एमएनए ने पलट दिया मेयर का समझौता

अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 21 Nov 2013 12:51 PM IST
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dispute between municipal corporation officers

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देहरादून नगर निगम के कुछ अधिकारियों को मुख्य नगर अधिकारी ने ऐसा पत्र जारी किया, जिसने उन्हें परेशान कर दिया है।
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वाहनों को ठीक कराने का समझौता
वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह और एएमएनए उदय सिंह राणा इन दिनों काफी परेशान हैं। उन्हें मुख्य नगर अधिकारी अशोक कुमार ने ऐसा पत्र जारी किया है, जिसे पढ़कर उनके होश उड़ गए हैं। पत्र में कहा गया है कि उन्होंने नियम के खिलाफ जाते हुए निगम के बजट से डीवीडब्ल्यूएम कंपनी द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों को ठीक कराने का समझौता किया है।
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अगर नगर निगम के बजट से वाहनों की मरम्मत हुई तो यह वित्तीय अनियमितता होगी और इसकी रिकवरी दोनों अधिकारियों से की जाएगी। वाहनों की मरम्मत पर करीब दस लाख रुपए खर्च का अनुमान है। दरअसल, शहर की सफाई व्यवस्था में नगर निगम के 55 वाहन लगे हैं। इनका उपयोग डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी करती है। इनमें से 22 वाहन खराब हैं।

इस वजह से शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ गई। इस बीच मेयर विनोद चमोली ने कंपनी को तलब किया तो कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उनके पास 22 वाहनों की मरम्मत कराने के लिए बजट नहीं है। कुछ दिन बाद मेयर ने कंपनी और निगम अधिकारियों के संग बैठक की।

मेयर की बात मान गए सभी पक्ष

बैठक में कंपनी ने यही कहा कि उनके पास वाहनों को मरम्मत कराने के लिए बजट नहीं है। इसके बाद मेयर ने कहा कि निगम अपने बजट से वाहनों को ठीक करा देगा। लेकिन कंपनी को यह रुपया निगम को लौटाना होगा। इस पर सभी पक्ष मान गए। बुधवार को मुख्य नगर अधिकारी ने आरके सिंह और उदय सिंह राणा को पत्र जारी कर दिया।

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सूत्रों के अनुसार, मुख्य नगर अधिकारी ने दोनों अधिकारियों से कहा कि एमओयू में साफ लिखा है कि निगम के वाहनों का कंपनी उपयोग करेगी और खराब होने पर उनको ठीक कराने का जिम्मा कंपनी का होगा। ऐसे में वाहनों की मरम्मत निगम नहीं करा सकता। उधर, मेयर विनोद चमोली ने कहा है कि शहर में बिगड़ रही सफाई व्यवस्था के मद्देनजर यह समझौता हुआ था।

मेयर ने भी एमएनए का फैसला पलटा
मेयर विनोद चमोली ने भी मुख्य नगर अधिकारी का आदेश पलट दिया है। उन्होंने दो लाख रुपए तक के काम कोटेशन से ही कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2008 का हवाला दिया है। बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि दो लाख रुपए तक के काम टेंडर की बजाए कोटेशन से कराए जाएं।

बैठक में प्रस्ताव पर मुहर भी लग गई थी। इसके बावजूद मंगलवार को मुख्य नगर अधिकारी ने विभिन्न वार्डों में होने वाले कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित कर लिए। ये सभी काम दो लाख रुपए से कम के थे।

पार्षदों ने बोर्ड बैठक का अपमान बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जताई है। इस बीच बुधवार को मेयर विनोद चमोली ने एमएनए को पत्र लिख कर आदेश दिए कि दो लाख रुपये तक के काम कोटेशन से ही कराए जाएं।

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