टिकट बंटवारे के बाद अब भाजपा में मचेगा सियासी घमासान
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सत्ता में लौटने को बेसब्र भाजपा के प्रत्याशी चयन में ‘जिताऊ चेहरे’ का फार्मूला पार्टी में सियासी घमासान मचाता दिख रहा है। पार्टी ने नए चेहरों की चकाचौंध में जिस तरह अपने पुराने चेहरों को नजरअंदाज किया है, उससे उपजे हालात से निपटने के लिए अब मजबूत डैमेज कंट्रोल तंत्र की जरूरत दिख रही है।
केंद्रीय नेतृत्व ने चयन के परंपरागत फार्मेट को दरकिनार कर उन सभी दांव पेच को चला है, जिसकी पार्टी धुर विरोधी रही है। पुराने विश्वासपात्रों को थकाऊ और उबाऊ मान बाहर करने के साथ परिवारवाद से दूरी बनाने वाली भाजपा कई परिवारों के मोह में दिख रही है।
एक चौथाई सीटें बागियों को पाले में गई, जबकि चार सीटिंग विधायकों का पत्ता काट कर पार्टी ने अपनों की नाराजगी मोल ले ली। पार्टी की इस रणनीति से कई जगह विरोध के तेज सुर उठने लगने हैं, जिसका असर कांग्रेस की जारी होने वाली सूची में भी दिख सकता है।
भाजपा की जारी 64 प्रत्याशियों की सूची में 18 बाहरी और प्रत्याशी के साथ आठ ऐसी और सीटें है जहां विरोध के सुर तेज हो गए हैं। अपनों के बीच डैमेज कंट्रोल के साथ पार्टी में हावी होते कांग्रेस के हैवीवेट चेहरों को हदें तय करना अब सबसे बढ़ी चुनौती दिख रही है।
पार्टी की घोषित सूची में कोई ऐसा जनपद नहीं बचा जहां विरोध और नाराजगी झेलनी नहीं पड़ेगी। उत्तरकाशी की यमुनोत्री सीट पर केदार सिंह के टिकट मिलने पर दावेदार जगवीर भंडारी, मनवीर चौहान और गजेंद्र सिंह राणा का विरोध तेज होगा।
चमोली जनपद में कर्णप्रयाग सीट पर सुरेंद्र सिंह नेगी के टिकट से पूर्व विधायक अनिल नौटियाल की नाराजगी दिखेगी। नौटियाल वर्ष 2012 में भी टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़े थे और पार्टी हारी थी।
केदारनाथ सीट पर बागी शैलारानी रावत का टिकट वहां आशा नौटियाल और अजेंद्र अजय की नाराजगी का सबब बनता दिख रहा है। नरेंद्रनगर में सुबोध उनियाल को टिकट मिला तो दावेदार ओमगोपाल ने निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर दिया है।
प्रतापनगर सीट पर भी विजय सिंह पंवार की मुखालफत तय है। भगवानपुर में सुबोध उनियाल को पुराने दावेदारों से अधिक विधानसभा में पार्टी संगठन को साथ लेने का दबाव है।
रुड़की विधानसभा में प्रदीप बत्रा के खिलाफ सुरेश चंद जैन ने विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है। राजपुर सीट पर प्रदेश महामंत्री खजान दास को सरदार जीवन सहित अन्य दावेदारों का साथ पाने की चुनौती रहेगी। ज्वालापुर में सीटिंग विधायक चंद्रशेखर का टिकट काट सुरेश राठौर को प्रत्याशी बनाने से विरोध के सुर उठना तय है।
पौड़ी सुरक्षित सीट पर पार्टी ने मुकेश कोली को चेहरा बनाया जबकि घनानंद यहां से पूर्व प्रत्याशी रहे हैं। कपकोट में बलबंत सिंह भौरियाल को टिकट मिला है, जबकि इस सीट से आधा दर्जन और दावेदार थे। ऐसी लगभग 24 सीटें है जहां भाजपा के टिकट आवंटन से नाराज दावेदार परेशानी बढ़ा सकते हैं।
इन सीटों पर मचेगा बवाल
कोटद्वार - पूर्व मंत्री हरक सिंह के उतरने से यह सीट आकर्षण का केंद्र बन गई है। यहां हरक को कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के साथ भाजपा के पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत से चुनौती मिलेगी।
यमकेश्वर- तीन बार की विधायक विजय बड़थ्वाल का टिकट काटने का विरोध दिल्ली दरबार में गूंज रहा है। पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी की बेटी ऋतु भूषण खंडूड़ी के लिए यह खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
भगवानपुर - कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल सुबोध राकेश को यहां टिकट तो मिला है, लेकिन उनकी टक्कर अपनी भाभी मामता राकेश से रहने वाली है। परिवार की यह लड़ाई सीट पर मुकाबले को रोचक बनाएगी।
चौबट्टाखाल - भाजपा ने सीटिंग विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ रावत की नाराजगी मोल लेकर कांग्रेस से आए सतपाल महाराज को इस सीट से उतार दिया है। महाराज के लिए सीट जीतना ही नहीं तीरथ भी चुनौती साबित होंगे।
नैनीताल - भाजपा ने इस सीट पर बड़ा दांव खेला है। कांग्रेस के मंत्री यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य अपनी सियासी पारी शुरू कर रहे हैं। एक ही परिवार के दो लोगों को भाजपा ने टिकट देकर सबको चौंका दिया। उनका मुकाबला प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक सरिता आर्य से होगा।
देवप्रयाग - इस सीट की रोचकता यहां शिक्षा और सिंचाई मंत्री से जुड़े मिथक के चलते तो है, लेकिन उसके अलावा पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट का टिक ट काट कर युवा चेहरे विनोद कंडारी को उतारने से चुनौती और बढ़ गई है।
धनौल्टी - सीटिंग विधायक महावीर रांगड़ का टिकट काट नारायण सिंह राणा को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर अब जीत पाने में पार्टी को रांगड़ ही नहीं बल्कि दूसरे दावेदारों का विरोध भी झेलना पड़ेगा।