ही टूरिस्टों को भी भारी दिक्कत होगी। इस नियम की चपेट में सबसे ज्यादा टाटा सूमो, इनोवा, टवेरा, मिनी बसों और ट्रेवेल एजेंसियों की बसें आ रही हैं। सिटी बस और विक्रम इस दायरे में नहीं आएंगे।
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यह है नियम
दिल्ली में हुए गैंग रेप के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने वाहनों में सुरक्षा के मद्देनजर कड़े नियम बनाए थे। प्रदेश में ठेका परमिट पर चलने वाले वाहन, जिनकी क्षमता चालक समेत छह से ज्यादा है, वह उत्तराखंड मोटर यान नियमावली 2011 के नियम 71 के तहत आते हैं।

इन वाहनों में लॉग बुक रखना अनिवार्य है और इसे हर तीन माह में संभागीय परिवहन विभाग में जमा करना होता है। इस किताब में हर ट्रिप का ब्योरा दर्ज करा जरूरी है। मसलन यात्रियों का नाम-पता, कहां से बैठे कहां तक गए आदि। लेकिन, वाहन संचालकों ने इस नियम का पालन नहीं किया।

अब क्या होगा
शासन के निर्देश पर आरटीओ ने नियम का उल्लंघन करने वाले आठ हजार वाहनों की सूची तैयार की है। अब इन वाहनों का परमिट रिन्यू नहीं हो पाएगा।

साथ ही न ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी और न टैक्स जमा हो पाएगा। आदेश जारी होने के बाद काउंटर पर ऐसे वाहन संचालकों के काम पर रोक लगा दी गई। जिसके बाद वाहन धड़ाधड़ खड़े होने लगे।  


भरेगा सरकारी खजाना
लॉग बुक जमा न करने वाले वाहनों को हर तीन महीने के लिए पांच सौ रुपए जुर्माना देना पड़ेगा। यानी साल में दो हजार रुपए। नियम के अनुसार यह जुर्माना वाहन खरीदने की तारीख से देना होगा। अनुमान के मुताबिक इन वाहनों पर जुर्माने की राशि करीब पांच करोड़ रुपए बैठ रही है।

जब तक जुर्माना नहीं भरा जाएगा, इन वाहनों का कोई काम नहीं होगा। और अगर कोई भी काम हुए बिना यह वाहन सड़कों पर दौड़े तो इन्हें सीज कर दिया जाएगा।
- दिनेश चंद्र पठोई, संभागीय परिवहन अधिकारी

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