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न्याय का दरवाजा ‘बंद’, मिल रही तो बस मायूसी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 30 Dec 2013 12:14 PM IST
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मनमानी कंपनियों से परेशान देहरादून के उपभोक्ता न्याय की आस में जिस दर पर दस्तक देते हैं वह बंद पड़ा है।
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न्याय के बजाय मायूसी मिल रही
यह दरवाजा है जिला उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय का। सदस्यों की नियुक्ति न होने से पिछले सात महीने से इस न्यायालय से उपभोक्ताओं को न्याय के बजाय मायूसी मिल रही है। लंबित मामलों की संख्या 850 का आंकड़ा पार कर चुकी है।
जबकि इससे पूर्व न्यायालय में हर महीने औसतन 40 मामले निस्तारित होते थे। जून महीने में जिला उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय के तत्कालीन अध्यक्ष आरआर अग्रवाल का स्वास्थ्य खराब होने से मामलों की सुनवाई नहीं हो पाई।
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उस दौरान डीएन टोडरिया फोरम में एक मात्र सदस्य थे, लेकिन अध्यक्ष की गैर मौजूदगी के चलते मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही थी। अब फोरम में नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व जिला जज बलवीर सिंह ने कार्यभार ग्रहण किया तो फोरम के सदस्य टीएन टोडरिया रिटायर्ड हो चुके हैं।
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जबकि फोरम में महिला सदस्य का पद भी वर्षों से खाली है। हाल यह है कि फोरम में अब अध्यक्ष है, लेकिन सदस्य एक नहीं।
बीमा, मोबाइल कंपनियों के ज्यादा मामले
जिला उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय में लंबित मामलों में सबसे अधिक बीमा और मोबाइल कंपनियों से संबंधित हैं। इन मामलों का कई महीनों से निस्तारण न हो पाने से उपभोक्ताओं के साथ अधिवक्ता भी परेशान हैं।
सरकार को जनता की परवाह नहीं है। सरकार खुद में उलझी हुई है, सुचारु रूप से मामलों में सुनवाई हो इसके लिए जल्द से जल्द फोरम में सदस्यों की नियुक्ति की जाए।
- रघुवीर सिंह कठैत, सचिव बार एसोसिएशन देहरादून
फोरम में केवल तारीख पर तारीख लग रही है, मामलों के निस्तारण के लिए वादकारी हमारे और हम फोरम के चक्कर काट रहे हैं।
- सुयश कुकरेती, अधिवक्ता