वित्त आयोग की बैठक से पहले मेयर का हंगामा, छोड़ी बैठक
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राज्य वित्त आयोग की सुनवाई बैठक के शुरू होने से पहले ही मेयर विनोद चमोली ने कार्यक्रम स्थल में जबरदस्त हंगामा किया। कुर्सी व स्थान को लेकर उन्होंने अधिकारियों, कार्मिकों को खूब खरीखोटी सुनाई और जिला पंचायतराज अधिकारी एमएम खान को कथित तौर पर थप्पड़ मारने की धमकी दी।
मेयर बैठक में शामिल हुए बगैर ही कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले गए। नगर निगम का कोई अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुआ। इसको आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है।
राज्य वित्त आयोग की बैठक शुरू होने से पहले ही जबरदस्त हंगामा हो गया। शुक्रवार को नगर निकायों के प्रतिनिधियों, अधिकारियों को अपनी बात (मुख्य रूप से मांगें) वित्त आयोग के अध्यक्ष बीके जोशी, सदस्य अविकल थपलियाल और सीएमएस बिष्ट के सामने रखनी थी।
विकास भवन के सभागार में आयोजित बैठक में 11 बजे तक नगर निगम का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो अध्यक्ष समेत दोनों सदस्य बगल के कमरे में बैठ गए। इस दौरान मेयर विनोद चमोली कक्ष में पहुंच गए।
भरी मीटिंग में डीपीआरओ को थप्पड़ मारने की धमकी
जैसे ही मेयर आयोग के अध्यक्ष और फिर सदस्यों की तय कुर्सी में बैठने लगे। इस पर जिला पंचायतराज अधिकारी एमएम खान ने उन्हें दूसरी कुर्सी में बैठने का आग्रह किया। इस पर मेयर तमतमा गए। उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों को खूब खरीखोटी सुनाई। खान को जमकर फटकारा।
मेयर वापस जाने लगे तो डीपीआरओ एमएम खान ने उनसे रुकने का आग्रह किया। इस पर मेयर आगबबूला हो गए और उन्होंने डीपीआरओ खान को कथित तौर पर थप्पड़ मारने की धमकी दी और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इस पर ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। मेयर के साथ कई पार्षद भी थे।
बोले डीपीआरओ
मेयर विनोद चमोली सभागार में वित्त आयोग के अध्यक्ष की बगल की कुर्सी में बैठना चाह रहे थे। वह कुर्सी सदस्यों की थी। मैंने उनसे साथ वाली कुर्सी में बैठने का निवेदन किया। इस पर वे बुरी तरह गुस्सा हो गए। उन्होंने मेरे समेत अधिकारियों व कार्मिकों को भला बुरा कहा। फिर भी मैं विनम्र बना रहा। जब वे कार्यक्रम स्थल छोड़कर जाने लगे तो मेजबान होने के नाते मैंने उनसे कई बार रुकने की करबद्ध प्रार्थना की। इस पर उन्होंने मुझे थप्पड़ मारने की धमकी दी। हालांकि उन्होंने शरीर पर हमला नहीं किया। लेकिन थप्पड़ मारने की धमकी देते रहे। मैं पुलिस को शिकायत नहीं कर रहा हूं। मैं सेवा नियमावली व शिष्टाचार का पालन कर रहा हूं। मेयर ने जो किया उनकी वह जानें। मैं अपने मूल्य और तमीज नहीं छोड़ सकता। अगर वह मारपीट करते तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराता।
-एमएम खान-जिला पंचायती राज अधिकारी
आयोग की इज्जत का अर्थ हमारा अपमान नहीं: मेयर
विकास भवन सभागार में जहां मैं बैठा मुझे वहां से उठा दिया गया। उसके बाद दोबारा दूसरी कुर्सी से उठाया गया। वहां पर बैठने का मुकम्मल इंतजाम तक नहीं था। प्रोटोकोल के हिसाब से इंतजाम नहीं था। वित्त आयोग की इज्जत है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारा अपमान होगा। जब मैं जाने लगा तो डीपीआरओ एमएम खान बार-बार मेरे सामने आकर खड़े हो जाते। इससे मेरा मूड खराब हो गया। मैंने उन्हें सिर्फ डांटा। थप्पड़ मारने की धमकी संबंधी आरोप बेबुनियाद हैं।
-विनोद चमोली, मेयर
बैठक में मेयर व नगर निगम के अधिकारी आते तो इससे उन्हें लाभ ही होता। हमें भी तमाम बातों की जानकारी मिलती। विकास के लिए हमें मिलकर काम करने की आदत डालनी चाहिए।
-सीएमएस बिष्ट, सदस्य राज्य वित्त आयोग
मेयर का बैठक से पहले ही हमसे बिना मिले रूठकर चले जाना दुखद है। पांच वर्ष में एक बार यह बैठक होती है। मेयर को चाहिए था कि वह इस बैठक का लाभ उठाते। सुझाव रखते और कुछ बातें ग्रहण करते। कौन कहां बैठे इसको प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाना ठीक नहीं था। कम से कम वह हम लोगों से तो मिलते। हम सात जिलों की बैठक में शामिल हो चुके हैं। हर जगह लोग राज्य वित्त आयोग से उचित लाभ लेने के लिए पूरी तन्मयता से बैठक में शामिल होते हैं।
-अविकल थपलियाल, सदस्य राज्य वित्त आयोग
मेयर ने थप्पड़ मारने की धमकी दी है तो यह शर्मनाक है। यह शिष्टाचार, तहजीब के साथ-साथ नगर के पहले नागरिक का अशोभनीय आचरण है। इसका हम सभी पार्षदों को दुख है। इतनी महत्वपूर्ण बैठक में किसी भी नगर निगम अधिकारी का न होना हैरत पैदा करता है। यह दुखद, शर्मनाक और निगम के लिए नुकसानदायक है।
-डॉ. विजेंद्र पॉल सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस पार्षद
मैं राज्य वित्त आयोग की बैठक में गया था। लेकिन हंगामे के बाद कहा गया कि निगम से संबंधी बैठक समाप्त हो गई। तो मैं वापस चला आया।
-ओमप्रकाश पंत, वरिष्ठ वित्त अधिकारी नगर निगम