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उत्तराखंडः कांग्रेस की सूची पर छिड़ा महासंग्राम
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 27 Mar 2015 09:58 AM IST
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कांग्रेस को लग रहा था कि उत्तराखंड कार्यकारिणी की घोषणा के बाद महीनों से चली आ रही खींचतान कम होगी लेकिन हुआ उल्टा।
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ऐलान की गई सूची पर संग्राम छिड़ गया है। बढ़ गई है। भारी भरकम प्रदेश कार्यकारिणी बनाने के बाद भी असंतोष कम नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं कार्यकारिणी में शामिल किए गए कई पदाधिकारी सूची में अपना कद ‘छोटा’ किए जाने को लेकर बेहद नाराज हैं।
सचिव बनाए गए पूर्व राज्यमंत्री मनीष नागपाल ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देकर इस पद को किसी अन्य कार्यकर्ता को देने का आग्रह किया है। प्रदेश अध्यक्ष को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा है कि ‘यह पद मेरी गरिमा के प्रतिकूल है।’
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कार्यकारिणी में कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी पचास सचिवों की सूची में डाल दिया गया है। उत्तरकाशी से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और कभी कार्यकारिणी में वरिष्ठ महासचिव रहे नत्थी लाल शाह इस बार सचिव बनाए गए हैं। महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रहीं डा. संतोष चौहान कमेटी में शामिल किए जाने को लेकर नाराज बताई जा रही हैं।
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उनके करीबियों को कहना है कि वे फिर से महिला आयोग की अध्यक्ष बनाना चाहती थीं उन्हें जानकर उपाध्यक्ष बनाया गया ताकि दायित्वधारियों की दौड़ से बाहर हो जाएं।
पूर्व सांसद महेंद्र पाल जो कभी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में थे दायित्व पाकर सरकार में शामिल होना चाहते थे लेकिन उन्हें फिर से उपाध्यक्ष बना दिया गया है। बहुगुणा कैंप के नेता इस बात से खुश हैं कि जो दस नाम उनकी ओर से दिए गए थे शामिल हो गए हैं लेकिन इतनी बड़ी कार्यकारिणी बनाने की स्थिति में अपना हिस्सा कम मान रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सचिव बनाए गए गोपाल चमोली को विजय बहुगुणा महासचिव या उपाध्यक्ष बनवाना चाहते थे लेकिन उन्हें सचिव बनाया गया है। वहीं इतनी बड़ी कमेटी पर आपत्ति भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि एक-एक जिले में छह से सात प्रदेश पदाधिकारी होने से पार्टी मजबूत न होकर गुटों में बंट जाएगी।